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Ayodhya News: इस बार 59 दिन का होगा ज्येष्ठ माह
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 08 Apr 2026 11:52 PM IST
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अयोध्या। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ मास में बना अधिक मास का दुर्लभ संयोग पूरे देश में आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा। लगभग 19 वर्षों के अंतराल के बाद आए इस विशेष काल को शास्त्रों में पुरुषोत्तम मास कहा गया है, जिसे भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। 17 मई से 15 जून तक चलने वाला यह काल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और फलदायी माना जा रहा है, जिसमें पूजा, जप, तप और दान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
इस वर्ष हिंदू पंचांग में एक अनोखा और दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब ज्येष्ठ माह सामान्य 30 दिनों के बजाय करीब 59 दिनों तक चलेगा। इसका कारण ज्येष्ठ में पड़ रहा अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) है, जिससे वर्ष में कुल 13 महीने हो जाएंगे और आषाढ़ का आगमन भी विलंब से होगा।
हिंदू नव संवत्सर 2083 की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है, जो अपने साथ दो ज्येष्ठ लेकर आ रहा है। इनमें एक सामान्य और दूसरा अधिकमास होगा। ज्येष्ठ का क्रम दो मई से 29 जून तक चलेगा। दो से 16 मई तक कृष्ण पक्ष, 17 मई से 15 जून तक अधिकमास और 16 से 29 जून तक शुक्ल पक्ष रहेगा। यह व्यवस्था सौर वर्ष (365 दिन) और चंद्र वर्ष (354 दिन) के बीच संतुलन बनाने के लिए हर दो-तीन साल में की जाती है, ताकि ऋतुएं और त्योहार अपने समय पर बने रहें।
अधिकमास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस दौरान व्रत, दान, पूजा, जप और तीर्थ स्नान का विशेष महत्व होता है। हालांकि इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और नए कार्यों की शुरुआत जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं।
व्रत, दान, पूजा, जप और तीर्थ स्नान का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रवीण शर्मा के अनुसार इस वर्ष नव संवत्सर का राजा गुरु और मंत्री मंगल हैं। यह योग देश में आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय एकता को मजबूती देने वाला माना जा रहा है। साथ ही शिक्षा, न्याय व्यवस्था और धार्मिक गतिविधियों में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, श्रीमद्भागवत कथा श्रवण और भागवत का अध्ययन विशेष पुण्यदायक बताया गया है।
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इस वर्ष हिंदू पंचांग में एक अनोखा और दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब ज्येष्ठ माह सामान्य 30 दिनों के बजाय करीब 59 दिनों तक चलेगा। इसका कारण ज्येष्ठ में पड़ रहा अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) है, जिससे वर्ष में कुल 13 महीने हो जाएंगे और आषाढ़ का आगमन भी विलंब से होगा।
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हिंदू नव संवत्सर 2083 की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है, जो अपने साथ दो ज्येष्ठ लेकर आ रहा है। इनमें एक सामान्य और दूसरा अधिकमास होगा। ज्येष्ठ का क्रम दो मई से 29 जून तक चलेगा। दो से 16 मई तक कृष्ण पक्ष, 17 मई से 15 जून तक अधिकमास और 16 से 29 जून तक शुक्ल पक्ष रहेगा। यह व्यवस्था सौर वर्ष (365 दिन) और चंद्र वर्ष (354 दिन) के बीच संतुलन बनाने के लिए हर दो-तीन साल में की जाती है, ताकि ऋतुएं और त्योहार अपने समय पर बने रहें।
अधिकमास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस दौरान व्रत, दान, पूजा, जप और तीर्थ स्नान का विशेष महत्व होता है। हालांकि इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और नए कार्यों की शुरुआत जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं।
व्रत, दान, पूजा, जप और तीर्थ स्नान का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रवीण शर्मा के अनुसार इस वर्ष नव संवत्सर का राजा गुरु और मंत्री मंगल हैं। यह योग देश में आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय एकता को मजबूती देने वाला माना जा रहा है। साथ ही शिक्षा, न्याय व्यवस्था और धार्मिक गतिविधियों में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, श्रीमद्भागवत कथा श्रवण और भागवत का अध्ययन विशेष पुण्यदायक बताया गया है।