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Ghazipur News: 16 में से 7 सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं, रोज रेफर होते हैं 30 बच्चे
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खानपुर सीएचसी। संवाद
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गाजीपुर। जनपद में कुल 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, लेकिन सात जगहों पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। किसी भी सीएचसी पर बच्चों के लिए वार्ड स्थापित नहीं है। इस कारण प्रतिदिन 30 बच्चों को रेफर कर दिया जाता है।
सीएचसी पर बच्चों के लिए विशेष वार्ड नहीं होने से तीमारदारों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। बच्चों के उपचार के लिए 40 किलोमीटर तक की दूरी तय कर जनपद मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल अथवा दूसरे जनपदों की शरण लेनी पड़ रही है। हालांकि नौ जगहों पर बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती होने से थोड़ी सी राहत तो है, लेकिन वहां भी पूर्ण रूप से चिकित्सकीय सुविधा बच्चों को नहीं मिल पाती है। ऐसे में बच्चों की तबीयत खराब होने पर तीमारदार उन्हें लेकर निजी चिकित्सक के पास जाते हैं। वहां उनका आर्थिक शोषण होता है। कई बार अप्रशिक्षित चिकित्सक से उपचार कराने के कारण बच्चों की जान पर बन आती है। किसी भी सीएचसी पर चाइल्ड वार्ड नहीं बनाया गया है। जिन सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हैं, वहां बच्चों का उपचार करके उनको अन्य मरीजों संग भर्ती कर लिया जाता है।
औड़िहार : सैदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक दीपक पांडेय ने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञ तो है पर प्रतिदिन एक से दो बच्चों को बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
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जो नहीं हैं विशेषज्ञ वे कर रहे इलाज
मनिहारी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से बच्चों के उपचार की जिम्मेदारी अन्य चिकित्सकों पर है। अस्पताल में प्रतिदिन 10 से 15 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सा प्रभारी डॉ. रामजी सिंह ने बताया कि वर्तमान में स्वास्थ्य केंद्र पर कोई बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। अस्पताल में आने वाले अधिकांश बच्चों को पेट दर्द, बुखार और सामान्य संक्रमण जैसी समस्याएं होती हैं, जिनका उपचार स्वास्थ्य केंद्र पर ही किया जाता है। अभी कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया है, जिसे जिला मुख्यालय रेफर करना पड़ा हो।
बाल रोग विशेषज्ञ के तबादले के बाद बढ़ी दिक्कत
खानपुर। सीएचसी में एक सप्ताह पूर्व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा सोनकर का स्थानांतरण हो गया। इसके बाद से तीमारदारों की दिक्कत बढ़ गई है। बच्चों के बीमार पड़ जाने पर लोग सीएचसी आने से कतरा रहे हैं। वह निजी चिकित्सकों के यहां जाना बेहतर समझ रहे हैं।
जनरल वार्ड में कर देते हैं भर्ती
जखनिया। कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अवधेश ने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के रूप में नवीन कुमार ने एक सप्ताह पूर्व कार्यभार ग्रहण किया है। प्रतिदिन 15 से 20 बीमार बच्चे आ रहे हैं। छोटे बच्चों के बेहतर इलाज के लिए अतिरिक्त बेड नहीं है। बच्चों के गंभीर रूप से बीमार होने पर उन्हें जनरल वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जाता है। वर्तमान में सर्दी, जुकाम, बुखार व सिर दर्द के पीड़ित बच्चे ज्यादा आ रहे हैं।
10 वर्ष से नहीं है बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती
मरदह। सीएचसी पर 10 वर्ष से बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती नहीं है। सीएचसी प्रभारी रविरंजन ने बताया कि 11 बीमार बच्चे आते हैं। ओपीडी में जिस डॉक्टर की डयूटी होती है, वहीं उनका उपचार करते हैं।
ओपीडी में जिसकी तैनाती, वही कर रहा इलाज
गंगौली। कासिमाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बाल विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। कासिमाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डाॅ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि बाल विशेषज्ञ नहीं हैं। ओपीडी में जिसकी तैनाती है, वही बच्चों को देख रहे हैं।
तीमारदारों ने बयां किया दर्द :
सैदपुर सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ हैं, लेकिन यहां जांच की व्यवस्था नहीं है। जांच बाहर से कराना पड़ता है। इसमें समय व रुपये दोनों की बर्बादी होती है। - सूरज जायसवाल, फुलवारी कला
आजादी के इतने वर्षों बाद भी कुछ सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ का न होना, ग्रामीण क्षेत्रों में बदतर स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल रहा है। - राजकुमार यादव, मुड़ियार
ग्रामीण क्षेत्र में निजी चिकित्सक ज्यादातर अप्रशिक्षित होते हैं। उनका उपचार कई बार जानलेवा साबित हो जाता है। ऐसे में सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ की व्यवस्था होनी चाहिए। - लल्लन सिंह, मरदह
मरदह सीएचसी 10 वर्ष पहले बना था। जब से इसका निर्माण हुआ है, तब से यहां पर बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई। ऐसे में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। - विवेक यादव, रायपुर बाघपुर
जिन जगहों पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है, उनके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जल्द ही जिले के सभी सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती कर दी जाएगी। - डॉ. एसके पांडेय, सीएमओ।
सीएचसी पर बच्चों के लिए विशेष वार्ड नहीं होने से तीमारदारों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। बच्चों के उपचार के लिए 40 किलोमीटर तक की दूरी तय कर जनपद मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल अथवा दूसरे जनपदों की शरण लेनी पड़ रही है। हालांकि नौ जगहों पर बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती होने से थोड़ी सी राहत तो है, लेकिन वहां भी पूर्ण रूप से चिकित्सकीय सुविधा बच्चों को नहीं मिल पाती है। ऐसे में बच्चों की तबीयत खराब होने पर तीमारदार उन्हें लेकर निजी चिकित्सक के पास जाते हैं। वहां उनका आर्थिक शोषण होता है। कई बार अप्रशिक्षित चिकित्सक से उपचार कराने के कारण बच्चों की जान पर बन आती है। किसी भी सीएचसी पर चाइल्ड वार्ड नहीं बनाया गया है। जिन सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हैं, वहां बच्चों का उपचार करके उनको अन्य मरीजों संग भर्ती कर लिया जाता है।
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औड़िहार : सैदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक दीपक पांडेय ने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञ तो है पर प्रतिदिन एक से दो बच्चों को बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
जो नहीं हैं विशेषज्ञ वे कर रहे इलाज
मनिहारी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से बच्चों के उपचार की जिम्मेदारी अन्य चिकित्सकों पर है। अस्पताल में प्रतिदिन 10 से 15 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सा प्रभारी डॉ. रामजी सिंह ने बताया कि वर्तमान में स्वास्थ्य केंद्र पर कोई बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। अस्पताल में आने वाले अधिकांश बच्चों को पेट दर्द, बुखार और सामान्य संक्रमण जैसी समस्याएं होती हैं, जिनका उपचार स्वास्थ्य केंद्र पर ही किया जाता है। अभी कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया है, जिसे जिला मुख्यालय रेफर करना पड़ा हो।
बाल रोग विशेषज्ञ के तबादले के बाद बढ़ी दिक्कत
खानपुर। सीएचसी में एक सप्ताह पूर्व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा सोनकर का स्थानांतरण हो गया। इसके बाद से तीमारदारों की दिक्कत बढ़ गई है। बच्चों के बीमार पड़ जाने पर लोग सीएचसी आने से कतरा रहे हैं। वह निजी चिकित्सकों के यहां जाना बेहतर समझ रहे हैं।
जनरल वार्ड में कर देते हैं भर्ती
जखनिया। कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अवधेश ने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के रूप में नवीन कुमार ने एक सप्ताह पूर्व कार्यभार ग्रहण किया है। प्रतिदिन 15 से 20 बीमार बच्चे आ रहे हैं। छोटे बच्चों के बेहतर इलाज के लिए अतिरिक्त बेड नहीं है। बच्चों के गंभीर रूप से बीमार होने पर उन्हें जनरल वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जाता है। वर्तमान में सर्दी, जुकाम, बुखार व सिर दर्द के पीड़ित बच्चे ज्यादा आ रहे हैं।
10 वर्ष से नहीं है बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती
मरदह। सीएचसी पर 10 वर्ष से बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती नहीं है। सीएचसी प्रभारी रविरंजन ने बताया कि 11 बीमार बच्चे आते हैं। ओपीडी में जिस डॉक्टर की डयूटी होती है, वहीं उनका उपचार करते हैं।
ओपीडी में जिसकी तैनाती, वही कर रहा इलाज
गंगौली। कासिमाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बाल विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। कासिमाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डाॅ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि बाल विशेषज्ञ नहीं हैं। ओपीडी में जिसकी तैनाती है, वही बच्चों को देख रहे हैं।
तीमारदारों ने बयां किया दर्द :
सैदपुर सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ हैं, लेकिन यहां जांच की व्यवस्था नहीं है। जांच बाहर से कराना पड़ता है। इसमें समय व रुपये दोनों की बर्बादी होती है। - सूरज जायसवाल, फुलवारी कला
आजादी के इतने वर्षों बाद भी कुछ सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ का न होना, ग्रामीण क्षेत्रों में बदतर स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल रहा है। - राजकुमार यादव, मुड़ियार
ग्रामीण क्षेत्र में निजी चिकित्सक ज्यादातर अप्रशिक्षित होते हैं। उनका उपचार कई बार जानलेवा साबित हो जाता है। ऐसे में सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ की व्यवस्था होनी चाहिए। - लल्लन सिंह, मरदह
मरदह सीएचसी 10 वर्ष पहले बना था। जब से इसका निर्माण हुआ है, तब से यहां पर बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हुई। ऐसे में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। - विवेक यादव, रायपुर बाघपुर
जिन जगहों पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है, उनके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जल्द ही जिले के सभी सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती कर दी जाएगी। - डॉ. एसके पांडेय, सीएमओ।