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Mythos: क्या ‘मिथोस’ बनेगा बैंकिंग सिस्टम के लिए खतरा? RBI ने बैंकों संग शुरू की हाई लेवल चर्चा
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Fri, 24 Apr 2026 10:10 AM IST
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सार
डिजिटल बैंकिंग के दौर में एक नया AI मॉडल ‘मिथोस’ चिंता का कारण बनता दिख रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने संभावित साइबर जोखिमों को देखते हुए बैंकों, सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ हाई अलर्ट पर बातचीत शुरू कर दी है।
AI Coding
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत में डिजिटल बैंकिंग ने तेजी से अपने पांव पसारे हैं। अब पैसे ट्रांसफर से लेकर लोन लेने तक हर काम मोबाइल पर हो रहा है। लेकिन इसी बीच ‘मिथोस’ नाम का एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल चर्चा में आ गया है, जिसने बैंकिंग सेक्टर की चिंता बढ़ा दी है। रॉयटर्स के अनुसार, रिजर्व बैंक ने इस संभावित खतरे को देखते हुए बैंकों, सरकार और दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ बातचीत शुरू कर दी है।
आखिर डर किस बात का है?
मामला कुछ ऐसा है जैसे एक मजबूत ताले की चाबी किसी ऐसे सिस्टम के पास पहुंच जाए, जो उसकी कमजोरी सेकंडों में पहचान ले। विशेषज्ञों को डर है कि मिथोस जैसे AI मॉडल बैंकिंग सॉफ्टवेयर की कमजोरियां बहुत तेजी से ढूंढ सकते हैं।
अगर यह तकनीक गलत हाथों में पहुंचती है, तो साइबर हमले पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकते हैं। इससे बैंक सर्वर, पेमेंट नेटवर्क और ग्राहकों का संवेदनशील डेटा खतरे में पड़ सकता है।
क्यों बढ़ी चिंता?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिथोस को लेकर सबसे बड़ी आशंकाएं बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा से जुड़ी हैं। इसमें सॉफ्टवेयर की खामियां पहचानने की क्षमता, साइबर हमलों को आसान बनाना और डिजिटल पेमेंट सिस्टम जैसे UPI पर असर डालने जैसी बातें शामिल हैं। यानी जो तकनीक भविष्य को आसान बनाने का दावा कर रही है, वही नियंत्रण से बाहर होने पर बड़ी परेशानी भी खड़ी कर सकती है।
RBI क्यों हुआ सतर्क?
रिजर्व बैंक का काम सिर्फ मुद्रा जारी करना नहीं, बल्कि देश की पूरी बैंकिंग व्यवस्था को सुरक्षित रखना भी है। यही वजह है कि RBI अभी से संभावित जोखिमों को समझने और उनसे निपटने की रणनीति बना रहा है। बैंकों से उनके सिस्टम की सुरक्षा, AI के इस्तेमाल के नियम और संभावित खतरों से बचाव के उपायों पर सवाल पूछे जा रहे हैं।
NPCI भी रख रहा नजर
भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को संभालने वाली नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) भी इस मामले में सक्रिय हो गई है। जानकारी के मुताबिक, NPCI मिथोस का शुरुआती एक्सेस हासिल करना चाहती है, ताकि इसके रोलआउट से पहले यह समझा जा सके कि इसका असर UPI, QR कोड पेमेंट और मोबाइल ट्रांजैक्शन पर क्या पड़ सकता है।
जोखिम और मौके दोनों साथ
अगर इस तरह के AI मॉडल्स को सही तरीके से नियंत्रित किया गया, तो बैंकिंग सिस्टम पहले से ज्यादा स्मार्ट और सुरक्षित बन सकता है। फ्रॉड जल्दी पकड़े जा सकते हैं, ग्राहक सेवा बेहतर हो सकती है और लोन प्रोसेसिंग तेज हो सकती है। लेकिन अगर सुरक्षा में जरा भी चूक हुई, तो डिजिटल फ्रॉड, डेटा चोरी और सिस्टम फेल होने जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
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आखिर डर किस बात का है?
मामला कुछ ऐसा है जैसे एक मजबूत ताले की चाबी किसी ऐसे सिस्टम के पास पहुंच जाए, जो उसकी कमजोरी सेकंडों में पहचान ले। विशेषज्ञों को डर है कि मिथोस जैसे AI मॉडल बैंकिंग सॉफ्टवेयर की कमजोरियां बहुत तेजी से ढूंढ सकते हैं।
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अगर यह तकनीक गलत हाथों में पहुंचती है, तो साइबर हमले पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकते हैं। इससे बैंक सर्वर, पेमेंट नेटवर्क और ग्राहकों का संवेदनशील डेटा खतरे में पड़ सकता है।
क्यों बढ़ी चिंता?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिथोस को लेकर सबसे बड़ी आशंकाएं बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा से जुड़ी हैं। इसमें सॉफ्टवेयर की खामियां पहचानने की क्षमता, साइबर हमलों को आसान बनाना और डिजिटल पेमेंट सिस्टम जैसे UPI पर असर डालने जैसी बातें शामिल हैं। यानी जो तकनीक भविष्य को आसान बनाने का दावा कर रही है, वही नियंत्रण से बाहर होने पर बड़ी परेशानी भी खड़ी कर सकती है।
RBI क्यों हुआ सतर्क?
रिजर्व बैंक का काम सिर्फ मुद्रा जारी करना नहीं, बल्कि देश की पूरी बैंकिंग व्यवस्था को सुरक्षित रखना भी है। यही वजह है कि RBI अभी से संभावित जोखिमों को समझने और उनसे निपटने की रणनीति बना रहा है। बैंकों से उनके सिस्टम की सुरक्षा, AI के इस्तेमाल के नियम और संभावित खतरों से बचाव के उपायों पर सवाल पूछे जा रहे हैं।
NPCI भी रख रहा नजर
भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को संभालने वाली नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) भी इस मामले में सक्रिय हो गई है। जानकारी के मुताबिक, NPCI मिथोस का शुरुआती एक्सेस हासिल करना चाहती है, ताकि इसके रोलआउट से पहले यह समझा जा सके कि इसका असर UPI, QR कोड पेमेंट और मोबाइल ट्रांजैक्शन पर क्या पड़ सकता है।
जोखिम और मौके दोनों साथ
अगर इस तरह के AI मॉडल्स को सही तरीके से नियंत्रित किया गया, तो बैंकिंग सिस्टम पहले से ज्यादा स्मार्ट और सुरक्षित बन सकता है। फ्रॉड जल्दी पकड़े जा सकते हैं, ग्राहक सेवा बेहतर हो सकती है और लोन प्रोसेसिंग तेज हो सकती है। लेकिन अगर सुरक्षा में जरा भी चूक हुई, तो डिजिटल फ्रॉड, डेटा चोरी और सिस्टम फेल होने जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
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