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इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो का आज आखिरी दिन: E20 के बाद E100 की तैयारी, 5000 बायोगैस प्लांट का लक्ष्य
Thu, 13 Aug 2026 11:38 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 13 Aug 2026 11:38 AM IST
सार
भारत बायोएनर्जी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर रहा है। देश में कंप्रेस्ड बायोगैस के 5,000 प्लांट लगाने के लक्ष्य से लेकर, E20 के बाद E85 और E100 की ओर बढ़ने तक, ग्रेटर नोएडा के इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो में विशेषज्ञों ने देश की ऊर्जा रणनीति के अगले चरण की तस्वीर सामने रखी।
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बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो का आज आखिरी दिन
- फोटो : डीडी न्यूज
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विस्तार
ग्रेटर नोएडा में आयोजित तीन दिवसीय ‘इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो 2026’ का आज आखिरी दिन है। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित इस वैश्विक आयोजन में देश-विदेश के नीति-निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज, निवेशक, तकनीकी विशेषज्ञ, टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स और इनोवेटर्स एक मंच पर जुटे। एक्सपो के दौरान बायोएनर्जी सेक्टर की नवीनतम तकनीकों, उत्पादों और भविष्य की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों, नेट जीरो की दिशा में प्रयासों और बायोएनर्जी आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना है।
तीन दिवसीय आयोजन के आखिरी दिन तक 25 से अधिक कॉन्फ्रेंस सेशन और 120 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के शामिल होने की संभावना है। एक्सपो में 150 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए हैं, जबकि एक हजार से अधिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा 15 हजार से अधिक व्यावसायिक आगंतुकों के पहुंचने की संभावना जताई गई है। तीसरे और अंतिम दिन छठे ‘इंडिया ग्रीन एनर्जी अवार्ड्स’ का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन, सीबीजी, बायोडीजल, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, वेस्ट-टू-एनर्जी, बायोमास और कार्बन मार्केट जैसे क्षेत्रों पर भी विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे।
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तीन दिवसीय आयोजन के आखिरी दिन तक 25 से अधिक कॉन्फ्रेंस सेशन और 120 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के शामिल होने की संभावना है। एक्सपो में 150 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉल लगाए गए हैं, जबकि एक हजार से अधिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा 15 हजार से अधिक व्यावसायिक आगंतुकों के पहुंचने की संभावना जताई गई है। तीसरे और अंतिम दिन छठे ‘इंडिया ग्रीन एनर्जी अवार्ड्स’ का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन, सीबीजी, बायोडीजल, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, वेस्ट-टू-एनर्जी, बायोमास और कार्बन मार्केट जैसे क्षेत्रों पर भी विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे।
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बायोएनर्जी से बदलेगी ऊर्जा की तस्वीर?
- भारत में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता घटाने की कोशिश अब एक नए चरण में पहुंच रही है। 'इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो' में विशेषज्ञों ने देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), एथेनॉल ब्लेंडिंग और कृषि आधारित ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं पर चर्चा की।
- इस दौरान सामने आया कि सरकार देशभर में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन का बड़ा नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। वहीं, E20 के बाद भारत की नजर भविष्य में E85 और E100 जैसे ज्यादा एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर भी है।
- हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सिर्फ नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं होगा। तकनीक को आसान बनाना, लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना और कृषि क्षेत्र को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ना भी उतना ही जरूरी होगा।
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5000 बायोगैस प्लांट का मेगा-प्लान
- सरदार सवर्ण सिंह नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ बायो एनर्जी के डायरेक्टर जनरल अतुल मोहोड़ के मुताबिक, देश में सीबीजी प्लांट लगाने की काफी बड़ी संभावनाएं हैं। सरकार ने बड़ी संख्या में ऐसे प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई है। उनके अनुसार, फिलहाल देश में 132 सीबीजी प्लांट ऐसे हैं, जिन्हें मंत्रालय की ओर से वित्तीय सहायता दी गई है। इसके अलावा करीब 240 प्लांट निर्माणाधीन हैं।
- सरकार ने लंबे समय में देशभर में लगभग 5,000 सीबीजी प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इससे कृषि अवशेष, जैविक कचरे और अन्य बायोमास को ऊर्जा में बदलने के अवसर बढ़ सकते हैं। सीबीजी की खासियत यह है कि इसका उत्पादन स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैविक संसाधनों से किया जा सकता है। इससे कचरे के बेहतर इस्तेमाल के साथ-साथ वैकल्पिक ईंधन के स्रोत को भी मजबूती मिल सकती है।
E20 को लेकर गलतफहमी दूर करना जरूरी
- E20 यानी पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर भी एक्सपो में चर्चा हुई। स्टीयर वर्ल्ड के ग्लोबल सीईओ नितिन गुप्ता ने कहा कि जब भी किसी नई तकनीक या ईंधन को बड़े पैमाने पर अपनाने की कोशिश होती है, तो उसके सामने कुछ चुनौतियां आती हैं। उनका मानना है कि E20 जैसे विषय को आम लोगों के लिए सरल भाषा में समझाने की जरूरत है। उनके अनुसार, लोगों के बीच मौजूद कुछ गलत सूचनाएं भी भ्रम पैदा कर रही हैं।
- उन्होंने भारत की इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश के मजबूत तकनीकी आधार को देखते हुए जरूरत इस बात की है कि सही जानकारी लोगों तक स्पष्ट और आसान तरीके से पहुंचाई जाए।
मीठा ज्वार भी बनेगा ऊर्जा का स्रोत
- बायोएनर्जी का भविष्य सिर्फ गन्ने या अन्य पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं है। ICAR-इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मिल्लेट्स रिसर्च के प्रिंसिपल साइंटिस्ट एवी उमाकांत ने मीठे ज्वार को भी ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोगी फसल बताया।
- मीठे ज्वार से मिलने वाले रस का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन के लिए किया जा सकता है। जरूरत के मुताबिक इसका इस्तेमाल सीबीजी उत्पादन में भी किया जा सकता है। इतना ही नहीं, इस प्रक्रिया के बाद बचने वाला बगास (रेशेदार अवशेष) भी सीबीजी बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी एक ही फसल से अलग-अलग स्तर पर बायोएनर्जी उत्पादन की संभावना बनती है।
E20 के बाद E85 और E100 की तैयारी
नोवोनेसिस के रीजनल प्रेसिडेंट कृष्ण मोहन पुव्वाडा के मुताबिक, भारत ने बायो E3 और बायोफ्यूल पॉलिसी जैसे प्रयासों के साथ टिकाऊ तकनीकों की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि भारत ने E20 ब्लेंडिंग लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर लिया है। अब देश की दिशा आगे बढ़कर E85 और E100 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन की ओर है। भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और उपलब्ध स्किल सेट को देखते हुए उनका मानना है कि देश भविष्य में इन लक्ष्यों तक भी पहुंच सकता है।कृषि और ऊर्जा का जुड़ाव बनेगा बड़ा अवसर
बायोएनर्जी की सबसे बड़ी संभावनाओं में से एक कृषि क्षेत्र से जुड़ी है। खेतों से निकलने वाले अवशेष, जैविक कचरा और ऊर्जा फसलों को अगर व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो ये सिर्फ अपशिष्ट नहीं रहेंगे, बल्कि ऊर्जा के कच्चे माल में बदल सकते हैं। सीबीजी प्लांट का विस्तार इसी मॉडल को गति दे सकता है। दूसरी तरफ मीठे ज्वार जैसी फसलों का इस्तेमाल एथेनॉल और सीबीजी दोनों के लिए किया जा सकता है। इससे किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक अवसर पैदा होने के साथ देश को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत भी मिल सकते हैं।सिर्फ लक्ष्य नहीं, सही क्रियान्वयन भी जरूरी
- भारत ने बायोफ्यूल के क्षेत्र में महत्वाकांक्षी लक्ष्य जरूर तय किए हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स की बातों से साफ है कि आगे की राह में तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर, नीति और जन-जागरूकता की अहम भूमिका होगी।
- सीबीजी के हजारों प्लांट लगाने से लेकर E100 की दिशा में आगे बढ़ने तक, हर चरण में स्थानीय संसाधनों और भारतीय तकनीकी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करना होगा।
- अगर इन प्रयासों को सही तरीके से आगे बढ़ाया गया, तो बायोएनर्जी सिर्फ पेट्रोल-डीजल का विकल्प नहीं रहेगी, बल्कि कृषि, उद्योग और पर्यावरण, तीनों के लिए नए अवसर तैयार करने वाला सेक्टर बन सकती है।