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Smart Label: अब चुटकियों में होगी नकली प्रोडक्ट्स की पहचान, आ गई स्मार्टफोन से चलने वाली क्रांतिकारी तकनीक
Sat, 08 Aug 2026 07:01 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sat, 08 Aug 2026 07:01 AM IST
सार
नकली प्रोडक्ट्स की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए रिसर्चर्स ने नई एंटी-काउंटरफिट टेक्नोलॉजी विकसित की है। यह सिस्टम खास रिस्पॉन्सिव लेबल और स्मार्टफोन की मदद से कुछ ही सेकंड में बता देगा कि कोई प्रोडक्ट असली है या नकली।
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स्मार्ट लेबल (सांकेतिक)
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
दुनियाभर में नकली प्रोडक्ट्स का कारोबार लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फर्जी सामान का बाजार हजारों करोड़ रुपये का है और इसका आकार वैश्विक व्यापार का करीब 2 प्रतिशत माना जाता है। इससे न सिर्फ कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि उपभोक्ता भी धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आज के समय में नकली उत्पाद इतने असली जैसे दिखते हैं कि उन्हें पहचानना आसान नहीं होता।
इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए रिसर्चर्स ने एक नई एंटी-काउंटरफिट (Anti-Counterfeit) तकनीक विकसित की है। उनका दावा है कि भविष्य में केवल स्मार्टफोन की मदद से किसी भी प्रोडक्ट की असलियत जांची जा सकेगी और इसके लिए किसी महंगे स्कैनर या विशेष हार्डवेयर की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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इस तकनीक का मकसद महंगे ऑथेंटिकेशन सिस्टम की जगह एक ऐसा समाधान देना है, जिसे कंपनियां, रिटेलर्स और आम ग्राहक आसानी से इस्तेमाल कर सकें।
दूसरी तकनीक इसकी मजबूती से जुड़ी है। इसमें नैनोटेक्नोलॉजी आधारित लिंकर पॉलीमर का इस्तेमाल किया गया है, जिससे लेबल गर्मी और नमी जैसी परिस्थितियों में भी सुरक्षित रहता है। टेस्टिंग के दौरान इसका रंग भी फीका नहीं पड़ा, जिससे यह सप्लाई चेन में लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए उपयुक्त साबित हुआ।
रिसर्चर्स के अनुसार, ट्रायल के दौरान इस तकनीक ने 97 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ असली और नकली जैसे दिखने वाले लेबल में अंतर पहचान लिया।
इससे कंपनियों की लागत घटेगी और ग्राहक भी बिना किसी अतिरिक्त डिवाइस के घर बैठे यह जांच सकेंगे कि उन्होंने जो सामान खरीदा है, वह असली है या नकली। रिसर्चर्स का कहना है कि यह तकनीक अब वास्तविक इस्तेमाल के लिए तैयार है और इसे विभिन्न पैकेजिंग इंडस्ट्री की प्रोडक्शन लाइन में शामिल किया जा सकता है।
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इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए रिसर्चर्स ने एक नई एंटी-काउंटरफिट (Anti-Counterfeit) तकनीक विकसित की है। उनका दावा है कि भविष्य में केवल स्मार्टफोन की मदद से किसी भी प्रोडक्ट की असलियत जांची जा सकेगी और इसके लिए किसी महंगे स्कैनर या विशेष हार्डवेयर की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
रिसर्चर्स ने एक खास रिस्पॉन्सिव प्रिंटिंग सिस्टम तैयार किया है, जो विशेष सुरक्षा लेबल प्रिंट करेगा। ये लेबल मजबूत होने के साथ बड़े पैमाने पर आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि इन्हें स्मार्टफोन से स्कैन करके उनकी सत्यता की जांच की जा सकेगी।
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इस तकनीक का मकसद महंगे ऑथेंटिकेशन सिस्टम की जगह एक ऐसा समाधान देना है, जिसे कंपनियां, रिटेलर्स और आम ग्राहक आसानी से इस्तेमाल कर सकें।
एक लेबल में तीन एडवांस टेक्नोलॉजी
यह कोई साधारण लेबल नहीं होगा। इसमें तीन अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। पहली तकनीक टेंपरेचर और लाइट-रिस्पॉन्सिव माइक्रोकैप्सूल पर आधारित है। इन माइक्रोकैप्सूल्स को UV इंक के साथ तैयार किया गया है। जैसे ही इन पर रोशनी या तापमान का असर पड़ता है, यह एक अलग तरह का ऑप्टिकल सिग्नेचर बनाते हैं, जिसे सामान्य प्रिंटिंग तकनीकों से कॉपी करना लगभग असंभव है।दूसरी तकनीक इसकी मजबूती से जुड़ी है। इसमें नैनोटेक्नोलॉजी आधारित लिंकर पॉलीमर का इस्तेमाल किया गया है, जिससे लेबल गर्मी और नमी जैसी परिस्थितियों में भी सुरक्षित रहता है। टेस्टिंग के दौरान इसका रंग भी फीका नहीं पड़ा, जिससे यह सप्लाई चेन में लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए उपयुक्त साबित हुआ।
97% से ज्यादा सटीकता से होगी पहचान
इस सिस्टम की तीसरी और सबसे अहम तकनीक वेरिफिकेशन से जुड़ी है। स्मार्टफोन आधारित पोर्टेबल डिटेक्टर यह जांचता है कि लेबल रोशनी के साथ किस तरह प्रतिक्रिया करता है। इसके बाद मशीन लर्निंग मॉडल उस डेटा का विश्लेषण करके बताता है कि प्रोडक्ट असली है या नकली।रिसर्चर्स के अनुसार, ट्रायल के दौरान इस तकनीक ने 97 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ असली और नकली जैसे दिखने वाले लेबल में अंतर पहचान लिया।
ग्राहकों और कंपनियों दोनों को होगा फायदा
फिलहाल कंपनियां अपने उत्पादों की सुरक्षा के लिए होलोग्राम, QR कोड और RFID जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं, जिनके लिए कई बार महंगे वेरिफिकेशन उपकरणों की जरूरत पड़ती है। नई तकनीक इन सबकी जगह सिर्फ स्मार्टफोन के जरिए पहचान संभव बना सकती है।इससे कंपनियों की लागत घटेगी और ग्राहक भी बिना किसी अतिरिक्त डिवाइस के घर बैठे यह जांच सकेंगे कि उन्होंने जो सामान खरीदा है, वह असली है या नकली। रिसर्चर्स का कहना है कि यह तकनीक अब वास्तविक इस्तेमाल के लिए तैयार है और इसे विभिन्न पैकेजिंग इंडस्ट्री की प्रोडक्शन लाइन में शामिल किया जा सकता है।