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Ayodhya News: पहले बताए फिजूल, और अब जरूरी बने वही शैंपू-बॉडीवाॅश
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 16 Apr 2026 10:07 PM IST
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सतीश पाठक
अयोध्या। मेडिकल काॅलेज में जिस शैंपू और बॉडीवाश काे फिजूल बताकर गोदाम में डंप किया गया था, अब एकाएक वे जरूरी बन गए हैं। अस्पताल के कुछ विभागों से इसकी डिमांड भेजी गई है, जिसकी आपूर्ति भी हुई है। वहीं, कॉलेज प्रशासन अब भी जांच का हवाला देकर इसके उपयोग को नकार रहा है।
मेडिकल कॉलेज में लंबे समय तक भर्ती रहने वाले मरीजों को बेड सोर व त्वचा संबंधी अन्य संक्रमण से बचाने के लिए गत वर्ष शैंपू और बॉडीवाश की खरीद हुई थी। इसे उन मरीजों के लिए उपयोगी बताया गया था, जो लंबे समय तक बेड पर पड़े रहते हैं और नहाने-धोने में अक्षम होते हैं। ट्रायल के बाद इस पर शोध करने की योजना भी थी, जिसकी रूपरेखा तय हाे गई थी।
इस बीच आपसी खींचतान और गुटबाजी के कारण तत्कालीन प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा को हटा दिया गया, तभी से इसका उपयोग ठप हो गया। साथ ही शोध कार्य भी आगे नहीं बढ़ सका। कुछ दिन पहले कॉलेज प्रशासन ने इसकी खरीद प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए। ऐसे सामानों की खरीद की आवश्यकता से नकार दिया गया। बाद में खरीद के उद्देश्यों व प्रक्रिया आदि की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई।
अमर उजाला ने आठ अप्रैल को शोध कार्य अधूरा, गोदाम में पड़ा लाखों का शैंपू-बॉडीवाश शीर्षक खबर प्रकाशित की तो कॉलेज प्रशासन कटघरे में खड़ा हुआ। सूत्रों के अनुसार इसके बाद से ही मेडिसिन आईसीयू, एनआईसीयू, लेबर रूम आदि से उन्हीं शैंपू-बॉडीवाश के इंडेंट आने लगे, जिन्हें फिजूल व अनावश्यक बताया गया था। वार्डों की मांग के अनुरूप उनकी आपूर्ति करने के संकेत भी मिले हैं। इससे जुड़े साक्ष्य भी अमर उजाला के हाथ लगे हैं। जबकि, कॉलेज प्रशासन व प्राचार्य अब भी अपने पुराने दावों पर ही अड़े हैं।
उठ रहे सवाल
कॉलेज प्रशासन के अपने ही दावों से यूटर्न लेने और वार्डों से इन सामानों की इंडेंट आने से कई सवाल उठ रहे हैं। एक तो यदि यह सामान अनुपयोगी थे तो अब अचानक से इसकी डिमांड क्यों आ गई। यदि डिमांड आई तो भी कॉलेज प्रशासन इसे नकार क्यों रहा है। कहीं जानबूझकर तो यह बखेड़ा नहीं खड़ा किया गया या फिर बीते दिनों बगैर ऑर्डर के आई दवाओं के मामले को दबाने के लिए इस मामले को तूल दिया गया। कहीं किरकिरी से बचने के लिए तो मामले को नहीं छिपाया जा रहा है।
बोले जिम्मेदार
मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि ऐसे सामान आए भी हैं, उन्हें जानकारी नहीं थी। उनके विभाग से ऐसी कोई डिमांड नहीं गई है। जबकि अस्पताल से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण अधिकारी ने कई विभागों से शैंपू-बॉडीवाश के इंडेंट आने की पुष्टि की है। वहीं, प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मर्तोलिया ने कहा कि अभी मामले की जांच कराई जा रही है। उनके पास अभी तक किसी ने डिमांड नहीं भेजी है। जांच के बाद ही अग्रिम कार्रवाई होगी।
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अयोध्या। मेडिकल काॅलेज में जिस शैंपू और बॉडीवाश काे फिजूल बताकर गोदाम में डंप किया गया था, अब एकाएक वे जरूरी बन गए हैं। अस्पताल के कुछ विभागों से इसकी डिमांड भेजी गई है, जिसकी आपूर्ति भी हुई है। वहीं, कॉलेज प्रशासन अब भी जांच का हवाला देकर इसके उपयोग को नकार रहा है।
मेडिकल कॉलेज में लंबे समय तक भर्ती रहने वाले मरीजों को बेड सोर व त्वचा संबंधी अन्य संक्रमण से बचाने के लिए गत वर्ष शैंपू और बॉडीवाश की खरीद हुई थी। इसे उन मरीजों के लिए उपयोगी बताया गया था, जो लंबे समय तक बेड पर पड़े रहते हैं और नहाने-धोने में अक्षम होते हैं। ट्रायल के बाद इस पर शोध करने की योजना भी थी, जिसकी रूपरेखा तय हाे गई थी।
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इस बीच आपसी खींचतान और गुटबाजी के कारण तत्कालीन प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा को हटा दिया गया, तभी से इसका उपयोग ठप हो गया। साथ ही शोध कार्य भी आगे नहीं बढ़ सका। कुछ दिन पहले कॉलेज प्रशासन ने इसकी खरीद प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए। ऐसे सामानों की खरीद की आवश्यकता से नकार दिया गया। बाद में खरीद के उद्देश्यों व प्रक्रिया आदि की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई।
अमर उजाला ने आठ अप्रैल को शोध कार्य अधूरा, गोदाम में पड़ा लाखों का शैंपू-बॉडीवाश शीर्षक खबर प्रकाशित की तो कॉलेज प्रशासन कटघरे में खड़ा हुआ। सूत्रों के अनुसार इसके बाद से ही मेडिसिन आईसीयू, एनआईसीयू, लेबर रूम आदि से उन्हीं शैंपू-बॉडीवाश के इंडेंट आने लगे, जिन्हें फिजूल व अनावश्यक बताया गया था। वार्डों की मांग के अनुरूप उनकी आपूर्ति करने के संकेत भी मिले हैं। इससे जुड़े साक्ष्य भी अमर उजाला के हाथ लगे हैं। जबकि, कॉलेज प्रशासन व प्राचार्य अब भी अपने पुराने दावों पर ही अड़े हैं।
उठ रहे सवाल
कॉलेज प्रशासन के अपने ही दावों से यूटर्न लेने और वार्डों से इन सामानों की इंडेंट आने से कई सवाल उठ रहे हैं। एक तो यदि यह सामान अनुपयोगी थे तो अब अचानक से इसकी डिमांड क्यों आ गई। यदि डिमांड आई तो भी कॉलेज प्रशासन इसे नकार क्यों रहा है। कहीं जानबूझकर तो यह बखेड़ा नहीं खड़ा किया गया या फिर बीते दिनों बगैर ऑर्डर के आई दवाओं के मामले को दबाने के लिए इस मामले को तूल दिया गया। कहीं किरकिरी से बचने के लिए तो मामले को नहीं छिपाया जा रहा है।
बोले जिम्मेदार
मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि ऐसे सामान आए भी हैं, उन्हें जानकारी नहीं थी। उनके विभाग से ऐसी कोई डिमांड नहीं गई है। जबकि अस्पताल से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण अधिकारी ने कई विभागों से शैंपू-बॉडीवाश के इंडेंट आने की पुष्टि की है। वहीं, प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मर्तोलिया ने कहा कि अभी मामले की जांच कराई जा रही है। उनके पास अभी तक किसी ने डिमांड नहीं भेजी है। जांच के बाद ही अग्रिम कार्रवाई होगी।

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