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Ayodhya News: संघ प्रमुख का दूत बनकर अयोध्या पहुंचे शीर्ष पदाधिकारी
Mon, 03 Aug 2026 11:21 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 03 Aug 2026 11:21 PM IST
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नितिन मिश्र
अयोध्या। राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की ओर से एसआईटी जांच पूरी होने के बाद अपना पक्ष सार्वजनिक करने संबंधी पत्र जारी किए जाने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शीर्ष नेतृत्व ने पूरे घटनाक्रम पर सक्रियता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, पिछले दिनों पत्र सामने आने के बाद संघ और विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष स्तर पर मंथन शुरू हुआ। इसके बाद संघ प्रमुख के निर्देश पर पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक जानकारी जुटाने के लिए शीर्ष पदाधिकारियों को अयोध्या भेजा गया।
सूत्रों के मुताबिक, करीब एक सप्ताह पहले संघ प्रमुख के प्रतिनिधि (दूत) के रूप में सह सरकार्यवाह आलोक कुमार और डॉ. कृष्ण गोपाल अयोध्या पहुंचे। दोनों नेताओं ने चंपत राय से तीर्थ क्षेत्र भवन में बंद कमरे में करीब दो घंटे तक विस्तार से बातचीत की। इस दौरान चंपत राय ने अपने पक्ष से जुड़े दस्तावेज, अभिलेख और अन्य तथ्यों को उनके समक्ष रखा। बैठक समाप्त होने के बाद दोनों पदाधिकारी एक दस्तावेजी फाइल अपने साथ लेकर नागपुर लौटे और संघ प्रमुख को पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट उपलब्ध कराई। सूत्रों का दावा है कि चंपत राय के पत्र के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्वयं उनसे दूरभाष पर संपर्क किया था और उन्हें नागपुर आने का आग्रह किया था।
हालांकि, चंपत राय ने कथित तौर पर यह कहते हुए अयोध्या छोड़ने से इनकार कर दिया कि एसआईटी की जांच पूरी होने तक वह अयोध्या में ही रहेंगे। इसके बाद संघ नेतृत्व ने अपने दो वरिष्ठ पदाधिकारियों को अयोध्या भेजकर पूरे मामले की प्रत्यक्ष जानकारी हासिल की। बताया जाता है कि पहली बैठक के बाद भी संवाद का क्रम जारी रहा। सूत्रों के अनुसार, तीन दिन पहले आलोक कुमार दोबारा अयोध्या पहुंचे और उन्होंने चंपत राय से मुलाकात कर संघ प्रमुख का संदेश भी उन्हें दिया। हालांकि, इस मुलाकात और बातचीत के संबंध में संघ या चंपत राय की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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इनसेट
भैयाजी जोशी को हटाए जाने पर चर्चा तेज
इसी घटनाक्रम के बीच संघ के पूर्व सह सरकार्यवाह एवं अखिल भारतीय पदाधिकारी भैयाजी जोशी को राम मंदिर के पालक पद सहित उनके दायित्वों से मुक्त किए जाने पर चर्चा तेज हो गई है। भैया जी जोशी राम मंदिर ट्रस्ट की बैठकों में आमंत्रित सदस्य के रूप में भी शामिल होते रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि यह घटनाक्रम चंपत राय की ओर से संघ नेतृत्व को उपलब्ध कराई गई जानकारी और दस्तावेजी रिपोर्ट के बाद सामने आया है। हालांकि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भैयाजी जोशी के दायित्वों में बदलाव अथवा इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
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अयोध्या। राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की ओर से एसआईटी जांच पूरी होने के बाद अपना पक्ष सार्वजनिक करने संबंधी पत्र जारी किए जाने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शीर्ष नेतृत्व ने पूरे घटनाक्रम पर सक्रियता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, पिछले दिनों पत्र सामने आने के बाद संघ और विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष स्तर पर मंथन शुरू हुआ। इसके बाद संघ प्रमुख के निर्देश पर पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक जानकारी जुटाने के लिए शीर्ष पदाधिकारियों को अयोध्या भेजा गया।
सूत्रों के मुताबिक, करीब एक सप्ताह पहले संघ प्रमुख के प्रतिनिधि (दूत) के रूप में सह सरकार्यवाह आलोक कुमार और डॉ. कृष्ण गोपाल अयोध्या पहुंचे। दोनों नेताओं ने चंपत राय से तीर्थ क्षेत्र भवन में बंद कमरे में करीब दो घंटे तक विस्तार से बातचीत की। इस दौरान चंपत राय ने अपने पक्ष से जुड़े दस्तावेज, अभिलेख और अन्य तथ्यों को उनके समक्ष रखा। बैठक समाप्त होने के बाद दोनों पदाधिकारी एक दस्तावेजी फाइल अपने साथ लेकर नागपुर लौटे और संघ प्रमुख को पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट उपलब्ध कराई। सूत्रों का दावा है कि चंपत राय के पत्र के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्वयं उनसे दूरभाष पर संपर्क किया था और उन्हें नागपुर आने का आग्रह किया था।
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हालांकि, चंपत राय ने कथित तौर पर यह कहते हुए अयोध्या छोड़ने से इनकार कर दिया कि एसआईटी की जांच पूरी होने तक वह अयोध्या में ही रहेंगे। इसके बाद संघ नेतृत्व ने अपने दो वरिष्ठ पदाधिकारियों को अयोध्या भेजकर पूरे मामले की प्रत्यक्ष जानकारी हासिल की। बताया जाता है कि पहली बैठक के बाद भी संवाद का क्रम जारी रहा। सूत्रों के अनुसार, तीन दिन पहले आलोक कुमार दोबारा अयोध्या पहुंचे और उन्होंने चंपत राय से मुलाकात कर संघ प्रमुख का संदेश भी उन्हें दिया। हालांकि, इस मुलाकात और बातचीत के संबंध में संघ या चंपत राय की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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भैयाजी जोशी को हटाए जाने पर चर्चा तेज
इसी घटनाक्रम के बीच संघ के पूर्व सह सरकार्यवाह एवं अखिल भारतीय पदाधिकारी भैयाजी जोशी को राम मंदिर के पालक पद सहित उनके दायित्वों से मुक्त किए जाने पर चर्चा तेज हो गई है। भैया जी जोशी राम मंदिर ट्रस्ट की बैठकों में आमंत्रित सदस्य के रूप में भी शामिल होते रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि यह घटनाक्रम चंपत राय की ओर से संघ नेतृत्व को उपलब्ध कराई गई जानकारी और दस्तावेजी रिपोर्ट के बाद सामने आया है। हालांकि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भैयाजी जोशी के दायित्वों में बदलाव अथवा इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।