{"_id":"69a5a1c39ca317dfaf05f885","slug":"beware-of-synthetic-colours-they-can-spoil-the-complexion-of-your-face-ayodhya-news-c-97-1-ayo1005-144300-2026-03-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: सिंथेटिक रंगों से सावधान, बिगड़ सकती है चेहरे की रंगत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: सिंथेटिक रंगों से सावधान, बिगड़ सकती है चेहरे की रंगत
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 02 Mar 2026 08:12 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
अयोध्या। होली पर सिंथेटिक (रसायनयुक्त) रंगों के प्रयोग से सावधान रहें। सस्ते और चटख दिखने वाले सिंथेटिक रंग त्वचा, आंखों और बालों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। थोड़ी सी लापरवाही चेहरे की रंगत तक बिगाड़ सकती है। त्वचा रोग विशेषज्ञों ने हर्बल रंगों से होली खेलने की अपील की है।
काफी पहले से ही सिंथेटिक रंगों से बाजार पटा रहता है। इन रंगों की चमक-दमक के पीछे छिपा खतरा सेहत पर भारी पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार सफेद रंग में कई बार लेड ऑक्साइड मिला होता है। वहीं, लाल रंगों में कॉपर सल्फेट, एकदम सफेद रंगों में मर्करी सल्फाइड, अबीर में लेड ऑक्साइड, बैंगनी रंगों में क्रोमियम आयोडाइड, एल्युमिनियम सल्फेट, हरे रंगों में एल्युमिनियम ब्रोमाइड आदि रसायन मिले होते हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आरबी वर्मा ने बताया कि सिंथेटिक रंग गाढ़े होते हैं और कई दिन तक इनका असर रहता है, लेकिन इनका प्रयोग कई तरह से घातक है।
इनसे त्वचा पर एलर्जी, खुजली, लाल चकत्ते, जलन और सूजन आती है। कई मामलों में इन रंगों से कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस और फंगल इन्फेक्शन की शिकायत भी आती है। त्वचा का रंग भी हल्का पड़ जाता है।
आंख में रंग जाने से जलन, पानी आना, आंख लाल होना आदि समस्या शुरू होती है। मुंह में रंग जाने से छाले पड़ जाते हैं, जीभ कट जाती है। इसलिए इन रंगों से होली खेलने के बजाय हर्बल रंगों का उपयोग करें। यह रंग थोड़ा महंगे जरूर होते हैं, लेकिन हमारी त्वचा के लिए लाभदायक हैं।
Trending Videos
काफी पहले से ही सिंथेटिक रंगों से बाजार पटा रहता है। इन रंगों की चमक-दमक के पीछे छिपा खतरा सेहत पर भारी पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार सफेद रंग में कई बार लेड ऑक्साइड मिला होता है। वहीं, लाल रंगों में कॉपर सल्फेट, एकदम सफेद रंगों में मर्करी सल्फाइड, अबीर में लेड ऑक्साइड, बैंगनी रंगों में क्रोमियम आयोडाइड, एल्युमिनियम सल्फेट, हरे रंगों में एल्युमिनियम ब्रोमाइड आदि रसायन मिले होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. आरबी वर्मा ने बताया कि सिंथेटिक रंग गाढ़े होते हैं और कई दिन तक इनका असर रहता है, लेकिन इनका प्रयोग कई तरह से घातक है।
इनसे त्वचा पर एलर्जी, खुजली, लाल चकत्ते, जलन और सूजन आती है। कई मामलों में इन रंगों से कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस और फंगल इन्फेक्शन की शिकायत भी आती है। त्वचा का रंग भी हल्का पड़ जाता है।
आंख में रंग जाने से जलन, पानी आना, आंख लाल होना आदि समस्या शुरू होती है। मुंह में रंग जाने से छाले पड़ जाते हैं, जीभ कट जाती है। इसलिए इन रंगों से होली खेलने के बजाय हर्बल रंगों का उपयोग करें। यह रंग थोड़ा महंगे जरूर होते हैं, लेकिन हमारी त्वचा के लिए लाभदायक हैं।
