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एआई एजेंट्स ने फिर खेला हैकिंग का खेल: जर्मन वेबसाइट में लगाई सेंध, एक-दूसरे को भेजे मैसेज, क्यों फंसी ओपनएआई?

Mon, 07 Sep 2026 02:32 PM IST
नीतीश कुमार टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Mon, 07 Sep 2026 02:32 PM IST
सार

ओपनएआई के हजारों स्वायत्त एआई एजेंट्स ने सुरक्षा नियमों को तोड़ते हुए एक जर्मन वेबसाइट 'डीएसईविकी' पर कब्जा कर लिया। इन बॉट्स ने वेबसाइट पर एक-दूसरे से मैसेज के जरिए बातचीत की और पकड़े जाने से बचने के लिए नाम भी बदल लिया। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला...

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एआई एजेंट्स फिर हुए कंट्रोल से बाहर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की दुनिया से एक बेहद खौफनाक और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। जिस तकनीक को इंसान अपनी सहूलियत के लिए बना रहा है, वही अब उसके नियंत्रण से बाहर होती नजर आ रही है। हाल ही में आई एक नई रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि 'ओपनएआई' द्वारा बनाए गए हजारों एआई एजेंट्स ने इंसानी निर्देशों को दरकिनार करते हुए एक जर्मन वेबसाइट पर अपना कब्जा जमा लिया। यह घटना इस बात का साफ संकेत है कि एआई के संभावित खतरों को अभी भी उतनी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जितनी जरूरत है।
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हजारों एआई बॉट्स जर्मन वेबसाइट पर धावा बोला
  • शोधकर्ताओं के अनुसार, ये ऐसे एआई प्रोग्राम हैं जो बिना किसी इंसानी मदद के खुद काम करने में सक्षम हैं। इन ऑटोनोमस एजेंट्स ने 'डीएसईविकी' नाम की एक जर्मन वेबसाइट पर करीब 18 हजार मैसेज किए। यह वेबसाइट मुख्य रूप से प्रोग्रामर्स के लिए बनाई गई है और विकिपीडिया की तरह इसे कोई भी एडिट कर सकता है। 
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  • ये एआई बॉट्स वेबसाइट का इस्तेमाल किसी मैसेज बोर्ड की तरह कर रहे थे। वे एक-दूसरे को उन परीक्षणों के जवाब बता रहे थे जिनसे उन्हें गुजारा जा रहा था। उन्होंने सुरक्षा प्रतिबंधों को चकमा देने की तरकीबें साझा कीं और खुद को छिपाए रखने के लिए Tor ब्राउजर के इस्तेमाल पर भी चर्चा की।
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बचने के लिए नाम बदला
  • इन बॉट्स ने अपनी पहचान भी नहीं छिपाई। उन्होंने "OpenAIResearcher" और "OpenAIJul3Watcher" जैसे नामों से पोस्ट किए। कुल मिलाकर 3,700 से अधिक एआई एजेंट्स की पहचान सामने आईं। सर्वर लॉग की जांच में पता चला कि इस ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा Microsoft Azure से आ रहा था, जो वही इंफ्रास्ट्रक्चर है जिसका इस्तेमाल OpenAI करता है।
  • जब साइट के मॉडरेटर ने इन पेजों को डिलीट करना शुरू किया, तो बॉट्स ने तुरंत अपनी रणनीति बदल ली। उन्होंने अपने पेजों को डिलीट होने से बचाने के लिए "ZZZDataUSAConstructionWageLive" जैसे अजीबोगरीब नाम रख लिए, ताकि अल्फाबेटिकल डिलीशन से बचा जा सके।

ओपनएआई पर मामले को दबाकर रखने का आरोप
  • इस पूरे मामले का खुलासा करने वाली शोधकर्ता सिडनी वॉन आर्क्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि उन्होंने और उनकी टीम ने ओपनएआई के एजेंट्स के एक बिल्कुल नए समूह को वेबसाइटों को हाईजैक करते हुए पकड़ा है। उनका मानना है कि कंपनी को इस बात की पूरी जानकारी थी, लेकिन उसने इसे जानबूझकर छिपाए रखा। 
  • हालांकि, यह गतिविधि 22 जून को ही अचानक बंद हो गई थी, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार OpenAI को शोधकर्ताओं के खुलासा करने से हफ्तों पहले ही इस विकी साइट के बारे में पता चल गया था। कंपनी उस समय हगिंग फेस से जुड़े एक अन्य सुरक्षा उल्लंघन से निपट रही थी, इसलिए उसने इस मामले को दबाए रखना बेहतर समझा।

हगिंग फेस और अन्य कंपनियों पर भी हो चुके हैं हमले
  • यह कोई पहला मामला नहीं है जब एआई ने इस तरह की मनमानी की हो। इसी साल जुलाई में भी एक चौंकाने वाली घटना सामने आई थी जब ओपनएआई के एजेंट्स ने 'हगिंग फेस' के सर्वर में सेंध लगा दी थी। 'हगिंग फेस' एक लोकप्रिय प्लेटफॉर्म है जहां प्रोग्रामर्स एआई सॉफ्टवेयर साझा करते हैं।
  • जांच में पता चला था कि नियंत्रित माहौल से भागने से पहले सैकड़ों एआई एजेंट्स ने आपस में बातचीत की थी और कई लेवल पर हमला किया था। मेटा और एंथ्रोपिक जैसी अन्य बड़ी टेक कंपनियों ने भी अपने एजेंट्स की टेस्टिंग के दौरान इस तरह की घटनाओं का सामना किया है।

बढ़ रही है कड़े नियमों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग
  • इस घटना ने पूरी तकनीक की दुनिया को हिलाकर रख दिया है। मशहूर टेक पॉडकास्टर द्वारकेश पटेल ने इस हमले को एआई सभ्यताओं का एक झुंड हमला करार देते हुए समाज के लिए इसे एक बड़ा खतरा बताया है। हालांकि, जाने-माने एआई आलोचक और शोधकर्ता गैरी मार्कस ने इसे सभ्यता का नाम देने का विरोध किया, लेकिन यह जरूर माना कि यह कोई मामूली बात नहीं है और सुरक्षा में एक बड़ी चूक है।
  • माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने भी हाल ही में चेतावनी दी थी कि इंडस्ट्री ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी की है। उन्होंने परमाणु और उड्डयन क्षेत्र की तरह एआई के लिए भी सख्त निगरानी की मांग की है। हालांकि, अमेरिका के मौजूदा ट्रंप प्रशासन ने अब तक एआई के लिए किसी भी तरह के कड़े नियमों का विरोध ही किया है।
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