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Iran Attack: बैन के बावजूद अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए इस्तेमाल किया Claude AI, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Sun, 01 Mar 2026 12:30 PM IST
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सार
Claude AI In Iran Attack: ईरान पर हमले में अमेरिका द्वारा एंथ्रोपिक के एआई मॉडल 'क्लाउड' के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एंथ्रोपिक की तकनीक पर पूरी तरह पाबंदी लगाने वाले बयान के कुछ घंटे बाद ही अमेरिकी रक्षा बलों ने उसी कंपनी के क्लाउड एआई मॉडल का उपयोग किया। इससे अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बैन के बावजूद अमेरिका उसी कंपनी के एआई मॉडल का इस्तेमाल कैसे कर रहा है।
एंथ्रोपिक
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले में एआई कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) के क्लाउड एआई (Claude AI) मॉडल के इस्तेमाल होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एंथ्रोपिक की तकनीक का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने वाले बयान के कुछ घंटे बाद ही रक्षा विभाग ने हमले की तैयारी के लिए क्लाउड का इस्तेमाल किया।
ईरान पर हमले के लिए हुआ एआई का इस्तेमाल
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एंथ्रोपिक और पेंटागन के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद, अमेरिकी कमांड फोर्स ने इस एआई तकनीक को अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बनाया। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ईरान पर हमले के दौरान खुफिया जानकारी के आकलन, सटीक ठिकानों की पहचान और युद्ध के संभावित परिदृश्यों को समझने के लिए क्लाउड एआई की मदद ली गई। यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी सेना ने इस तकनीक पर भरोसा जताया है। इससे पहले वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए किए गए ऑपरेशन में भी इसी एआई ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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ईरान पर हमले के लिए हुआ एआई का इस्तेमाल
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एंथ्रोपिक और पेंटागन के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद, अमेरिकी कमांड फोर्स ने इस एआई तकनीक को अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बनाया। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ईरान पर हमले के दौरान खुफिया जानकारी के आकलन, सटीक ठिकानों की पहचान और युद्ध के संभावित परिदृश्यों को समझने के लिए क्लाउड एआई की मदद ली गई। यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी सेना ने इस तकनीक पर भरोसा जताया है। इससे पहले वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए किए गए ऑपरेशन में भी इसी एआई ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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ट्रंप ने एंथ्रोपिक को बताया था राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा
पिछले सप्ताह राष्ट्रपति ट्रंप ने एंथ्रोपिक के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सभी संघीय एजेंसियों को इसकी सेवाओं को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया था। ट्रंप ने कंपनी के रवैये को लेकर तीखी टिप्पणी की और इसे अमेरिकी जान-माल के लिए जोखिम करार दिया। उन्होंने रक्षा विभाग को निर्देश दिया कि एंथ्रोपिक को 'सप्लाई चेन रिस्क' यानी आपूर्ति श्रृंखला के लिए खतरा घोषित किया जाए। यह टैग आमतौर पर अमेरिका अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को रोकने के लिए अपनाता है।
यह भी पढ़ें: ईरान में इंटरनेट ठप: तेहरान समेत पूरे देश का दुनिया से कटा संपर्क, जानें क्या है इस शटडाउन के पीछे की वजह?
अमेरिका ने हुआवै (Huawei) जैसी कई चीनी कंपनियों को 'सप्लाई चेन रिस्क' घोषित कर उनके कारोबार को रोका हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि कंपनी की विचारधारा और सुरक्षा मानक अमेरिकी हितों के साथ मेल नहीं खाते। उन्होंने इन प्रणालियों को पूरी तरह से हटाने के लिए छह महीने का समय दिया है।
एआई का बेरोक-टोक इस्तेमाल करना चाहता था पेंटागन
इस विवाद की जड़ में रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई के बीच की तनातनी है। पेंटागन चाहता था कि कंपनी अपने एआई टूल्स के इस्तेमाल पर लगी सभी नैतिक पाबंदियों को हटा दे ताकि सेना इनका उपयोग किसी भी कानूनी सैन्य उद्देश्य के लिए कर सके। हालांकि, डारियो अमोदेई ने इन मांगों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। कंपनी का कहना है कि वे कुछ नैतिक सीमाओं को कभी पार नहीं करेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें सरकारी अनुबंध ही क्यों न खोने पड़ें। एंथ्रोपिक ने ट्रंप सरकार के इस फैसले को कानूनी रूप से चुनौती देने की योजना बनाई है।
अमेरिकी सरकार के साथ करोड़ों डॉलर का अनुबंध कर चुका है एंथ्रोपिक
एंथ्रोपिक उन चुनिंदा एआई कंपनियों में शामिल है जिन्हें पेंटागन से बहुवर्षीय अनुबंध मिले हैं। इन कंपनियों में OpenAI, Google और xAI भी शामिल हैं। प्रत्येक कंपनी को उन्नत एआई क्षमताएं उपलब्ध कराने के लिए 200 मिलियन डॉलर तक के अनुबंध दिए गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि एंथ्रोपिक के एआई मॉडल को इतनी जल्दी सेना के तंत्र से बाहर करना आसान नहीं होगा। यही कारण है कि प्रशासन ने इसे हटाने के लिए छह महीने की लंबी अवधि तय की है।
यह भी पढ़ें: चैटजीपीटी का नया रिकॉर्ड: हर हफ्ते 90 करोड़ लोग कर रहे हैं इस्तेमाल, अमेजन और एनवीडिया से मिली अरबों की फंडिंग
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि क्लाउड एआई का हाई-प्रोफाइल सैन्य अभियानों में पहले से इस्तेमाल होना ही वह कारण है, जिसके चलते प्रशासन ने इसे हटाने के लिए छह महीने का समय तय किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य ढांचे में किसी भी तकनीक को अचानक हटाना रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है।
पिछले सप्ताह राष्ट्रपति ट्रंप ने एंथ्रोपिक के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सभी संघीय एजेंसियों को इसकी सेवाओं को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया था। ट्रंप ने कंपनी के रवैये को लेकर तीखी टिप्पणी की और इसे अमेरिकी जान-माल के लिए जोखिम करार दिया। उन्होंने रक्षा विभाग को निर्देश दिया कि एंथ्रोपिक को 'सप्लाई चेन रिस्क' यानी आपूर्ति श्रृंखला के लिए खतरा घोषित किया जाए। यह टैग आमतौर पर अमेरिका अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को रोकने के लिए अपनाता है।
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अमेरिका ने हुआवै (Huawei) जैसी कई चीनी कंपनियों को 'सप्लाई चेन रिस्क' घोषित कर उनके कारोबार को रोका हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि कंपनी की विचारधारा और सुरक्षा मानक अमेरिकी हितों के साथ मेल नहीं खाते। उन्होंने इन प्रणालियों को पूरी तरह से हटाने के लिए छह महीने का समय दिया है।
एआई का बेरोक-टोक इस्तेमाल करना चाहता था पेंटागन
इस विवाद की जड़ में रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई के बीच की तनातनी है। पेंटागन चाहता था कि कंपनी अपने एआई टूल्स के इस्तेमाल पर लगी सभी नैतिक पाबंदियों को हटा दे ताकि सेना इनका उपयोग किसी भी कानूनी सैन्य उद्देश्य के लिए कर सके। हालांकि, डारियो अमोदेई ने इन मांगों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। कंपनी का कहना है कि वे कुछ नैतिक सीमाओं को कभी पार नहीं करेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें सरकारी अनुबंध ही क्यों न खोने पड़ें। एंथ्रोपिक ने ट्रंप सरकार के इस फैसले को कानूनी रूप से चुनौती देने की योजना बनाई है।
अमेरिकी सरकार के साथ करोड़ों डॉलर का अनुबंध कर चुका है एंथ्रोपिक
एंथ्रोपिक उन चुनिंदा एआई कंपनियों में शामिल है जिन्हें पेंटागन से बहुवर्षीय अनुबंध मिले हैं। इन कंपनियों में OpenAI, Google और xAI भी शामिल हैं। प्रत्येक कंपनी को उन्नत एआई क्षमताएं उपलब्ध कराने के लिए 200 मिलियन डॉलर तक के अनुबंध दिए गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि एंथ्रोपिक के एआई मॉडल को इतनी जल्दी सेना के तंत्र से बाहर करना आसान नहीं होगा। यही कारण है कि प्रशासन ने इसे हटाने के लिए छह महीने की लंबी अवधि तय की है।
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रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि क्लाउड एआई का हाई-प्रोफाइल सैन्य अभियानों में पहले से इस्तेमाल होना ही वह कारण है, जिसके चलते प्रशासन ने इसे हटाने के लिए छह महीने का समय तय किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य ढांचे में किसी भी तकनीक को अचानक हटाना रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है।