{"_id":"69c5848a2614bcc7a3075c14","slug":"farmers-hopes-are-shattering-due-to-the-lack-of-remunerative-prices-in-the-market-ghazipur-news-c-313-1-svns1007-149534-2026-03-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: बाजार में कीमत नहीं मिलने से टूट रहीं किसानों की उम्मीदें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: बाजार में कीमत नहीं मिलने से टूट रहीं किसानों की उम्मीदें
विज्ञापन
मुहम्मदाबाद स्थित एक शीतगृह में ट्रक से आलू की बोरी उतारते मजदूर। संवाद
विज्ञापन
मुहम्मदाबाद। जिले में इस वर्ष 10,100 हेक्टेयर में आलू की खेती हुई है। उत्पादन अच्छा होने के बावजूद बाजार में उचित मूल्य न मिलने से किसानों की उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं।
मांग कमजोर होने के कारण किसान फसल को औने-पौने दाम पर बेचने या खेत में छोड़ने को मजबूर हैं, जबकि बिहार, झारखंड और नेपाल जैसे क्षेत्रों में इस बार मांग कम रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने से निर्यात प्रभावित हुआ है।
पूर्वांचल में सर्वाधिक आलू की खेती गाजीपुर जिले में, खासकर मुहम्मदाबाद तहसील क्षेत्र में होती है। शेरपुर, सेमरा, सुल्तानपुर, गौसपुर, नोनहरा, टड़वा, हाटा, मुहम्मदाबाद, तमलपुरा, बच्छलकापुरा, मिरानपुर, कुंडेसर, परसा, राजापुर, मलिकपुरा आदि गांवों में की गई है। इस बार अच्छी पैदावार भी किसानों को राहत नहीं दे सकी। कई जगह लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
पिछले वर्ष की तुलना में आलू के दाम 50 प्रतिशत से अधिक गिर गए हैं। बीते वर्ष आलू 1200 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था, जबकि इस वर्ष 750 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी की बढ़ती लागत के मुकाबले उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
प्रति क्विंटल 270 रुपये देना पड़ता है किराया
कोल्ड स्टोरेज में भंडारण कराने पर 270 रुपये प्रति क्विंटल तक किराया देना पड़ता है, जिससे खर्च और बढ़ जाता है। इस वर्ष जिले के कोल्ड स्टोरेज में केवल 45 से 50 प्रतिशत तक ही भंडारण हुआ है। इसमें करीब 40 प्रतिशत आलू किसानों का है, जबकि 10 से 15 प्रतिशत आलू व्यापारियों व स्टोरेज संचालकों ने कासगंज, बाराबंकी और बदायूं की मंडियों से मंगाकर रखा है, जिससे कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने वाले किसान और अधिक परेशान हैं। भंडारण शुल्क के साथ बाजार में मांग कमजोर रहने से उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
बढ़ती लागत ने तोड़ी कमर
दुबिहां। क्षेत्र में इस बार आलू की पैदावार और बाजार भाव दोनों ने किसानों को निराश किया है। मौसम की मार और बढ़ती लागत ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बाराचवर के किसान शिवजी खरवार ने बताया कि एक बीघा में बोई गई फसल में रोग लगने से उत्पादन घट गया। असावर के भरतजी राय ने कहा कि समय पर सिंचाई और दवा के बावजूद ठंड कम पड़ने से फसल प्रभावित हुई। राजापुर के अखिलानंद राय के अनुसार बढ़ती लागत के बीच घटती पैदावार से आलू की खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।
आलू की खेती में लागत के अनुसार भाव नहीं मिलने से नुकसान उठाना पड़ रहा है। सीजन में खरीदार न मिलने के कारण मजबूरन आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखना पड़ता है। - कृपाशंकर राय, टड़वा
क्षेत्र में परंपरागत सी-वन आलू का उत्पादन कम हो रहा है, जबकि सोरो किस्म का उत्पादन अधिक हुआ है। वहीं, सी-वन पर सूकरों के प्रकोप से नुकसान हो रहा है। - लल्लन पांडेय, मुहम्मदाबाद
Trending Videos
मांग कमजोर होने के कारण किसान फसल को औने-पौने दाम पर बेचने या खेत में छोड़ने को मजबूर हैं, जबकि बिहार, झारखंड और नेपाल जैसे क्षेत्रों में इस बार मांग कम रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने से निर्यात प्रभावित हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पूर्वांचल में सर्वाधिक आलू की खेती गाजीपुर जिले में, खासकर मुहम्मदाबाद तहसील क्षेत्र में होती है। शेरपुर, सेमरा, सुल्तानपुर, गौसपुर, नोनहरा, टड़वा, हाटा, मुहम्मदाबाद, तमलपुरा, बच्छलकापुरा, मिरानपुर, कुंडेसर, परसा, राजापुर, मलिकपुरा आदि गांवों में की गई है। इस बार अच्छी पैदावार भी किसानों को राहत नहीं दे सकी। कई जगह लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
पिछले वर्ष की तुलना में आलू के दाम 50 प्रतिशत से अधिक गिर गए हैं। बीते वर्ष आलू 1200 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका था, जबकि इस वर्ष 750 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी की बढ़ती लागत के मुकाबले उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
प्रति क्विंटल 270 रुपये देना पड़ता है किराया
कोल्ड स्टोरेज में भंडारण कराने पर 270 रुपये प्रति क्विंटल तक किराया देना पड़ता है, जिससे खर्च और बढ़ जाता है। इस वर्ष जिले के कोल्ड स्टोरेज में केवल 45 से 50 प्रतिशत तक ही भंडारण हुआ है। इसमें करीब 40 प्रतिशत आलू किसानों का है, जबकि 10 से 15 प्रतिशत आलू व्यापारियों व स्टोरेज संचालकों ने कासगंज, बाराबंकी और बदायूं की मंडियों से मंगाकर रखा है, जिससे कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने वाले किसान और अधिक परेशान हैं। भंडारण शुल्क के साथ बाजार में मांग कमजोर रहने से उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
बढ़ती लागत ने तोड़ी कमर
दुबिहां। क्षेत्र में इस बार आलू की पैदावार और बाजार भाव दोनों ने किसानों को निराश किया है। मौसम की मार और बढ़ती लागत ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बाराचवर के किसान शिवजी खरवार ने बताया कि एक बीघा में बोई गई फसल में रोग लगने से उत्पादन घट गया। असावर के भरतजी राय ने कहा कि समय पर सिंचाई और दवा के बावजूद ठंड कम पड़ने से फसल प्रभावित हुई। राजापुर के अखिलानंद राय के अनुसार बढ़ती लागत के बीच घटती पैदावार से आलू की खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।
आलू की खेती में लागत के अनुसार भाव नहीं मिलने से नुकसान उठाना पड़ रहा है। सीजन में खरीदार न मिलने के कारण मजबूरन आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखना पड़ता है। - कृपाशंकर राय, टड़वा
क्षेत्र में परंपरागत सी-वन आलू का उत्पादन कम हो रहा है, जबकि सोरो किस्म का उत्पादन अधिक हुआ है। वहीं, सी-वन पर सूकरों के प्रकोप से नुकसान हो रहा है। - लल्लन पांडेय, मुहम्मदाबाद