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Ayodhya News: जन्मकल्याण पर धर्मनाथ के विग्रह को कराया गया नगर भ्रमण
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 30 Jan 2026 09:07 PM IST
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08- भगवान धर्मनाथ के जन्मकल्याणक पर निकली शोभायात्रा में शामिल जैन श्रद्धालु- संवाद
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अयोध्या। भगवान धर्मनाथ की जन्मभूमि रत्नपुरी (रौनाही) में जन्म कल्याण उत्सव भव्यता का परिचायक रहा। 15 वें तीर्थंकर धर्मनाथ का जन्म रत्नपुरी (रौनाही) नगरी में हुआ जो वर्तमान में रौनाही के नाम से प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष इस स्थल पर वार्षिक उत्सव मनाया जाता है। इसी क्रम में शुक्रवार को भव्य रथयात्रा निकाली गई। इसमें भगवान की प्रतिमा को रथ में विराजमान करके नगर भ्रमण कराया गया।
जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी ज्ञानमती के पावन सानिध्य व जैन मंदिर रायगंज के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी के निर्देशन में बैंड-बाजे, ध्वज, कलश, झांकी के साथ निकली शोभायात्रा आकर्षण का केंद्र रही। इससे पहले मंदिर में विराजमान भगवान धर्मनाथ के विग्रह का विभिन्न प्रकार के द्रव्यों से पंचामृत अभिषेक किया गया। सारे विश्व में अहिंसा की कामना से भगवान की महाशांतिधारा संपन्न की गई। देर शाम भगवान की 108 दीपकों से महाआरती भी उतारी गई।
रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि भगवान धर्मनाथ का जन्म कल्याणक हमें धर्म, संयम और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आज आवश्यकता है कि हम तीर्थंकरों के आदर्शों को अपने आचरण में उतारें। शोभायात्रा में आर्यिका चंदनामती, पंडित विजय जैन, पंकज जैन, मनोज जैन, सुरेंद्र जैन, ऋषभ जैन, रितेश जैन, आदेश जैन, अमरचंद जैन समेत विभिन्न जिलों से आए जैन श्रद्धालु शामिल रहे।
सुख-समृद्धि के लिए करना चाहिए अभिषेक
इस अवसर पर गणिनी प्रमुख ज्ञानमती ने कहा कि गृहस्थ जीवन में सुख-समृद्धि के लिए जन्म कल्याणक का अभिषेक करना चाहिए। उन्होंने अभिषेक करने का महत्व बताते हुए कहा कि शास्त्रों के अनुसार किए गए सभी कर्म स्वाधिष्ठान चक्र में संग्रहित होते हैं। ऐसे में जब कोई व्यक्ति भगवान का जल से अभिषेक करता है तो उसके स्वाधिष्ठान चक्र में प्रदूषित हुआ जल तत्व, परमात्मा पर जाप के साथ अभिषेक किए जा रहे जल से एकाकार हो जाता है।
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जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी ज्ञानमती के पावन सानिध्य व जैन मंदिर रायगंज के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी के निर्देशन में बैंड-बाजे, ध्वज, कलश, झांकी के साथ निकली शोभायात्रा आकर्षण का केंद्र रही। इससे पहले मंदिर में विराजमान भगवान धर्मनाथ के विग्रह का विभिन्न प्रकार के द्रव्यों से पंचामृत अभिषेक किया गया। सारे विश्व में अहिंसा की कामना से भगवान की महाशांतिधारा संपन्न की गई। देर शाम भगवान की 108 दीपकों से महाआरती भी उतारी गई।
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रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि भगवान धर्मनाथ का जन्म कल्याणक हमें धर्म, संयम और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आज आवश्यकता है कि हम तीर्थंकरों के आदर्शों को अपने आचरण में उतारें। शोभायात्रा में आर्यिका चंदनामती, पंडित विजय जैन, पंकज जैन, मनोज जैन, सुरेंद्र जैन, ऋषभ जैन, रितेश जैन, आदेश जैन, अमरचंद जैन समेत विभिन्न जिलों से आए जैन श्रद्धालु शामिल रहे।
सुख-समृद्धि के लिए करना चाहिए अभिषेक
इस अवसर पर गणिनी प्रमुख ज्ञानमती ने कहा कि गृहस्थ जीवन में सुख-समृद्धि के लिए जन्म कल्याणक का अभिषेक करना चाहिए। उन्होंने अभिषेक करने का महत्व बताते हुए कहा कि शास्त्रों के अनुसार किए गए सभी कर्म स्वाधिष्ठान चक्र में संग्रहित होते हैं। ऐसे में जब कोई व्यक्ति भगवान का जल से अभिषेक करता है तो उसके स्वाधिष्ठान चक्र में प्रदूषित हुआ जल तत्व, परमात्मा पर जाप के साथ अभिषेक किए जा रहे जल से एकाकार हो जाता है।
