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Ayodhya News: राम मंदिर में सोना-चांदी दान करने से बच रहे श्रद्धालु

Wed, 15 Jul 2026 11:40 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jul 2026 11:40 PM IST
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Devotees are refraining from donating gold and silver at the Ram Mandir.
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन उनके दान देने के तरीके में बड़ा बदलाव जरूर दिखाई देने लगा है। पड़ताल में सामने आया कि अब दानपात्र में पहले की तरह सोने-चांदी के आभूषण और बेशकीमती सिक्के लगभग दिखाई नहीं देते। मंदिर के भीतर चढ़ावा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों से बातचीत और मौके पर मिली जानकारी इस बदलाव की पुष्टि करती है।
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कुछ महीने पहले तक मंदिर में ऐसा दृश्य आम था कि श्रद्धालु दर्शन के दौरान भावुक होकर अपनी अंगूठी, चेन, झुमके, बाली, लॉकेट, कंगन, ब्रेसलेट या सोने-चांदी के सिक्के तक दानपात्र में अर्पित कर देते थे। चढ़ावा गणना के दौरान नोटों की छंटाई में अक्सर ये आभूषण निकलते थे, जिन्हें अलग सुरक्षित रखा जाता था। अब कर्मचारियों का कहना है कि ऐसे चढ़ावे बेहद कम हो गए हैं। मंदिर परिसर में तैनात एक कर्मचारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि चोरी की घटना उजागर होने के बाद श्रद्धालु पहले की तरह दान तो कर रहे हैं, लेकिन अब अधिक सतर्क हैं। बड़े नोटों की तुलना में छोटे नोट ज्यादा मिल रहे हैं और कीमती आभूषणों का दान लगभग न के बराबर रह गया है। उनके मुताबिक श्रद्धालु अब भावनाओं के साथ-साथ सावधानी को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं कीमती आभूषण दान करने वालों का नाम, पता, आभूषण का आकार-प्रकार दर्ज करने की नई व्यवस्था बना दी गई। एक कर्मी तत्काल यह प्रक्रिया पूरी करेगा, पहले यह व्यवस्था नहीं थी। (संवाद)
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इनसेट
पिछले 10 दिन में नहीं मिला आभूषण का चढ़ावा
चढ़ावा गणना से जुड़े एक अन्य कर्मी ने बताया कि पहले जब दानपात्र खोले जाते थे तो नोटों के बीच से सोने-चांदी के सिक्के और आभूषण मिलना सामान्य बात थी। अब कई-कई दिनों तक ऐसा कोई चढ़ावा नहीं मिलता। उनका कहना है कि यह बदलाव चोरी की घटना के बाद स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। पिछले 10 दिनों में दान पात्र में कोई भी बहुमूल्य आभूषण नहीं मिले हैं। चढ़ावा चोरी की घटना ने श्रद्धालुओं को यह सोचने पर मजबूर किया है कि भगवान को अर्पित किया जाने वाला उनका चढ़ावा पूरी तरह सुरक्षित हाथों तक पहुंचे। यही कारण है कि दानपात्र में सोना-चांदी के चढ़ावे अब पहले की तुलना में बहुत कम दिखाई दे रहे हैं।
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