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Ghazipur News: जिले में एआरवी के सिर्फ 2208 वायल बचे
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जिले में कुत्तों और अन्य आवारा जानवरों के हमलों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) का संकट गहराने लगा है। वर्तमान में जिले में मात्र 2208 वायल एआरबी शेष हैं, जबकि हर महीने मेडिकल कॉलेज और 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर छह हजार से अधिक मरीज एआरबी लगवाने पहुंचते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने एक सप्ताह पहले 5000 वायल की मांग उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन को भेजी थी, लेकिन अब तक आपूर्ति नहीं हो सकी है।
जिले में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उपचार उपलब्ध कराने के लिए 17 सीएचसी और 68 न्यू पीएचसी संचालित हैं। इनमें सभी सीएचसी तथा प्रमुख मार्गों पर स्थित करीब 10 न्यू पीएचसी पर एआरबी उपलब्ध कराई जाती है, ताकि कुत्ते, बिल्ली और बंदर के काटने से घायल मरीजों का तत्काल उपचार हो सके।
वर्तमान में सीएचसी और न्यू पीएचसी पर केवल 928 वायल एआरबी उपलब्ध हैं, जबकि जिला औषधि भंडार केंद्र में 1280 वायल शेष हैं। इस तरह पूरे जिले में कुल 2208 वायल ही बची हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून में जिले के सीएचसी और न्यू पीएचसी पर 7842 मरीजों ने एआरबी इंजेक्शन लगवाया, जबकि मई में यह संख्या 7538 रही।
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जून में 2392 वायल और मई में 2371 वायल एआरबी का उपयोग हुआ। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि वर्तमान में उपलब्ध एआरबी की मात्रा एक माह की आवश्यकता से भी कम है।
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स्वास्थ्य विभाग ने एक सप्ताह पहले 5000 वायल की मांग उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन को भेजी थी, लेकिन अब तक आपूर्ति नहीं हो सकी है।
जिले में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उपचार उपलब्ध कराने के लिए 17 सीएचसी और 68 न्यू पीएचसी संचालित हैं। इनमें सभी सीएचसी तथा प्रमुख मार्गों पर स्थित करीब 10 न्यू पीएचसी पर एआरबी उपलब्ध कराई जाती है, ताकि कुत्ते, बिल्ली और बंदर के काटने से घायल मरीजों का तत्काल उपचार हो सके।
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वर्तमान में सीएचसी और न्यू पीएचसी पर केवल 928 वायल एआरबी उपलब्ध हैं, जबकि जिला औषधि भंडार केंद्र में 1280 वायल शेष हैं। इस तरह पूरे जिले में कुल 2208 वायल ही बची हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून में जिले के सीएचसी और न्यू पीएचसी पर 7842 मरीजों ने एआरबी इंजेक्शन लगवाया, जबकि मई में यह संख्या 7538 रही।
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जून में 2392 वायल और मई में 2371 वायल एआरबी का उपयोग हुआ। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि वर्तमान में उपलब्ध एआरबी की मात्रा एक माह की आवश्यकता से भी कम है।