{"_id":"69ddee04d95a27832c0f02ff","slug":"government-rules-out-extension-cafe-iii-norms-stricter-emission-standards-kick-april-2027-2026-04-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार का बड़ा फैसला: 2027 से CAFE-III नियमों पर नहीं होगी कोई ढील, ऑटो कंपनियों को माननी ही होंगी सख्त शर्तें","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
सरकार का बड़ा फैसला: 2027 से CAFE-III नियमों पर नहीं होगी कोई ढील, ऑटो कंपनियों को माननी ही होंगी सख्त शर्तें
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Tue, 14 Apr 2026 01:04 PM IST
विज्ञापन
सार
Government decision CAFE-III norms 2027: ऑटो इंडस्ट्री में CAFE-III (कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता) मानकों को लेकर पिछले कुछ समय से काफी चर्चा है। ऐसे में भारी उद्योग मंत्रालय ने अधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि इनके मानकों की समय सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी का कहना है कि उद्योग जगत के साथ लगातार चर्चा जारी है, इसलिए अब और देरी का कोई मतलब नहीं बनता।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : adobe stock
विज्ञापन
विस्तार
New emission rules India: सरकार ने स्पष्ट कह दिया है कि एक अप्रैल 2027 से लागू होने वालो कड़े उत्सर्जन और ईंधन दक्षता नियम नियम हर हाल में प्रभावी होंगे। अब कार कंपनियों को नई टेक्नोलॉजी में निवेश करना ही हाेगा, क्योंकि पर्यावरण से समझौता करने की गुंजाइश खत्म हाे गई है।
Hanif Qureshi Heavy Industries Ministry: अब और इंतजार नहीं
सरकार का मानना है कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के साथ पिछले काफी समय से बातचीत चल रही है। मंत्रालयों जैसे भारी उद्योग, सड़क परिवहन और बिजली विभाग ने कंपनियों को अपनी तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया है। 16 अप्रैल को एक और बड़ी उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें इन नियमों को अंतिम रूप देने और सहमति बनाने पर जोर दिया जाएगा।
ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार भले ही समय सीमा न बढ़ा रही हो, लेकिन कंपनियों को राहत देने के लिए एक नया फ्लेक्सिबल ढांचा (Flexible Framework) तैयार किया जा रहा है, जिससे इंडस्ट्री पर अचानक से बहुत बोझ न पड़ सके। इसी के साथ सरकार ने एक नई विंडो भी खोली है, जो कंपनियां उत्सर्जन कम करने के अपने लक्ष्य से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन कर सके, जिससे वे अपने अतिरिक्त कार्बन क्रेडिट्स उन कंपनियों को बेच सकें, जो लक्ष्य पीछे चल रहे हैं।
पासबुक सुविधा का विकल्प
सरकार ने कंपनियों को एक पासबुक सिस्टम का विकल्प भी दिया है। इसमें अगर किसी कंपनी के पास डेबिट बैलेंस यानी लक्ष्यों में कमी है, तो वे ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) से क्रेडिट खरीदकर अपना घाटा बराबर कर सकती हैं। इसमें सरकार का मुख्य मकसद यह है कि कंपनियां मजबूरी में नहीं, बल्कि नई टेक्नोलॉजी (जैसे हाइब्रिड और ईवी) के साथ खुद को अपडेट करें।
कंपनियों का क्या कहना है?
इस समय सरकार के सामने दो तरह की मांगें हैं। एक तरफ मारुति सुजुकी और टोयोटा जैसे दिग्गज, छोटी कारों के लिए विशेष रियायत मांग रहे हैं। तो दूसरी तरफ, टाटा, महिंद्रा और ह्ययंदै जैसी कंपनियां हैं, जो किसी भी तरह की छूट के सख्त खिलाफ हैं।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार का कहना है कि वे किसी एक कंपनी के पक्ष में नहीं, बल्कि देश के ग्रीन गोल्स और सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सरकार के अनुसार, सुरक्षा और पर्यावरण को किसी भी कीमत पर दरकिनार नहीं किया जा सकता।
कम पेट्रोल में ज्यादा माइलेज मिलेगी
ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार के इस सख्त रुक से अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाले दो से तीन वर्षों में भारतीय सड़कों पर चलने वाली गाड़ियां पहले से कहीं ज्यादा एडवांस हो सकती हैं। इसके बाद ग्राहकों को ऐसी गाड़ियां मिलेंगी, जो कम पेट्रोल खर्च करके ज्यादा माइलेज देंगी। हालांकि शुरुआत में नई तकनीक ही वजह से गाड़ियाें की कीमत में बढ़ सकती है, लेकिन सरकार का उद्देश्य देश को ग्लोबल उत्सर्जन मानकों के बराबर लाना है।
Trending Videos
Hanif Qureshi Heavy Industries Ministry: अब और इंतजार नहीं
सरकार का मानना है कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के साथ पिछले काफी समय से बातचीत चल रही है। मंत्रालयों जैसे भारी उद्योग, सड़क परिवहन और बिजली विभाग ने कंपनियों को अपनी तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया है। 16 अप्रैल को एक और बड़ी उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें इन नियमों को अंतिम रूप देने और सहमति बनाने पर जोर दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार भले ही समय सीमा न बढ़ा रही हो, लेकिन कंपनियों को राहत देने के लिए एक नया फ्लेक्सिबल ढांचा (Flexible Framework) तैयार किया जा रहा है, जिससे इंडस्ट्री पर अचानक से बहुत बोझ न पड़ सके। इसी के साथ सरकार ने एक नई विंडो भी खोली है, जो कंपनियां उत्सर्जन कम करने के अपने लक्ष्य से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन कर सके, जिससे वे अपने अतिरिक्त कार्बन क्रेडिट्स उन कंपनियों को बेच सकें, जो लक्ष्य पीछे चल रहे हैं।
पासबुक सुविधा का विकल्प
सरकार ने कंपनियों को एक पासबुक सिस्टम का विकल्प भी दिया है। इसमें अगर किसी कंपनी के पास डेबिट बैलेंस यानी लक्ष्यों में कमी है, तो वे ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) से क्रेडिट खरीदकर अपना घाटा बराबर कर सकती हैं। इसमें सरकार का मुख्य मकसद यह है कि कंपनियां मजबूरी में नहीं, बल्कि नई टेक्नोलॉजी (जैसे हाइब्रिड और ईवी) के साथ खुद को अपडेट करें।
कंपनियों का क्या कहना है?
इस समय सरकार के सामने दो तरह की मांगें हैं। एक तरफ मारुति सुजुकी और टोयोटा जैसे दिग्गज, छोटी कारों के लिए विशेष रियायत मांग रहे हैं। तो दूसरी तरफ, टाटा, महिंद्रा और ह्ययंदै जैसी कंपनियां हैं, जो किसी भी तरह की छूट के सख्त खिलाफ हैं।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार का कहना है कि वे किसी एक कंपनी के पक्ष में नहीं, बल्कि देश के ग्रीन गोल्स और सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सरकार के अनुसार, सुरक्षा और पर्यावरण को किसी भी कीमत पर दरकिनार नहीं किया जा सकता।
कम पेट्रोल में ज्यादा माइलेज मिलेगी
ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार के इस सख्त रुक से अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाले दो से तीन वर्षों में भारतीय सड़कों पर चलने वाली गाड़ियां पहले से कहीं ज्यादा एडवांस हो सकती हैं। इसके बाद ग्राहकों को ऐसी गाड़ियां मिलेंगी, जो कम पेट्रोल खर्च करके ज्यादा माइलेज देंगी। हालांकि शुरुआत में नई तकनीक ही वजह से गाड़ियाें की कीमत में बढ़ सकती है, लेकिन सरकार का उद्देश्य देश को ग्लोबल उत्सर्जन मानकों के बराबर लाना है।
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें ऑटोमोबाइल समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। ऑटोमोबाइल जगत की अन्य खबरें जैसे लेटेस्ट कार न्यूज़, लेटेस्ट बाइक न्यूज़, सभी कार रिव्यू और बाइक रिव्यू आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
