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Ayodhya News: भविष्य और सामाजिक प्रतिष्ठा पर आंच आने के डर से चुप रहीं छात्राएं
Wed, 14 Oct 2026 11:33 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 14 Oct 2026 11:33 PM IST
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अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग से जुड़े विवादों ने एक बार फिर परिसर में उठने वाली शिकायतों और उनके समाधान की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्राओं के आरोपों और पूर्व छात्राओं के अनुभवों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आती है, जिसमें शिकायत करने की हिम्मत जुटाना जितना मुश्किल रहा, उससे कम मुश्किल नहीं था उसके बाद अपने भविष्य को लेकर आशंकाओं के बीच पढ़ाई जारी रखना।
नाम न छापने की शर्त पर पूर्व छात्राओं ने बताया कि विभाग में पढ़ाई के दौरान अनुचित व्यवहार या विवादों को लेकर शिकायत करने से कई छात्राएं इसलिए बचती रहीं, क्योंकि उन्हें अपना कॅरिअर प्रभावित होने का डर था। आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं के लिए यह आशंका और गंभीर थी। उन्हें चिंता रहती थी कि शिकायत के बाद पढ़ाई, मूल्यांकन या भविष्य के अवसरों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
कुछ छात्राओं ने शिकायत करने का साहस भी जुटाया, लेकिन उन्हें समाधान के नाम पर आश्वासन मिलने से आगे की कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता बनी रही।
पूर्व छात्राओं के अनुसार, पढ़ाई पूरी होने और शादी के बाद पुराने अनुभवों को सार्वजनिक करना आसान नहीं होता। सामाजिक दबाव, परिवार की चिंता और भविष्य की प्रतिष्ठा को लेकर आशंकाएं उन्हें चुप रहने पर मजबूर होना पड़ा। ऐसे में सवाल सिर्फ शिकायतों का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का भी है जिसमें पीड़ित छात्राएं अपनी बात रखने के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल की अपेक्षा करती हैं।
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14 सितंबर को सभागार में हुआ था विवाद
सूत्रों के अनुसार, 14 सितंबर को संत कबीर सभागार में विद्यार्थियों को कक्षा में जाने के लिए कहने के दौरान कहासुनी हुई थी। इसी दिन कुलसचिव की नियमित बैठक में नियुक्ति से संबंधित मुद्दा उठने पर एक प्रोफेसर और कुलसचिव के बीच बहस होने की जानकारी भी सामने आई। 15 सितंबर को संबंधित प्रोफेसर ने फोन पर धमकी मिलने की शिकायत कुलसचिव और संबंधित पुलिस चौकी में की थी।
जांच रिपोर्ट पर टिकी कार्रवाई :विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनय कुमार सिंह के अनुसार, मामले की जांच चल रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल यह है कि जांच में केवल हालिया विवादों की पड़ताल होगी या पुराने मामलों में सामने आई शिकायतों और छात्राओं की चिंताओं को भी गंभीरता से परखा जाएगा।
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नाम न छापने की शर्त पर पूर्व छात्राओं ने बताया कि विभाग में पढ़ाई के दौरान अनुचित व्यवहार या विवादों को लेकर शिकायत करने से कई छात्राएं इसलिए बचती रहीं, क्योंकि उन्हें अपना कॅरिअर प्रभावित होने का डर था। आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं के लिए यह आशंका और गंभीर थी। उन्हें चिंता रहती थी कि शिकायत के बाद पढ़ाई, मूल्यांकन या भविष्य के अवसरों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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कुछ छात्राओं ने शिकायत करने का साहस भी जुटाया, लेकिन उन्हें समाधान के नाम पर आश्वासन मिलने से आगे की कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता बनी रही।
पूर्व छात्राओं के अनुसार, पढ़ाई पूरी होने और शादी के बाद पुराने अनुभवों को सार्वजनिक करना आसान नहीं होता। सामाजिक दबाव, परिवार की चिंता और भविष्य की प्रतिष्ठा को लेकर आशंकाएं उन्हें चुप रहने पर मजबूर होना पड़ा। ऐसे में सवाल सिर्फ शिकायतों का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का भी है जिसमें पीड़ित छात्राएं अपनी बात रखने के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल की अपेक्षा करती हैं।
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14 सितंबर को सभागार में हुआ था विवाद
सूत्रों के अनुसार, 14 सितंबर को संत कबीर सभागार में विद्यार्थियों को कक्षा में जाने के लिए कहने के दौरान कहासुनी हुई थी। इसी दिन कुलसचिव की नियमित बैठक में नियुक्ति से संबंधित मुद्दा उठने पर एक प्रोफेसर और कुलसचिव के बीच बहस होने की जानकारी भी सामने आई। 15 सितंबर को संबंधित प्रोफेसर ने फोन पर धमकी मिलने की शिकायत कुलसचिव और संबंधित पुलिस चौकी में की थी।
जांच रिपोर्ट पर टिकी कार्रवाई :विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनय कुमार सिंह के अनुसार, मामले की जांच चल रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल यह है कि जांच में केवल हालिया विवादों की पड़ताल होगी या पुराने मामलों में सामने आई शिकायतों और छात्राओं की चिंताओं को भी गंभीरता से परखा जाएगा।