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मुश्किल में OnePlus के CEO: ताइवान ने पीट लाउ के खिलाफ जारी किया अरेस्ट वारंट, क्या अब जाएंगे जेल?
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Wed, 14 Jan 2026 03:16 PM IST
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सार
OnePlus CEO Arrest Warrant: स्मार्टफोन दिग्गज OnePlus के CEO पीट लाउ (Pete Lau) के खिलाफ ताइवान सरकार ने गिरफ्तारी का वारंट जारी किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर ताइवान के इंजीनियरों की अवैध रूप से भर्ती की है।
OnePlus सीईओ पीट लाउ
- फोटो : x.com/OnePlus
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विस्तार
ताइवान (Taiwan) की जांच एजेंसियों ने स्मार्टफोन ब्रांड वनप्लस (OnePlus) के सीईओ (CEO) पीट लाउ (Pete Lau) के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए ताइवान के इंजीनियरों की अवैध भर्ती करवाई। वनप्लस एक चीन आधारित कंपनी है और यह मामला दोनों देशों के बीच लागू विशेष नियमों से जुड़ा हुआ है।
शिलिन डिस्ट्रिक्ट प्रॉसिक्यूटर्स ऑफिस के मुताबिक, यह जांच उस आरोप से जुड़ी है जिसमें कहा गया है कि वनप्लस ने ताइवान से 70 से ज्यादा इंजीनियरों को गैरकानूनी तरीके से नौकरी पर रखा। जांच एजेंसियों ने बताया कि इस भर्ती प्रक्रिया में मदद करने वाले दो ताइवानी नागरिकों के खिलाफ पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं।
यह भी पढ़ें: पृथ्वी खुद चांद पर पहुंचा रही है हवा! नई स्टडी में खुले बड़े रहस्य, जानिए कैसे हो रहा ये चमत्कार
नियमों के साथ खेल करने का आरोप
इस पूरे मामले की जड़ ताइवान का 'क्रॉस-स्ट्रेट एक्ट' है। यह कानून चीन और ताइवान के बीच व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को नियंत्रित करता है। इसके तहत किसी भी चीनी कंपनी को ताइवान में काम करने या वहां के लोगों को नौकरी देने से पहले सरकार से विशेष अनुमति लेनी होती है।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
आरोप है कि OnePlus ने हांगकांग में एक फर्जी कंपनी बनाई। इस फर्जी कंपनी के जरिए 2015 में ताइवान में एक ब्रांच खोली गई, जिसके लिए कोई मंजूरी नहीं ली गई थी। अधिकारियों का कहना है कि यह सब इसलिए किया गया ताकि कंपनी के चीनी मालिकाना हक को छिपाया जा सके और कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
यह भी पढ़ें: एपल बना दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला स्मार्टफोन ब्रांड, Samsung-Xiaomi को छोड़ा पीछे
ताइवान सरकार का आरोप है कि कंपनी ने उनकी सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की प्रतिभाओं को चोरी-छिपे हासिल करने के लिए यह रास्ता अपनाया, जिससे देश की तकनीक की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
क्या अब गिरफ्तार होंगे पीट लाउ?
गिरफ्तारी वारंट जारी होने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें तुरंत जेल भेज दिया जाएगा। चूंकि ताइवान और चीन के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है, इसलिए जब तक लाउ ताइवान या उनके सहयोगी देशों के अधिकार क्षेत्र में नहीं जाते, उनकी गिरफ्तारी मुश्किल है। हालांकि, यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर OnePlus की छवि और उसके व्यापारिक समझौतों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल इस मामले पर कंपनी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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नियमों के साथ खेल करने का आरोप
इस पूरे मामले की जड़ ताइवान का 'क्रॉस-स्ट्रेट एक्ट' है। यह कानून चीन और ताइवान के बीच व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को नियंत्रित करता है। इसके तहत किसी भी चीनी कंपनी को ताइवान में काम करने या वहां के लोगों को नौकरी देने से पहले सरकार से विशेष अनुमति लेनी होती है।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
आरोप है कि OnePlus ने हांगकांग में एक फर्जी कंपनी बनाई। इस फर्जी कंपनी के जरिए 2015 में ताइवान में एक ब्रांच खोली गई, जिसके लिए कोई मंजूरी नहीं ली गई थी। अधिकारियों का कहना है कि यह सब इसलिए किया गया ताकि कंपनी के चीनी मालिकाना हक को छिपाया जा सके और कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।
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ताइवान सरकार का आरोप है कि कंपनी ने उनकी सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की प्रतिभाओं को चोरी-छिपे हासिल करने के लिए यह रास्ता अपनाया, जिससे देश की तकनीक की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
क्या अब गिरफ्तार होंगे पीट लाउ?
गिरफ्तारी वारंट जारी होने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें तुरंत जेल भेज दिया जाएगा। चूंकि ताइवान और चीन के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है, इसलिए जब तक लाउ ताइवान या उनके सहयोगी देशों के अधिकार क्षेत्र में नहीं जाते, उनकी गिरफ्तारी मुश्किल है। हालांकि, यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर OnePlus की छवि और उसके व्यापारिक समझौतों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल इस मामले पर कंपनी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।