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Banda News: 50 किट और 100 टैबलेट के भरोसे स्वाइन फ्लू का इलाज
Tue, 15 Sep 2026 11:34 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 15 Sep 2026 11:34 PM IST
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फोटो 2- जिला अस्पताल में पहले यहां बना था स्वाइन फ्लू वार्ड, अब डेंगू वार्ड। संवाद
बांदा। जनपद में अब तक स्वाइन फ्लू का कोई मरीज सामने नहीं आया है लेकिन बदलते मौसम में बुखार के मरीजों की बढ़ती भीड़ के बीच स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां नाकाफी हैं।
मेडिकल कॉलेज में विभाग के पास स्वाइन फ्लू की जांच के लिए केवल 50 किट और इलाज के लिए 100 टैबलेट होने की जानकारी है।
पड़ताल में सामने आया कि बीमारी से जंग के नाम पर मेडिकल कॉलेज में 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार है। वहीं, जिला अस्पताल में आठ बेड रिजर्व किए गए हैं। कस्बों और ग्रामीण इलाकों में कहीं जांच की सुविधा नहीं हैं। जिला अस्पताल में फिजिशियन को विशेष रजिस्टर दिया गया है। इसमें वह संदिग्ध मरीजों की जानकारी दर्ज करेंगे।
इसके विपरीत कस्बों के अस्पतालों में बुखार पीड़ितों की जांच के लिए अलग व्यवस्था का अभाव है। पड़ताल में यह भी सामने आया कि बुखार पीड़ितों के लिए अलग हेल्प डेस्क और जांच व्यवस्था न होने से सामान्य मरीजों के साथ ही संदिग्ध मरीजों को भी एक ही कतार में इंतजार करना पड़ रहा है। इससे संक्रमण की आशंका बढ़ने के साथ मरीजों को समय पर उपचार मिलने में भी दिक्कत हो सकती है।
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सीएचसी अतर्रा : जांच नहीं, एक ही लैब में सभी मरीज
अतर्रा। कस्बा स्थित सीएचसी में डेंगू और स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए चार बेड का वार्ड तैयार किया गया है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि बुखार से बचाव के लिए कोई विशेष टीम या जागरूकता अभियान नहीं चलाया जा रहा है।
पैथोलॉजी लैब टेक्नीशियन विनोद कुमार सिंह ने बताया कि मलेरिया, टाइफाइड और डेंगू की जांच मरीजों के आने के आधार पर की जाती है, लेकिन स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। पर्चा काउंटर पर मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। बुखार सहित सभी मरीजों की जांच एक ही लैब में की जा रही है। अलग हेल्प डेस्क नहीं है।
मरीजों ने बताया कि डॉक्टर कक्ष के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ बुजुर्ग और महिलाएं थककर फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते मिले।
पीएचसी तिंदवारी : चार बेड का कक्ष, अलग जांच डेस्क नहीं
पीएचसी में बुखार, डेंगू और स्वाइन फ्लू को लेकर कोई अलग व्यवस्था नहीं है। खून की जांच की सुविधा है, लेकिन बुखार की जांच के लिए अलग डेस्क नहीं बनाई गई है। एक कक्ष में चार बेड की व्यवस्था है। प्रसव कक्ष में सात बेड हैं।
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी नरेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि प्राथमिक केंद्र के अंतर्गत 34 सेंटर स्थापित हैं। आशा और एएनएम के माध्यम से ब्लीचिंग व क्लोरीन दवा का वितरण कराया जा रहा है। संक्रामक रोगों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीम शिविर लगाकर लोगों की जांच कर रही है।
सीएचसी बबेरू : डेंगू के दो और स्वाइन फ्लू के चार वार्ड
सामुदायिक स्वास्थ्य बबेरू में बुखार, डेंगू और स्वाइन फ्लू को लेकर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। डेंगू मरीजों के लिए दो और स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए चार वार्ड तैयार किए गए हैं। मरीजों की खून जांच की सुविधा भी उपलब्ध है।
अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश ने बताया कि संक्रामक रोगों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम शिविर लगाकर जांच कर रही है और ग्रामीणों को बचाव के उपाय बता रही है।
सीएचसी नरैनी
फीवर डेस्क पर प्राथमिक जांच की सुविधा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुखार पीड़ितों के लिए अलग फीवर डेस्क बनाई गई है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. विकास यादव ने बताया कि मलेरिया के लिए आरडीटी, डेंगू के लिए एनएस-1 और टाइफाइड के लिए विडाल टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है।
डेंगू मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाया गया है। संदिग्ध मरीजों की चिकित्सकों द्वारा निगरानी की जा रही है। मरीजों और तीमारदारों को मच्छरों से बचाव, पानी जमा न होने देने और साफ-सफाई रखने की सलाह दी जा रही है।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज में स्वाइन फ्लू के लिए 50 किट, 100 टैबलेट और 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। अब तक एक भी स्वाइन फ्लू संदिग्ध मरीज नहीं आया है। सतर्कता बरती जा रही है।
डॉ. सुनील कौशल, प्राचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा।
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मेडिकल कॉलेज में विभाग के पास स्वाइन फ्लू की जांच के लिए केवल 50 किट और इलाज के लिए 100 टैबलेट होने की जानकारी है।
पड़ताल में सामने आया कि बीमारी से जंग के नाम पर मेडिकल कॉलेज में 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार है। वहीं, जिला अस्पताल में आठ बेड रिजर्व किए गए हैं। कस्बों और ग्रामीण इलाकों में कहीं जांच की सुविधा नहीं हैं। जिला अस्पताल में फिजिशियन को विशेष रजिस्टर दिया गया है। इसमें वह संदिग्ध मरीजों की जानकारी दर्ज करेंगे।
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इसके विपरीत कस्बों के अस्पतालों में बुखार पीड़ितों की जांच के लिए अलग व्यवस्था का अभाव है। पड़ताल में यह भी सामने आया कि बुखार पीड़ितों के लिए अलग हेल्प डेस्क और जांच व्यवस्था न होने से सामान्य मरीजों के साथ ही संदिग्ध मरीजों को भी एक ही कतार में इंतजार करना पड़ रहा है। इससे संक्रमण की आशंका बढ़ने के साथ मरीजों को समय पर उपचार मिलने में भी दिक्कत हो सकती है।
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सीएचसी अतर्रा : जांच नहीं, एक ही लैब में सभी मरीज
अतर्रा। कस्बा स्थित सीएचसी में डेंगू और स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए चार बेड का वार्ड तैयार किया गया है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि बुखार से बचाव के लिए कोई विशेष टीम या जागरूकता अभियान नहीं चलाया जा रहा है।
पैथोलॉजी लैब टेक्नीशियन विनोद कुमार सिंह ने बताया कि मलेरिया, टाइफाइड और डेंगू की जांच मरीजों के आने के आधार पर की जाती है, लेकिन स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। पर्चा काउंटर पर मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। बुखार सहित सभी मरीजों की जांच एक ही लैब में की जा रही है। अलग हेल्प डेस्क नहीं है।
मरीजों ने बताया कि डॉक्टर कक्ष के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ बुजुर्ग और महिलाएं थककर फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते मिले।
पीएचसी तिंदवारी : चार बेड का कक्ष, अलग जांच डेस्क नहीं
पीएचसी में बुखार, डेंगू और स्वाइन फ्लू को लेकर कोई अलग व्यवस्था नहीं है। खून की जांच की सुविधा है, लेकिन बुखार की जांच के लिए अलग डेस्क नहीं बनाई गई है। एक कक्ष में चार बेड की व्यवस्था है। प्रसव कक्ष में सात बेड हैं।
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी नरेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि प्राथमिक केंद्र के अंतर्गत 34 सेंटर स्थापित हैं। आशा और एएनएम के माध्यम से ब्लीचिंग व क्लोरीन दवा का वितरण कराया जा रहा है। संक्रामक रोगों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीम शिविर लगाकर लोगों की जांच कर रही है।
सीएचसी बबेरू : डेंगू के दो और स्वाइन फ्लू के चार वार्ड
सामुदायिक स्वास्थ्य बबेरू में बुखार, डेंगू और स्वाइन फ्लू को लेकर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। डेंगू मरीजों के लिए दो और स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए चार वार्ड तैयार किए गए हैं। मरीजों की खून जांच की सुविधा भी उपलब्ध है।
अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश ने बताया कि संक्रामक रोगों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम शिविर लगाकर जांच कर रही है और ग्रामीणों को बचाव के उपाय बता रही है।
सीएचसी नरैनी
फीवर डेस्क पर प्राथमिक जांच की सुविधा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुखार पीड़ितों के लिए अलग फीवर डेस्क बनाई गई है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. विकास यादव ने बताया कि मलेरिया के लिए आरडीटी, डेंगू के लिए एनएस-1 और टाइफाइड के लिए विडाल टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है।
डेंगू मरीजों के लिए अलग वार्ड बनाया गया है। संदिग्ध मरीजों की चिकित्सकों द्वारा निगरानी की जा रही है। मरीजों और तीमारदारों को मच्छरों से बचाव, पानी जमा न होने देने और साफ-सफाई रखने की सलाह दी जा रही है।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज में स्वाइन फ्लू के लिए 50 किट, 100 टैबलेट और 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। अब तक एक भी स्वाइन फ्लू संदिग्ध मरीज नहीं आया है। सतर्कता बरती जा रही है।
डॉ. सुनील कौशल, प्राचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा।

फोटो 2- जिला अस्पताल में पहले यहां बना था स्वाइन फ्लू वार्ड, अब डेंगू वार्ड। संवाद

फोटो 2- जिला अस्पताल में पहले यहां बना था स्वाइन फ्लू वार्ड, अब डेंगू वार्ड। संवाद

फोटो 2- जिला अस्पताल में पहले यहां बना था स्वाइन फ्लू वार्ड, अब डेंगू वार्ड। संवाद

फोटो 2- जिला अस्पताल में पहले यहां बना था स्वाइन फ्लू वार्ड, अब डेंगू वार्ड। संवाद