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Ram Mandir: महाकुंभ बना था चंदा चोरों के लिए सुनहरा मौका, रोज पार किए 10-15 लाख, आज तफ्तीश करने जाएगी एसआईटी
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 15 Jun 2026 03:32 AM IST
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सार
गिनती करने वालों को यह बखूबी पता था, इसलिए उन्होंने इसका खूब फायदा उठाया। एक-एक दिन में 10 से 15 लाख रुपये तक चंदे की राशि से पार किए गए।
कुंभ के दौरान अयोध्या शहर भी श्रद्धालुओं से भरा था।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महाकुंभ के दौरान राम मंदिर में चंदे की राशि में बड़ा इजाफा हुआ था। गिनती करने वालों को यह बखूबी पता था, इसलिए उन्होंने इसका खूब फायदा उठाया। एक-एक दिन में 10 से 15 लाख रुपये तक चंदे की राशि से पार किए गए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया और कुल गबन की राशि कितनी बड़ी हो सकती है।
दरअसल, महाकुंभ में देश भर से करोड़ों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे थे। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं ने इस दौरान काशी और अयोध्या में भी दर्शन किए थे। कुंभ के दौरान अयोध्या शहर भी श्रद्धालुओं से भरा था। लाजिमी है कि चंदे की राशि भी आम दिनों की अपेक्षा उस दौरान कई गुना बढ़ी। एक-एक दिन में करोड़ों रुपये की राशि दान में मिली। सूत्रों के मुताबिक, चंदे की राशि पार करने वालों के लिए वह दौर स्वर्णिम हो गया। जितनी चाही, उतनी रकम पार की। विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि कुंभ के दौरान हर दिन 10 से 15 लाख रुपये पार किए गए। तब गिनती भी लंबी चलती थी। आसानी से रकम पार कर ली जाती थी।
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जेवरात भी किए पार, नकली सोना रखा गया
चढ़ावे में जेवरात भी चढ़ाए जाते हैं। बड़े पैमाने पर जेवरात दान में दिए जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक, नकदी के साथ-साथ जेवरात भी पार किए गए। यही नहीं, असली सोना पार कर नकली भी रखा गया। हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं है। इसको लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। हकीकत और तथ्य तभी सामने आएंगे, जब निष्पक्षता से मामले की तह तक तफ्तीश की जाएगी। वरना यह मामला दबकर खत्म हो जाएगा।
मामले में सवाल ही सवाल
राम मंदिर के प्रमुख व संवेदनशील कार्यों में से एक कार्य चंदे की राशि की गिनती होता है, जिसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। वहां से चंदे की राशि पार कर ले जाना, वह भी इतनी अधिक, संभव नहीं लगता। यह तभी संभव लगता है, जब वहां हर स्तर पर लोगों की मिलीभगत रही हो, खासकर उन लोगों की जो गिनती के कार्य में लगे हों और मंदिर परिसर से बाहर निकलने की प्रक्रिया से जुड़े हों। क्योंकि सवाल उठता है कि सीसीटीवी निगरानी का क्या हुआ? ट्रस्ट व बैंक के जिम्मेदार क्या करते रहे? गिनती करने वालों की तलाशी क्यों नहीं होती थी? ऐसे तमाम सवाल हैं, जिनके जवाब ट्रस्ट के पास नहीं हैं। इसलिए वह चुप्पी साधे हुए है।