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Ayodhya News: कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित की धान की 25 नई किस्में
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 23 Apr 2026 06:34 PM IST
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कुमारगंज। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज के बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने तराई और जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए धान की 25 नई प्रजातियां विकसित की हैं। ये किस्में जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती बाढ़ की समस्या से निपटने में किसानों के लिए फायदेमंद साबित होंगी।
वैज्ञानिकों की टीम ने जैव रासायनिक लक्षणों और माइक्रोसेटेलाइट (एसएसआर) मार्कर विश्लेषण के माध्यम से जलमग्नता सहनशील किस्मों की पहचान की। इस शोध में आलोक सिंह, देवेंद्र द्विवेदी, डॉ.नवाज अहमद खान और रंजीत कुमार सहित 12 वैज्ञानिकों ने 116 धान किस्मों का अध्ययन किया। इसमें सहनशील किस्म एफआर13ए और संवेदनशील चेक डीआरआर44 को शामिल कर जलमग्न परिस्थितियों में परीक्षण किया गया। अध्ययन में 25 किस्मों ने बाढ़ के प्रति बेहतर सहनशीलता दिखाई। जैव रासायनिक विश्लेषण में पाया गया कि जलभराव से अधिकतर किस्मों में क्लोरोफिल, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का स्तर घटा, लेकिन कुछ किस्मों में यह गिरावट कम रही। वहीं, तनाव सहनशीलता बढ़ाने वाला सुपरऑक्साइड डिसम्यूटेज एंजाइम 54 से 67 फीसदी तक बढ़ गया। आणविक विश्लेषण में आठ एसयूबी1 जीन-विशिष्ट एसएसआर मार्करों का उपयोग किया गया। आरएम316 और आरएम8300 मार्कर सहनशील और संवेदनशील किस्मों में अंतर करने में सबसे प्रभावी पाए गए।
प्रोफेसर डॉ. नवाज अहमद खान ने बताया कि यह शोध बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को राहत देगा और बदलती जलवायु में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा। बताया कि किसानों को इन किस्मों के बीज मिलने में लगभग दो वर्ष लगेंगे। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन किस्मों से भविष्य में बाढ़-प्रतिरोधी और अधिक उपज देने वाली नई प्रजातियां विकसित की जा सकेंगी।
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प्रोफेसर डॉ. नवाज अहमद खान ने बताया कि यह शोध बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को राहत देगा और बदलती जलवायु में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा। बताया कि किसानों को इन किस्मों के बीज मिलने में लगभग दो वर्ष लगेंगे। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन किस्मों से भविष्य में बाढ़-प्रतिरोधी और अधिक उपज देने वाली नई प्रजातियां विकसित की जा सकेंगी।

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