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Meta Threat Report: अमेरिका के बाद भारत बना स्कैमर्स का बड़ा निशाना; मेटा की रिपोर्ट में खुलासा
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Wed, 18 Mar 2026 01:59 PM IST
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सार
Cyber Scams India: मेटा की ताजा Adversarial Threat Report 2026 ने भारतीय इंटरनेट यूजर्स के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्कैम सिंडिकेट निशाना बना रहे हैं। एआई तकनीक का इस्तेमाल कर अब अपराधी डिजिटल अरेस्ट से लेकर नुडिफाई एप्स जैसे घिनौने अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। जानिए कैसे तकनीक और सतर्कता से आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
Cyber Scam
- फोटो : FREEPIK
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विस्तार
2026 की एक नई वैश्विक सुरक्षा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ऑनलाइन ठगी अब पहले से ज्यादा एडवांस और खतरनाक हो चुकी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से स्कैमर्स अब फेक पहचान, डीपफेक वीडियो और बेहद भरोसेमंद बातचीत तैयार कर रहे हैं। अमेरिका के बाद भारत ऐसे घोटालों का दूसरा सबसे बड़ा निशाना बनकर उभरा है। सस्ता इंटरनेट, बढ़ते डिजिटल पेमेंट्स और कम डिजिटल जागरूकता इस खतरे को और बढ़ा रहे हैं।
भारत क्यों बना टारगेट?
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधी सबसे पहले अंग्रेजी बोलने वाले अमेरिकी यूजर्स को निशाना बनाते हैं, लेकिन अब भारत तेजी से उनकी सूची में ऊपर आ चुका है। भारत में बड़ी ऑनलाइन आबादी, सस्ता इंटरनेट और स्मार्टफोन और तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट। ये सभी फैक्टर स्कैमर्स के लिए परफेक्ट टारगेट मार्केट बनाते हैं।
ये भी पढ़ें: Shopping Hacks: अमेजन-Flipkart जैसी वेबसाइट्स के नकली समान से बचना है? जानें स्कैम पहचानने के सीक्रेट तरीके
एआई बना स्कैमर्स का सबसे बड़ा हथियार
अब ठगी सिर्फ फर्जी कॉल या मैसेज तक सीमित नहीं रही। एआई ने इसे कई गुना खतरनाक बना दिया है। जैसे:
नए तरह के स्कैम
रिपोर्ट में कई खतरनाक ट्रेंड सामने आए, जैसे डिजिटल अरेस्ट स्कैम, नकली पुलिस या अधिकारी बनकर वीडियो कॉल, डराकर पैसे वसूले जाते हैं, फेक रेंट और जॉब स्कैम, घर या नौकरी के नाम पर ठगी, फेक फ्यूनरल लाइवस्ट्रीम और शोकग्रस्त परिवारों को निशाना। ये स्कैम लोगों की भावनाओं और मजबूरी का फायदा उठाते हैं।
सीमा पार फैला साइबर अपराध
जांच में सामने आया कि कई स्कैम नेटवर्क दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे म्यांमार, कंबोडिया, लाओस से ऑपरेट होते हैं। यहां अलग-अलग देशों के कानून, सीमित पुलिस अधिकार, आसान लोकेशन बदलने जैसी समस्याएं थी। इसलिए इन नेटवर्क्स को पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है
एआई न्यूडीफाई एप्स
रिपोर्ट में एक और गंभीर खतरा सामने आया कि एआई टूल्स जो बिना अनुमति किसी की नकली आपत्तिजनक तस्वीर बना सकते हैं। इसका इस्तेमाल ब्लैकमैल और ऑनलाइन शोषण में हो रहा है। एक्सपर्ट इसे डिजिटल गरिमा पर हमला मान रहे हैँ।
इसका समाधान क्या है?
एक्सपर्ट्स के अनुसार इससे बचने के लिए कानून मजबूत करने होंगे, यानी की एआई फ्रॉड और डीपफेक के लिए नए नियम बनाए जाने चाहिए। साथ ही सख्त साइबर क्राइम सजा का प्रावधान होना चाहिए।
ये भी पढ़े: AI Psychosis: एआई चैटबॉट्स से बढ़ रहा गलतफहमी का खतरा, नई स्टडी में मानसिक असर को लेकर चेतावनी
मेटा की बड़ी कार्रवाई:
मेटा ने 2025-26 के दौरान अपनी नीतियों का उल्लंघन करने वालों पर सर्जिकल स्ट्राइक की है:
भारत को निशाना बनाने वाले अधिकतर स्कैम ऑपरेशंस दक्षिण-पूर्व एशिया (म्यांमार, कंबोडिया और लाओस) के स्कैम सेंटर्स से संचालित हो रहे हैं। इन नेटवर्क्स को तोड़ना मुश्किल है क्योंकि अपराधी एक देश में होते हैं और शिकार दूसरे देश में करते हैं।
क्या करें और क्या न करें?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि केवल कानून पर्याप्त नहीं है, डिजिटल साक्षरता ही सबसे बड़ी ढाल है।
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भारत क्यों बना टारगेट?
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधी सबसे पहले अंग्रेजी बोलने वाले अमेरिकी यूजर्स को निशाना बनाते हैं, लेकिन अब भारत तेजी से उनकी सूची में ऊपर आ चुका है। भारत में बड़ी ऑनलाइन आबादी, सस्ता इंटरनेट और स्मार्टफोन और तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट। ये सभी फैक्टर स्कैमर्स के लिए परफेक्ट टारगेट मार्केट बनाते हैं।
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ये भी पढ़ें: Shopping Hacks: अमेजन-Flipkart जैसी वेबसाइट्स के नकली समान से बचना है? जानें स्कैम पहचानने के सीक्रेट तरीके
एआई बना स्कैमर्स का सबसे बड़ा हथियार
अब ठगी सिर्फ फर्जी कॉल या मैसेज तक सीमित नहीं रही। एआई ने इसे कई गुना खतरनाक बना दिया है। जैसे:
- फेक प्रोफाइल: स्कैमर असली जैसे फोटो और बैकस्टोरी बनाकर ठगी कर रहे हैं।
- डीपफेक वीडियो: एआई का प्रयोग करके भरोसेमंद दिखने वाले नकली चेहरे बना रहे हैं।
- नेचुरल चैटिंग: एआई से इंसानों जैसी बातचीत कर रहे हैं।
- मल्टी-लैंग्वेज स्कैम: एआई पर मल्टी-लैग्वेंज का इस्तेमाल करके आसानी से लोकल भाषा में ठगी करते हैं।
नए तरह के स्कैम
रिपोर्ट में कई खतरनाक ट्रेंड सामने आए, जैसे डिजिटल अरेस्ट स्कैम, नकली पुलिस या अधिकारी बनकर वीडियो कॉल, डराकर पैसे वसूले जाते हैं, फेक रेंट और जॉब स्कैम, घर या नौकरी के नाम पर ठगी, फेक फ्यूनरल लाइवस्ट्रीम और शोकग्रस्त परिवारों को निशाना। ये स्कैम लोगों की भावनाओं और मजबूरी का फायदा उठाते हैं।
सीमा पार फैला साइबर अपराध
जांच में सामने आया कि कई स्कैम नेटवर्क दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे म्यांमार, कंबोडिया, लाओस से ऑपरेट होते हैं। यहां अलग-अलग देशों के कानून, सीमित पुलिस अधिकार, आसान लोकेशन बदलने जैसी समस्याएं थी। इसलिए इन नेटवर्क्स को पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है
एआई न्यूडीफाई एप्स
रिपोर्ट में एक और गंभीर खतरा सामने आया कि एआई टूल्स जो बिना अनुमति किसी की नकली आपत्तिजनक तस्वीर बना सकते हैं। इसका इस्तेमाल ब्लैकमैल और ऑनलाइन शोषण में हो रहा है। एक्सपर्ट इसे डिजिटल गरिमा पर हमला मान रहे हैँ।
इसका समाधान क्या है?
एक्सपर्ट्स के अनुसार इससे बचने के लिए कानून मजबूत करने होंगे, यानी की एआई फ्रॉड और डीपफेक के लिए नए नियम बनाए जाने चाहिए। साथ ही सख्त साइबर क्राइम सजा का प्रावधान होना चाहिए।
ये भी पढ़े: AI Psychosis: एआई चैटबॉट्स से बढ़ रहा गलतफहमी का खतरा, नई स्टडी में मानसिक असर को लेकर चेतावनी
मेटा की बड़ी कार्रवाई:
मेटा ने 2025-26 के दौरान अपनी नीतियों का उल्लंघन करने वालों पर सर्जिकल स्ट्राइक की है:
- 10.9 मिलियन: फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट्स हटाए गए।
- 600,000: फेसबुक पेज डिलीट किए गए।
- 112,000: विज्ञापन (Ad) अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगाया गया।
भारत को निशाना बनाने वाले अधिकतर स्कैम ऑपरेशंस दक्षिण-पूर्व एशिया (म्यांमार, कंबोडिया और लाओस) के स्कैम सेंटर्स से संचालित हो रहे हैं। इन नेटवर्क्स को तोड़ना मुश्किल है क्योंकि अपराधी एक देश में होते हैं और शिकार दूसरे देश में करते हैं।
- प्रत्यर्पण की कमी: अलग-अलग देशों के कानूनी ढांचे की वजह से इन पर कार्रवाई कठिन होती है।
- आतंकवादी फ्रेमवर्क की मांग: एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि इन संगठित साइबर अपराध समूहों को एंटी-टेरर फ्रेमवर्क के तहत वर्गीकृत किया जाना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े कदम उठाए जा सकें।
क्या करें और क्या न करें?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि केवल कानून पर्याप्त नहीं है, डिजिटल साक्षरता ही सबसे बड़ी ढाल है।
- डिजिटल वॉटरमार्किंग: हमेशा जांचें कि क्या कंटेंट प्रमाणित है।
- अनजान कॉल्स से बचें: कोई भी पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल पर अरेस्ट या पैसों की मांग नहीं करता।
- टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA): अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर सुरक्षा की दोहरी परत लगाएं।
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