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एआई रेट्रो ट्रेंड: 80 के वायरल ट्रेंड में शामिल होने के क्या हैं जोखिम? तस्वीर बनाने से पहले जानें ये बातें
Fri, 11 Sep 2026 11:48 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 11 Sep 2026 11:48 AM IST
सार
एआई ने अब नोस्टैल्जिया को ट्रेंड में बदल दिया है। लोगों के बीच अपनी तस्वीरों को 80 के दौर के अंदाज में बदलने का जबरदस्त क्रेज दिख रहा है। लेकिन एआई टूल में फोटो अपलोड करने से पहले डेटा प्राइवेसी से जुड़े खतरों को भी समझना जरूरी है। आइए जानते हैं ये ट्रेंड आपकी प्राइवेसी को कैसे प्रभावित कर सकता है।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सोशल मीडिया पर इन दिनों एआई से 80 के दशक की रेट्रो इमेज बनवाने का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। लोग अपनी तस्वीरों को एआई टूल्स पर अपलोड कर उन्हें रेट्रो टच दे रहे हैं। इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग रेट्रो अंदाज में तस्वीरों को पोस्ट कर अपनी पुरानी यादें ताजा कर रहे हैं।
इस ट्रेंड में खास ये है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से केवल चेहरे को ही नहीं बल्कि कपड़ों, जूलरी और फोटो में दिखने वाले आस-पास के वातावरण को भी पूरी तरह रेट्रो लुक में ढाला जा रहा है। केवल पर्सनल फोटो ही नहीं बल्कि ग्रुप फोटो को भी एआई से पूरी तरह बदला जा रहा है। आइए जानते हैं इस ट्रेंड के बारे में...
क्या है रेट्रो एआई ट्रेंड?
रेट्रो एआई ट्रेंड दरअसल ऐसा सोशल मीडिया ट्रेंड है, जिसमें लोग अपनी आज की फोटो को एआई की मदद से 1980s या खासकर 1990s के दौर की तस्वीर जैसा बनवा रहे हैं। इस ट्रेंड में एआई सिर्फ फोटो पर पुराना फिल्टर नहीं लगाता, बल्कि पूरी तस्वीर का माहौल बदल देता है। गूगल जेमिनी और चैटजीपीटी समेत कई एआई टूल्स की मदद से ऐसी तस्वीरें बनवाई जा रही हैं। इसके लिए फोटो को अपलोड कर उसे रेट्रो लुक में बदलने का कमांड देना पड़ता है।
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कैसी-कैसी तस्वीरें बना रहे लोग?
क्या है ट्रेंड से जुड़ा प्राइवेसी रिस्क?
सबसे बड़ा जोखिम क्या है?
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इस ट्रेंड में खास ये है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से केवल चेहरे को ही नहीं बल्कि कपड़ों, जूलरी और फोटो में दिखने वाले आस-पास के वातावरण को भी पूरी तरह रेट्रो लुक में ढाला जा रहा है। केवल पर्सनल फोटो ही नहीं बल्कि ग्रुप फोटो को भी एआई से पूरी तरह बदला जा रहा है। आइए जानते हैं इस ट्रेंड के बारे में...
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क्या है रेट्रो एआई ट्रेंड?
रेट्रो एआई ट्रेंड दरअसल ऐसा सोशल मीडिया ट्रेंड है, जिसमें लोग अपनी आज की फोटो को एआई की मदद से 1980s या खासकर 1990s के दौर की तस्वीर जैसा बनवा रहे हैं। इस ट्रेंड में एआई सिर्फ फोटो पर पुराना फिल्टर नहीं लगाता, बल्कि पूरी तस्वीर का माहौल बदल देता है। गूगल जेमिनी और चैटजीपीटी समेत कई एआई टूल्स की मदद से ऐसी तस्वीरें बनवाई जा रही हैं। इसके लिए फोटो को अपलोड कर उसे रेट्रो लुक में बदलने का कमांड देना पड़ता है।
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कैसी-कैसी तस्वीरें बना रहे लोग?
- यूजर्स अपनी फोटो को 90 के दशक की फिल्म के सीन, पुराने कॉलेज कैंपस, स्कूल ईयरबुक, म्यूजिक स्टोर, रेट्रो बेडरूम या पुराने शहर की गलियों में दिखा रहे हैं। कुछ तस्वीरों में डेनिम जैकेट, बड़े हेयरस्टाइल, पुराने चश्मे और विंटेज कपड़े जोड़े जा रहे हैं, जबकि कुछ में सीआरटी टीवी, कैसेट, सीडी, पोस्टर और पुराने कंप्यूटर जैसे आइटम नजर आते हैं।
- इसके अलावा बॉलिवुड स्टाइल में साड़ी, फिल्मी लाइटिंग और पुराने कैमरे जैसी विजुअल डिटेल जोड़ना भी इस ट्रेंड का एक लोकप्रिय हिस्सा है। एआई की खासियत यह है कि यूजर सिर्फ अपनी फोटो देता है और टेक्स्ट में बताता है कि उसे किस दौर, कपड़े, जगह और मूड में दिखना है।
- इस तरह के फोटो को देखकर कई बार यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि तस्वीर असली है या एआई से बनाई गई। यही वजह है कि यह ट्रेंड लोगों को आकर्षित कर रहा है। 80 और 90 की यादों को एआई के जरिए दोबारा बनाने का चलन हालिया सोशल मीडिया ट्रेंड्स में तेजी से उभरा है।
क्या है ट्रेंड से जुड़ा प्राइवेसी रिस्क?
- जब कोई यूजर एआई टूल में अपनी हाई-रेजोल्यूशन सेल्फी अपलोड करता है तो वह केवल एक फोटो नहीं होती। उसमें चेहरा, आसपास की जगह, कपड़े, कभी-कभी पहचान से जुड़ी दूसरी जानकारी और फोटो का मेटाडेटा भी हो सकता है। एआई कंपनियां ऐसे डेटा को स्टोर कर सकती हैं। इनका इस्तेमाल एआई कंपनियों की शर्तों के आधार पर हो सकता है। इसके लिए एआई कंपनी की प्राइवेसी पॉलिसी को जानना जरूरी है।
- उदाहरण के लिए, ओपनएआई के मुताबिक चैटजीपीटी के व्यक्तिगत प्लान में यूजर्स के पास मॉडल ट्रेनिंग के लिए अपनी नई बातचीत के इस्तेमाल को बंद करने का विकल्प है। टेंपरेरी चैट ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल नहीं होता और इसे 30 दिनों के भीतर सिस्टम से हटाया जाता है।
- गूगल भी जेमिनी के लिए बताता है कि कुछ डेटा की मानव समीक्षा की जा सकती है और कुछ मामलों में इसका इस्तेमाल गूगल की सेवाओं और एआई मॉडल को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। गूगल खास तौर पर यूजर्स को ऐसी गोपनीय जानकारी साझा न करने की सलाह देता है जिसे वे किसी रिव्यूअर के देखने या सेवा के सुधार में इस्तेमाल होने के लिहाज से संवेदनशील मानते हों।
सबसे बड़ा जोखिम क्या है?
- सबसे बड़ा खतरा यह है कि यूजर अक्सर किसी वायरल ट्रेंड को फॉलो करते समय एप की डेटा पॉलिसी पढ़े बिना अपनी तस्वीर अपलोड कर देते हैं। एक बार तस्वीर किसी थर्ड-पार्टी सर्विस तक पहुंच गई तो उसे कितने समय तक रखा जाएगा, किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया जाएगा और उसे किन सिस्टम या सेवा प्रदाताओं के जरिए प्रोसेस किया जाएगा, यह समझना जरूरी है।
- इसके अलावा एआई से बनाई गई तस्वीरें भविष्य में डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल या पहचान से जुड़े दुरुपयोग में भी इस्तेमाल हो सकती हैं। हर वायरल एआई ट्रेंड में अपनी तस्वीर बनवाने से पहले एआई प्लेटफॉर्म की प्राइवेसी पॉलिसी, डेटा कंट्रोल और डेटा को हटाने का विकल्प जरूर जांचना चाहिए।