UP: चंपत राय की वापसी की सुगबुगाहट, समर्थन में खुलकर उतरे संत-व्यापारी; ट्रस्ट की अगली रणनीति पर टिकीं निगाहें
राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव के समर्थन में संत और व्यापारी खुलकर सामने आए हैं। विशेष जांच दल की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। ट्रस्ट की आगामी बैठक पर सभी की नजरें हैं, जहां आगे की रणनीति और भविष्य की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है।
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय को लेकर अब अयोध्या में माहौल बदलता दिखाई दे रहा है। एक ओर उन्होंने सार्वजनिक पत्र जारी कर खुद को निर्दोष बताते हुए एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने तक विस्तृत जवाब देने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर उनके समर्थन में साधु-संतों और व्यापारिक संगठनों की लामबंदी भी तेज हो गई है। ट्रस्ट के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद परिस्थितियां बदल सकती हैं।
रामभक्तों के नाम लिखे अपने पत्र में चंपत राय ने कहा था कि उनके साथ अपनों ने विश्वासघात किया है। उन्होंने दावा किया था कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में उनका नाम नहीं है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वह हर आरोप का तथ्यात्मक जवाब देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अयोध्या से किसी प्रकार का दाग लेकर नहीं जाना चाहते।
चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे स्वीकार किए गए थे
चढ़ावा अनियमितता प्रकरण के बाद गठित एसआईटी की जांच अभी जारी है। प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर कई आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि ट्रस्ट के तत्कालीन पदाधिकारियों से भी पूछताछ हुई है। इसी बीच छह जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे स्वीकार किए गए थे।
हालांकि इसके बाद से चंपत राय के समर्थन में आवाजें लगातार बढ़ रही हैं। अयोध्या के कई प्रमुख संतों का कहना है कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी मानना न्यायोचित नहीं है। उनका कहना है कि वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन और निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व्यक्ति पर अंतिम निष्कर्ष आने से पहले निर्णय नहीं दिया जाना चाहिए।
सिर्फ संत समाज ही नहीं, बल्कि अयोध्या के व्यापारिक संगठनों ने भी यही रुख अपनाया है। व्यापारियों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और दोष सिद्ध नहीं होता, तब तक किसी व्यक्ति को अपराधी की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
ट्रस्ट की अगली रणनीति पर सभी की निगाहें
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि के उस बयान ने भी चर्चाओं को हवा दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भविष्य में क्या होगा, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। दूसरी ओर, कृष्ण मोहन को स्थायी महासचिव के बजाय कार्यवाहक महासचिव बनाए जाने को भी कई लोग भविष्य की संभावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि ट्रस्ट ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
अब सभी की निगाहें 22 जुलाई को प्रस्तावित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उसके बाद ट्रस्ट की अगली रणनीति से ही यह स्पष्ट होगा कि चंपत राय की भूमिका भविष्य में क्या रहने वाली है।