{"_id":"6a739e70b4d269b372086bac","slug":"five-days-of-hrp-screening-yet-deaths-continue-unabated-ghazipur-news-c-313-1-svns1020-157498-2026-08-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: पांच दिन एचआरपी जांच, फिर भी नहीं थम रहीं मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: पांच दिन एचआरपी जांच, फिर भी नहीं थम रहीं मौत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग हर माह विशेष अभियान चलाकर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) वाली गर्भवतियों की पहचान कर रहा है। इसके बावजूद मातृ मौतों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग सका। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 61,218 गर्भवतियों की जांच में 6,321 महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में चिह्नित की गईं। इनमें 21 की मौत हो गई।
ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) के तहत एएनएम प्रत्येक बुधवार और शनिवार को गर्भवतियों की प्राथमिक जांच करती हैं। हाई रिस्क की आशंका होने पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाता है।
वहीं प्रत्येक माह की एक, नौ, 16 और 24 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच की जाती है। एचआरपी चिह्नित होने के बाद गर्भवती की सुरक्षित प्रसव तक निगरानी और उपचार किए जाने का प्रावधान है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार देवकली ब्लॉक में सबसे अधिक 1,446 गर्भवतियां एचआरपी श्रेणी में चिह्नित हुईं। कासिमाबाद में 1,001, बिरनो में 979, मुहम्मदाबाद में 793 और मनिहारी में 742 एचआरपी गर्भवतियां मिलीं। वहीं सुभाखरपुर में 641, जमानिया में 637, जखनिया में 583, मिर्जापुर में 524, गोड़ऊर में 500, करंडा में 485 और मरदह में 432 गर्भवतियां हाई रिस्क श्रेणी में चिह्नित की गईं।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रभुनाथ ने बताया कि सभी पंजीकृत गर्भवतियों की नियमित जांच कराई जाती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर एचआरपी गर्भवतियों को चिह्नित कर उनका उपचार और फॉलोअप कराया जाता है।
विज्ञापन
ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) के तहत एएनएम प्रत्येक बुधवार और शनिवार को गर्भवतियों की प्राथमिक जांच करती हैं। हाई रिस्क की आशंका होने पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाता है।
विज्ञापन
वहीं प्रत्येक माह की एक, नौ, 16 और 24 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच की जाती है। एचआरपी चिह्नित होने के बाद गर्भवती की सुरक्षित प्रसव तक निगरानी और उपचार किए जाने का प्रावधान है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार देवकली ब्लॉक में सबसे अधिक 1,446 गर्भवतियां एचआरपी श्रेणी में चिह्नित हुईं। कासिमाबाद में 1,001, बिरनो में 979, मुहम्मदाबाद में 793 और मनिहारी में 742 एचआरपी गर्भवतियां मिलीं। वहीं सुभाखरपुर में 641, जमानिया में 637, जखनिया में 583, मिर्जापुर में 524, गोड़ऊर में 500, करंडा में 485 और मरदह में 432 गर्भवतियां हाई रिस्क श्रेणी में चिह्नित की गईं।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रभुनाथ ने बताया कि सभी पंजीकृत गर्भवतियों की नियमित जांच कराई जाती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर एचआरपी गर्भवतियों को चिह्नित कर उनका उपचार और फॉलोअप कराया जाता है।