फेसबुक मामले पर अब संसदीय समिति के सदस्यों के बीच घमासान, ट्विटर पड़ आपस में भिड़े नेता
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अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल (डब्लूएसजे) में छपे एक लेख के बाद भारत में फेसबुक को लेकर राजनीतिक घमासान लगातार जारी है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के बयान से विवाद और बढ़ गया है। संसद की सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित स्थायी समिति द्वारा फेसबुक से जुड़े एक ताजा विवाद को लेकर इस सोशल नेटवर्किंग कंपनी से जवाब मांगने की संभावना के बीच बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और टीएमसी नेता मोइत्रा के बीच टि्वटर पर वाकयुद्ध देखने को मिला। दोनों के बीच इस लड़ाई में टीएमसी के सांसद महुआ मोइत्रा ने शशि थरूर का समर्थन किया है।
वहीं भाजपा नेताओं के संबंध में फेसबुक के रूख के बारे में वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि समिति रिपोर्ट के बारे में फेसबुक का पक्ष सुनना चाहेगी।
दरअसल भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का फैसला अंतिम होना चाहिए वहीं तृणमूल कांग्रेस सदस्य महुआ मोइत्रा ने जोर दिया कि अमेरिकी कंपनी पर जवाबदेही बनती है।
मोइत्रा ने दावा किया कि फेसबुक के पूर्व कर्मचारियों ने अनौपचारिक रूप से हमसे (स्थायी समिति) संपर्क किया और सूचित किया कि वास्तव में ये मुद्दे फेसबुक के भीतर आंतरिक रूप से सवाल-जवाब सत्र में उठाए गए थे लेकिन इसके बारे में बहुत कुछ नहीं किया गया था।
बता दें कि थरूर सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी समिति के अध्यक्ष हैं। मोइत्रा ने ट्विटर पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि फेसबुक पर अधिकतम जिम्मेदारी बनती है और न केवल स्थायी संसदीय समिति के लिए, बल्कि भारत के लोगों के लिए भी।
वहीं दुबे ने जोर दिया कि संसदीय समिति कोई राजनीति करने का मंच नहीं है। उन्होंने लोकसभा के कामकाज से संबंधित नियम 270 का हवाला देते हुए कहा कि केवल अध्यक्ष ही सरकार से संबंधित लोगों को बुला सकते हैं।
समिति में शामिल एक अन्य भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने दुबे का समर्थन करते हुए कहा कि समिति का अध्यक्ष होने के नाते थरूर को सार्वजनिक बयान देने से पहले इस मुद्दे पर समिति से सलाह लेना चाहिए था।