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Digital Frauds: डिजिटल ठगी में भारतीयों को सबसे ज्यादा नुकसान! दुनिया के औसत से 36% अधिक गंवा रहे पैसे
Wed, 17 Jun 2026 08:11 PM IST
Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Wed, 17 Jun 2026 08:11 PM IST
सार
डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारतीय उपभोक्ता साइबर ठगी का बड़ा शिकार बन रहे हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल फ्रॉड में भारतीयों का औसत वित्तीय नुकसान वैश्विक औसत से 36 फीसदी ज्यादा है। हालांकि राहत की बात यह है कि संदिग्ध डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में पिछले एक साल में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
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साइबर फ्रॉड
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
डिजिटल लेनदेन की सुविधा ने जहां हमारी जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं इसने साइबर अपराधियों को भी हमारी जेबों तक पहुंचने का एक अदृश्य रास्ता दे दिया है। 16 जून को मुंबई से जारी 'ट्रांसयूनियन' (TransUnion) की एक विस्तृत रिपोर्ट भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक ऐसी तस्वीर पेश करती है, जो राहत भी देती है और एक गहरी चिंता में भी डालती है।
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जब कोई भारतीय नागरिक साइबर ठगी का शिकार होता है, तो उसकी जमा-पूंजी पर दुनिया के बाकी देशों की तुलना में कहीं ज्यादा गहरी चोट लगती है।
साइबर फ्रॉड के मामलों में वैश्विक स्तर पर हम कहां खड़े हैं?
निशाने पर है हर दूसरा भारतीय
लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर सबसे बड़ा खतरा
अगर उद्योगों की बात करें, तो 2025 में पार्सल और कूरियर जैसे लॉजिस्टिक्स सेवाएं सबसे जोखिम भरे क्षेत्र साबित हुए, जहां संदिग्ध डिजिटल धोखाधड़ी दर सर्वाधिक 16.3 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद टेलीकॉम, बीमा, वीडियो गेमिंग, कम्युनिटी प्लेटफॉर्म्स, वित्तीय सेवाओं, रिटेल (खुदरा) और ट्रैवल व लेज़र सेक्टर का स्थान है।
ट्रांसयूनियन ने दी चेतावनी
ट्रांसयूनियन ने आगाह किया है कि धोखाधड़ी के प्रयासों में कमी आना हमारी मजबूत होती डिजिटल सुरक्षा का प्रमाण है, लेकिन खतरा टला नहीं है। जैसे-जैसे डिजिटल तकनीक हमारी जिंदगी में और गहरी उतरेगी, पहचान की चोरी और भेष बदलकर ठगने जैसी तरकीबें आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी रहेंगी।
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रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जब कोई भारतीय नागरिक साइबर ठगी का शिकार होता है, तो उसकी जमा-पूंजी पर दुनिया के बाकी देशों की तुलना में कहीं ज्यादा गहरी चोट लगती है।
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साइबर फ्रॉड के मामलों में वैश्विक स्तर पर हम कहां खड़े हैं?
- आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल डिजिटल धोखाधड़ी के चलते एक भारतीय उपभोक्ता को औसतन 2,265 अमेरिकी डॉलर (लगभग 2.04 लाख रुपये) का नुकसान झेलना पड़ा। वहीं, इसी अवधि के दौरान वैश्विक स्तर पर ठगी का यह औसत 1,671 डॉलर था। सीधे शब्दों में कहें तो भारतीय नागरिक साइबर जालसाजों के हाथों वैश्विक औसत से 36 प्रतिशत अधिक रकम गंवा रहे हैं।
- इस डराने वाली तस्वीर का एक सकारात्मक पहलू भी है। वर्ष 2025 में भारत की 'संदिग्ध डिजिटल धोखाधड़ी दर' गिरकर 7.1 प्रतिशत पर आ गई है, जो पिछले साल 13.1 प्रतिशत के खतरनाक स्तर पर थी। यह दर लगभग आधी हो गई है।
- इस अहम सुधार के पीछे सरकार और निजी उद्योगों के साझा प्रयास छिपे हैं। डिजिटल साक्षरता अभियानों, ग्राहकों को जागरूक करने, फोन नंबर के कड़े वेरिफिकेशन और एजेंसियों के बीच साइबर इंटेलिजेंस साझा करने की वजह से ठगों के हौसले पस्त हुए हैं। हालांकि, सुकून की सांस लेने से पहले हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारी सुधरी हुई दर (7.1%) भी 3.8 प्रतिशत के वैश्विक औसत से करीब दोगुनी है।
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निशाने पर है हर दूसरा भारतीय
- रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा अभी भी जालसाजों के रडार पर है। अगस्त से दिसंबर 2025 के मध्य, 59 प्रतिशत भारतीयों ने माना कि उन्हें ठगने की कोशिश की गई। इनमें से 13 प्रतिशत लोग वास्तव में ठगी का शिकार हो गए, जो कि 10 प्रतिशत के वैश्विक औसत से काफी ऊपर है।
- आजकल साइबर अपराधी नए खाते बनाने की मेहनत करने के बजाय आपके पुराने और चालू खातों के 'लॉगिन' पर सेंधमारी करने लगे हैं। भारतीय उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा 'फिशिंग' यानी फर्जी लिंक के जरिए जानकारी चुराने का शिकार बनाया जा रहा है। इसके अलावा, फोन कॉल, एसएमएस और भरोसेमंद ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर बैठे फर्जी 'थर्ड-पार्टी' विक्रेताओं के जरिए भी लोगों को बड़े पैमाने पर ठगा जा रहा है।
लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर सबसे बड़ा खतरा
अगर उद्योगों की बात करें, तो 2025 में पार्सल और कूरियर जैसे लॉजिस्टिक्स सेवाएं सबसे जोखिम भरे क्षेत्र साबित हुए, जहां संदिग्ध डिजिटल धोखाधड़ी दर सर्वाधिक 16.3 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद टेलीकॉम, बीमा, वीडियो गेमिंग, कम्युनिटी प्लेटफॉर्म्स, वित्तीय सेवाओं, रिटेल (खुदरा) और ट्रैवल व लेज़र सेक्टर का स्थान है।
ट्रांसयूनियन ने दी चेतावनी
ट्रांसयूनियन ने आगाह किया है कि धोखाधड़ी के प्रयासों में कमी आना हमारी मजबूत होती डिजिटल सुरक्षा का प्रमाण है, लेकिन खतरा टला नहीं है। जैसे-जैसे डिजिटल तकनीक हमारी जिंदगी में और गहरी उतरेगी, पहचान की चोरी और भेष बदलकर ठगने जैसी तरकीबें आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी रहेंगी।