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Ayodhya News: सिद्ध योग में गणेश मंदिर के शिखर पर फहराया ध्वज
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sat, 11 Apr 2026 09:07 PM IST
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गणेश मंदिर के शिखर पर फहराता ध्वज।
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में शनिवार को सिद्ध योग के शुभ संयोग में परकोटा स्थित गणेश मंदिर के शिखर पर विधि-विधान के साथ भगवा ध्वज फहराया गया। वैशाख कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को वैदिक मंत्रोच्चार और पूजन-अर्चन के बीच शाम 5:30 बजे ध्वजारोहण संपन्न हुआ। परकोटा के मंदिरों में ध्वजारोहण शृंखला के क्रम में गणेश मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज लहराया गया। अब परकोटा के दो अन्य मंदिरों व शेषावतार मंदिर के शिखर पर भी शीघ्र ही ध्वज आरोहित किए जाएंगे।
गणेश मंदिर के शिखर पर स्थापित 19 फीट सात इंच ऊंचे दंड पर ध्वज चढ़ाया गया। ध्वज की लंबाई (लहर) 9.3 फीट और चौड़ाई (लपेट) 4.7 फीट है। विशेष बात यह रही कि ध्वजारोहण की प्रक्रिया पूरी तरह पारंपरिक और मैनुअल तरीके से संपन्न कराई गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार सिद्ध योग में किए गए शुभ कार्य अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। इसी कारण इस पावन मुहूर्त में ध्वजारोहण का आयोजन किया गया। पूरे परिसर में भक्ति और उत्साह का वातावरण रहा। राम मंदिर के ट्रस्टी डॉ़ अनिल मिश्र ने बताया कि जल्द ही परकोटा के शिव मंदिर, माता भगवती मंदिर समेत शेषावतार मंदिर पर ध्वजारोहण किया जाएगा। इसी माह के अंत तक सभी मंदिरों में ध्वजारोहण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
इस अवसर पर मंदिर निर्माण से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं एवं विभिन्न एजेंसियों के अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, गोपाल राव, सीआरपीएफ कमांडेंट सतीश चंद्र दुबे, एसपी सुरक्षा बलरामाचारी दुबे, डॉ़ चंद्रगोपाल पांडेय, एलएंडटी के एसएस साहा,एन बूथालिंगम, प्रोजेक्टर मैनेजर सूर्य श्रीनिवास, राजू सिंह, सीनियर कंस्ट्रक्शन मैनेजर, प्रोजेक्ट निदेशक विनोद मेहता, टाटा के प्रोजेक्ट निदेशक विनोद शुक्ल, प्रोजेक्टर मैनेजर राजीव दुबेख् सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
इनसेट
अस्थायी स्मारक में प्रज्ज्वलित की गई अखंड ज्योति
अयोध्या। राम मंदिर परिसर में निर्माणाधीन अस्थायी स्मारक में शनिवार से अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर दी गई है। राम मंदिर के ट्रस्टी डॉ़ अनिल मिश्र ने पूजा-अर्चना कर अखंड ज्योति का शुभारंभ किया। यह ज्योति बिजली के माध्यम से निरंतर जलती रहेगी। यहां भी अन्य मंदिरों की तरह नित्य पूजा-अर्चना की जाएगी। अस्थायी स्मारक का निर्माण राम मंदिर की तर्ज पर ही वंशी पहाड़पुर के लाल पत्थरों से किया गया है। निर्माण कार्य 90 फीसदी पूरा हो चुका है। यहां अस्थायी मंदिर की आकृति को भी स्थापित किया गया है। इसी अस्थायी मंदिर में रामलला टेंट से निकलकर करीब चार सालों तक विराजमान रहे, इसे स्मारक के रूप में सहेजा गया है।
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गणेश मंदिर के शिखर पर स्थापित 19 फीट सात इंच ऊंचे दंड पर ध्वज चढ़ाया गया। ध्वज की लंबाई (लहर) 9.3 फीट और चौड़ाई (लपेट) 4.7 फीट है। विशेष बात यह रही कि ध्वजारोहण की प्रक्रिया पूरी तरह पारंपरिक और मैनुअल तरीके से संपन्न कराई गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार सिद्ध योग में किए गए शुभ कार्य अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। इसी कारण इस पावन मुहूर्त में ध्वजारोहण का आयोजन किया गया। पूरे परिसर में भक्ति और उत्साह का वातावरण रहा। राम मंदिर के ट्रस्टी डॉ़ अनिल मिश्र ने बताया कि जल्द ही परकोटा के शिव मंदिर, माता भगवती मंदिर समेत शेषावतार मंदिर पर ध्वजारोहण किया जाएगा। इसी माह के अंत तक सभी मंदिरों में ध्वजारोहण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
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इस अवसर पर मंदिर निर्माण से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं एवं विभिन्न एजेंसियों के अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, गोपाल राव, सीआरपीएफ कमांडेंट सतीश चंद्र दुबे, एसपी सुरक्षा बलरामाचारी दुबे, डॉ़ चंद्रगोपाल पांडेय, एलएंडटी के एसएस साहा,एन बूथालिंगम, प्रोजेक्टर मैनेजर सूर्य श्रीनिवास, राजू सिंह, सीनियर कंस्ट्रक्शन मैनेजर, प्रोजेक्ट निदेशक विनोद मेहता, टाटा के प्रोजेक्ट निदेशक विनोद शुक्ल, प्रोजेक्टर मैनेजर राजीव दुबेख् सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
इनसेट
अस्थायी स्मारक में प्रज्ज्वलित की गई अखंड ज्योति
अयोध्या। राम मंदिर परिसर में निर्माणाधीन अस्थायी स्मारक में शनिवार से अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर दी गई है। राम मंदिर के ट्रस्टी डॉ़ अनिल मिश्र ने पूजा-अर्चना कर अखंड ज्योति का शुभारंभ किया। यह ज्योति बिजली के माध्यम से निरंतर जलती रहेगी। यहां भी अन्य मंदिरों की तरह नित्य पूजा-अर्चना की जाएगी। अस्थायी स्मारक का निर्माण राम मंदिर की तर्ज पर ही वंशी पहाड़पुर के लाल पत्थरों से किया गया है। निर्माण कार्य 90 फीसदी पूरा हो चुका है। यहां अस्थायी मंदिर की आकृति को भी स्थापित किया गया है। इसी अस्थायी मंदिर में रामलला टेंट से निकलकर करीब चार सालों तक विराजमान रहे, इसे स्मारक के रूप में सहेजा गया है।