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Ayodhya News: पद्मश्री डॉ. अश्विनी भिड़े के ख्याल से सजी रामनगरी की सुबह
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 03 Feb 2026 09:44 PM IST
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प्रस्तुति देतीं पद्मश्री डॉ. अश्विनी भिड़े।
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अयोध्या। अभिजात म्यूजिक फोरम की ओर से आयोजित आवासीय शास्त्रीय संगीत सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत सुरों की साधना और भावपूर्ण गायन के साथ हुई। सुबह 6:30 बजे भारत की सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका पद्मश्री डॉ. अश्विनी भिड़े के गायन से संगीत प्रेमियों को एक अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त हुआ।
डॉ. अश्विनी भिड़े ने अपने सत्र की शुरुआत राग रामकली में बड़े खयाल से की, जिसके बाद एक सशक्त और सजीव द्रुत बंदिश प्रस्तुत की। उनकी स्वर-योजना और राग की गहराई ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके उपरांत उन्होंने राग पंचम में साढ़े पंद्रह मात्रा के योग ताल में खयाल प्रस्तुत किया, जो ताल-अंग की दृष्टि से एक अत्यंत विलक्षण और दुर्लभ प्रस्तुति रही। इसी राग में उन्होंने पद्म विभूषण स्वर्गीय किशोरी आमोणकर की रचित एक बंदिश प्रस्तुत कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. अश्विनी भिड़े की गायकी में परंपरा और नवाचार का अद्भुत संतुलन स्पष्ट रूप से झलकता रहा।
उनका निर्धारित सत्र समय पूर्ण हो चुका था, लेकिन श्रोता अपनी सीटों से उठने को तैयार नहीं थे। श्रोताओं की इसी भावनात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए उन्होंने अपनी स्वयं की रचना राग ‘बिभावती’ में साढ़े नौ मात्रा की एक अनूठी बंदिश प्रस्तुत कर कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई प्रदान की। इस उत्कृष्ट गायन में पं. रामदास पलसुले (तबला), अनंत जोशी (हार्मोनियम) और रितुजा लाड (सहगायन) ने अत्यंत संवेदनशील और सशक्त संगत कर प्रस्तुति को यादगार बना दिया।
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डॉ. अश्विनी भिड़े ने अपने सत्र की शुरुआत राग रामकली में बड़े खयाल से की, जिसके बाद एक सशक्त और सजीव द्रुत बंदिश प्रस्तुत की। उनकी स्वर-योजना और राग की गहराई ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके उपरांत उन्होंने राग पंचम में साढ़े पंद्रह मात्रा के योग ताल में खयाल प्रस्तुत किया, जो ताल-अंग की दृष्टि से एक अत्यंत विलक्षण और दुर्लभ प्रस्तुति रही। इसी राग में उन्होंने पद्म विभूषण स्वर्गीय किशोरी आमोणकर की रचित एक बंदिश प्रस्तुत कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. अश्विनी भिड़े की गायकी में परंपरा और नवाचार का अद्भुत संतुलन स्पष्ट रूप से झलकता रहा।
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उनका निर्धारित सत्र समय पूर्ण हो चुका था, लेकिन श्रोता अपनी सीटों से उठने को तैयार नहीं थे। श्रोताओं की इसी भावनात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए उन्होंने अपनी स्वयं की रचना राग ‘बिभावती’ में साढ़े नौ मात्रा की एक अनूठी बंदिश प्रस्तुत कर कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई प्रदान की। इस उत्कृष्ट गायन में पं. रामदास पलसुले (तबला), अनंत जोशी (हार्मोनियम) और रितुजा लाड (सहगायन) ने अत्यंत संवेदनशील और सशक्त संगत कर प्रस्तुति को यादगार बना दिया।
