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Barabanki News: बाराबंकी की झीलों में जुटेंगे 12 देशों से आने वाले 30 प्रजातियों के पक्षी
Sun, 25 Oct 2026 02:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 25 Oct 2026 02:15 AM IST
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सगरा झील में विचरण करते विभिन प्रकार के पक्षी
बाराबंकी। पंछी, नदियां, पवन के झोंके...कोई सरहद ना इन्हें रोके... फिल्मी गीत में पिरोई गईं यह शेरो शायरी बाराबंकी जिले में पूरी तरह से चरितार्थ होती दिख रही है। ठंड का मौसम शुरू हो चुका है और इसी के साथ यहां की 18 झीलों में करीब 14 देशों से 30 प्रजातियों के विदेशी पक्षी कलरव करने आ रहे हैं। नवंबर में यहां पहुंचने वाले ये पक्षी यहां प्रजनन भी करेंगे और मार्च में गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले बच्चों के साथ अपने देशों में लौट जाएंगे। इन मेहमानों का स्वागत करने के लिए वन विभाग तैयार है।
ये 18 प्रमुख झीलें करीब 604 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हैं। इनमें फतेहपुर की भगहर, 74.124, हैदरगढ़ की चकोरा 41.74, रामनगर की बनगांवा 36.84, हैदरगढ़ की भितरी झीले 24.25 हेक्टेयर में फैलीें हैं।
इसी प्रकार, देवा की बैनाटीकाहार 23.67, कमरावां 29.88, रामसनेहीघाट की सरायबरई 18.19, फतेहपुर की नटकौली 10.72, रामनगर की खुर्दमऊ 7.44, हरख की सादुल्लापुर झील 4.87, देव की सलारपुर 40.17 व रामसनेहीघाटकी सराह झील 17.59 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हैं। ये 12 अधिसूचित झीलें हैं। करीब 60 हेक्टेयर में फैली किरकिच्ची झील में हर साल बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी प्रवास करते हैं।
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यहां नॉर्दर्न पिनटेल, नॉर्दर्न शोवलर, कॉमन टील, गडवाल, यूरेशियन विजन, कॉमन कूट, कॉमन पोचार्ड, रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड और बार-हेडेड गूज जैसी प्रजातियां देखने सामान्य रून से देखने को मिलती हैं। यूपी सचिवालय सेवा के अधिकारी नवीन कुमार बनौधा, जो कई वर्षों से बाराबंकी आने वाले प्रवासी पक्षियों की फोटोग्राफी कर रहे हैंवव्वे कहते है कि बाराबंकी में रूस, जापान, चीन, साइबेरिया, तिब्बत यूरोपीय देशों के सहित करीब 12 देशों के पक्षियों की फोटो वह अपने कैमरे में कैद कर चुके हैं। संवाद
चीन की लैपविंग से लेकर यूरोप का टेमनिक स्टिंट तक
रूडी-शेलडक, नार्दन पिनटेल, नार्दन शोवलर, कॉमन कूट, गडवाल, ग्रे-लैगगीज (सवन), यूरेशियन वीजन, कॉमन टील, गार्गेनी, मलॉर्ड, कॉमन क्रेन, कॉमन पोचर्ड, फेरुजीनस डक, रेड-क्रेस्टेड पोचर्ड, टफ्टेड पोचर्ड, बार हेडेड गीस, कॉमन ग्रीनशैंक, टेमनिक स्टिंट, कॉमन सैंडपाईपर, ग्रीन सैंडपाईपर, वुड सैंडपाईपर, येलो वैगटेल, वाइट वैगटेल, ग्रे वैगटेल, साइबेरियन स्टोनचैट, ग्रेड-हैडेड वैपाविंग (चाईनीज टीटेहरी), ब्लैक-टेल्ड गॉडविट, कॉमन स्टर्लिंग, रूफ्फ (गेहवाला) प्रजाति के पक्षियों की हर साल बाराबंकी में आमद होती है।
झीलें विदेशी पक्षिओं के अनकूल, होगी सुरक्षा
पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध में सर्दी शुरू होते ही बर्फबारी होने लगती है। बड़ी संख्या में पक्षी भोजन, प्रजनन और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भारत का रुख करते हैं। इनमें बड़ी संख्या में पक्षी बाराबंकी की झीलों तक पहुंचते हैं। इनकी निगरानी के लिए हर झील पर वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई जा रही है।
- आकाशदीप बधावन, प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी
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ये 18 प्रमुख झीलें करीब 604 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हैं। इनमें फतेहपुर की भगहर, 74.124, हैदरगढ़ की चकोरा 41.74, रामनगर की बनगांवा 36.84, हैदरगढ़ की भितरी झीले 24.25 हेक्टेयर में फैलीें हैं।
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इसी प्रकार, देवा की बैनाटीकाहार 23.67, कमरावां 29.88, रामसनेहीघाट की सरायबरई 18.19, फतेहपुर की नटकौली 10.72, रामनगर की खुर्दमऊ 7.44, हरख की सादुल्लापुर झील 4.87, देव की सलारपुर 40.17 व रामसनेहीघाटकी सराह झील 17.59 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हैं। ये 12 अधिसूचित झीलें हैं। करीब 60 हेक्टेयर में फैली किरकिच्ची झील में हर साल बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी प्रवास करते हैं।
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यहां नॉर्दर्न पिनटेल, नॉर्दर्न शोवलर, कॉमन टील, गडवाल, यूरेशियन विजन, कॉमन कूट, कॉमन पोचार्ड, रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड और बार-हेडेड गूज जैसी प्रजातियां देखने सामान्य रून से देखने को मिलती हैं। यूपी सचिवालय सेवा के अधिकारी नवीन कुमार बनौधा, जो कई वर्षों से बाराबंकी आने वाले प्रवासी पक्षियों की फोटोग्राफी कर रहे हैंवव्वे कहते है कि बाराबंकी में रूस, जापान, चीन, साइबेरिया, तिब्बत यूरोपीय देशों के सहित करीब 12 देशों के पक्षियों की फोटो वह अपने कैमरे में कैद कर चुके हैं। संवाद
चीन की लैपविंग से लेकर यूरोप का टेमनिक स्टिंट तक
रूडी-शेलडक, नार्दन पिनटेल, नार्दन शोवलर, कॉमन कूट, गडवाल, ग्रे-लैगगीज (सवन), यूरेशियन वीजन, कॉमन टील, गार्गेनी, मलॉर्ड, कॉमन क्रेन, कॉमन पोचर्ड, फेरुजीनस डक, रेड-क्रेस्टेड पोचर्ड, टफ्टेड पोचर्ड, बार हेडेड गीस, कॉमन ग्रीनशैंक, टेमनिक स्टिंट, कॉमन सैंडपाईपर, ग्रीन सैंडपाईपर, वुड सैंडपाईपर, येलो वैगटेल, वाइट वैगटेल, ग्रे वैगटेल, साइबेरियन स्टोनचैट, ग्रेड-हैडेड वैपाविंग (चाईनीज टीटेहरी), ब्लैक-टेल्ड गॉडविट, कॉमन स्टर्लिंग, रूफ्फ (गेहवाला) प्रजाति के पक्षियों की हर साल बाराबंकी में आमद होती है।
झीलें विदेशी पक्षिओं के अनकूल, होगी सुरक्षा
पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध में सर्दी शुरू होते ही बर्फबारी होने लगती है। बड़ी संख्या में पक्षी भोजन, प्रजनन और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भारत का रुख करते हैं। इनमें बड़ी संख्या में पक्षी बाराबंकी की झीलों तक पहुंचते हैं। इनकी निगरानी के लिए हर झील पर वनकर्मियों की ड्यूटी लगाई जा रही है।
- आकाशदीप बधावन, प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी