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Silent Authentication: सिम बदलते ही बैंक अकाउंट होगा ब्लॉक, जानिए कैसे काम करेगा ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ सिस्टम
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Fri, 03 Apr 2026 06:31 PM IST
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सार
Silent Authentication: डिजिटल बैंकिंग में बढ़ते साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए नया सिस्टम आने वाला है। अब OTP की जरूरत खत्म हो सकती है। आरबीआई डिजिटल बैंकिंग सिस्टम में एक ऐसी तकनीक को लाने पर काम कर रहा है जिसमें सिम बदलते ही बैंक अकाउंट अस्थायी रूप से ब्लॉक हो जाएगा और ट्रांजैक्शन सुरक्षित हो जाएंगे।
साइलेंट ऑथेंटिकेशन से खत्म होगी OTP की जरूरत
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर फ्रॉड और सिम क्लोनिंग के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। कई बार अपराधी यूजर्स के मोबाइल नंबर का क्लोन सिम तैयार कर उसके बैंक खाते तक पहुंच बना लेते हैं। क्लोन सिम पर आने वाले OTP से बैंक खाते से पैसे निकाल कर फ्रॉड को शातिर तरीके से अंजाम दिया जाता है। इसी खतरे को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक एक नई तकनीक पर काम कर रहा है, जिसे ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ कहा जा रहा है।
क्या है साइलेंट ऑथेंटिकेशन?
मौजूदा समय में ट्रांजेक्शन कंप्लीट करने के लिए OTP डालने की जरूरत पड़ती है। लेकिन ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ एक ऐसी तकनीक है, जिसमें ट्रांजैक्शन के लिए यूजर को OTP डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस सिस्टम में बैंक का सर्वर आपके टेलिकॉम ऑपरेटर से सीधे संपर्क करता है और बैकग्राउंड में आपकी पहचान की पुष्टि करता है। यह प्रक्रिया इतनी तेजी से होती है कि यूजर को इसका पता भी नहीं चलता। जब भी आप कोई ट्रांजैक्शन करते हैं, सिस्टम यह जांच करता है कि जिस सिम से रिक्वेस्ट आ रही है, वह उसी व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड है या नहीं।
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क्या है साइलेंट ऑथेंटिकेशन?
मौजूदा समय में ट्रांजेक्शन कंप्लीट करने के लिए OTP डालने की जरूरत पड़ती है। लेकिन ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ एक ऐसी तकनीक है, जिसमें ट्रांजैक्शन के लिए यूजर को OTP डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस सिस्टम में बैंक का सर्वर आपके टेलिकॉम ऑपरेटर से सीधे संपर्क करता है और बैकग्राउंड में आपकी पहचान की पुष्टि करता है। यह प्रक्रिया इतनी तेजी से होती है कि यूजर को इसका पता भी नहीं चलता। जब भी आप कोई ट्रांजैक्शन करते हैं, सिस्टम यह जांच करता है कि जिस सिम से रिक्वेस्ट आ रही है, वह उसी व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड है या नहीं।
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सिम बदलते ही क्यों ब्लॉक होगा अकाउंट?
इस तकनीक का सबसे अहम हिस्सा सिम कार्ड की निगरानी है। अगर आप अपना सिम बदलते हैं, यानी पुराने सिम की जगह नया सिम उसी नंबर पर एक्टिव होता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा। चूंकि सिम स्वैप फ्रॉड में इसी तरीके का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए बैंक सुरक्षा के तौर पर अकाउंट को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर सकते हैं या अतिरिक्त वेरिफिकेशन मांग सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई दूसरा व्यक्ति आपके नंबर का गलत इस्तेमाल कर आपके बैंक खाते तक पहुंच न बना सके।
यह भी पढ़ें: क्या आपको भी व्हाट्सएप से रोज सुबह मिलता है ये मैसेज? जानिए आखिर क्या है इसका मतलब
आपको क्या फायदा होगा?
इस नई तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यूजर्स को OTP का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही, फिशिंग के जरिए OTP चोरी होने का खतरा भी खत्म हो जाएगा। कई बार लोग अनजाने में अपना OTP धोखेबाजों को बता देते हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ में मानव हस्तक्षेप लगभग खत्म हो जाता है, जिससे फ्रॉड की संभावना काफी कम हो जाती है। पूरा प्रोसेस ऑटोमैटिक और सुरक्षित होता है।
क्या इसके लिए कुछ अलग करना होगा?
इस सिस्टम के लिए यूजर्स को किसी नए एप को डाउनलोड करने या नया नंबर लेने की जरूरत नहीं होगी। यह तकनीक बैंक और टेलिकॉम कंपनियों के बीच बैकएंड पर काम करेगी। जब यह पूरी तरह लागू होगी, तब बैंक आपसे सिम वेरिफिकेशन की अनुमति मांग सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि आपका मोबाइल नंबर आपके बैंक अकाउंट के साथ अपडेटेड रहे, ताकि वेरिफिकेशन में कोई दिक्कत न आए।
इस तकनीक का सबसे अहम हिस्सा सिम कार्ड की निगरानी है। अगर आप अपना सिम बदलते हैं, यानी पुराने सिम की जगह नया सिम उसी नंबर पर एक्टिव होता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा। चूंकि सिम स्वैप फ्रॉड में इसी तरीके का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए बैंक सुरक्षा के तौर पर अकाउंट को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर सकते हैं या अतिरिक्त वेरिफिकेशन मांग सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई दूसरा व्यक्ति आपके नंबर का गलत इस्तेमाल कर आपके बैंक खाते तक पहुंच न बना सके।
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आपको क्या फायदा होगा?
इस नई तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यूजर्स को OTP का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही, फिशिंग के जरिए OTP चोरी होने का खतरा भी खत्म हो जाएगा। कई बार लोग अनजाने में अपना OTP धोखेबाजों को बता देते हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ में मानव हस्तक्षेप लगभग खत्म हो जाता है, जिससे फ्रॉड की संभावना काफी कम हो जाती है। पूरा प्रोसेस ऑटोमैटिक और सुरक्षित होता है।
क्या इसके लिए कुछ अलग करना होगा?
इस सिस्टम के लिए यूजर्स को किसी नए एप को डाउनलोड करने या नया नंबर लेने की जरूरत नहीं होगी। यह तकनीक बैंक और टेलिकॉम कंपनियों के बीच बैकएंड पर काम करेगी। जब यह पूरी तरह लागू होगी, तब बैंक आपसे सिम वेरिफिकेशन की अनुमति मांग सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि आपका मोबाइल नंबर आपके बैंक अकाउंट के साथ अपडेटेड रहे, ताकि वेरिफिकेशन में कोई दिक्कत न आए।