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Ghazipur News: तीसरे दिन मिले चालक-किसान के शव, पत्नी ने दिया कंधा तो नम हुईं आंखें
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मेदनीपुर गांव में पति कृष्ण के शव को कंधा देती गोल्डी। संवाद
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सुहवल (गाजीपुर)। वीर अब्दुल हमीद सेतु की रेलिंग तोड़कर गंगा में ट्रैक्टर-ट्रॉली सहित गिरे चालक समेत दो लोगों के शव तीसरे दिन रविवार की सुबह 8:25 बजे उतराए मिले। घटनास्थल से करीब एक किमी दूर कालूपुर घाट पर कृष्णा उर्फ टिल्लू यादव (25) और सुजानपुर के पास उपेंद्र यादव (40) के शव मिले। ग्रामीणों की मदद से पुलिस ने दोनों शवों को निकाला। ट्रैक्टर व ट्रॉली को शनिवार को ही क्रेन की मदद से बाहर निकाल लिया गया था। उपेंद्र के शव को पत्नी रीता और कृष्णा के शव को पत्नी गोल्डी ने कंधा दिया तो कालूपुर और मेदनीपुर गांव गमगीन हो उठा।
थानाध्यक्ष कमलेश कुमार ने बताया कि 20 मार्च की रात करीब 8:15 बजे गाजीपुर की ओर से आ रही ट्रैक्टर-ट्रॉली बाइक सवार को बचाने के चक्कर में वीर अब्दुल हमीद सेतु की रेलिंग तोड़ते हुए गंगा में गिर गई थी। पुलिस ने नाविकों एवं स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाश की, लेकिन अंधेरा होने के कारण कुछ पता नहीं चल सका। दूसरे दिन 21 मार्च को एसडीआरएफ की टीम गंगा में उतरी और करीब 19 घंटे बाद क्रेन से ट्रॉली निकाली गई, जबकि 22 घंटे बाद इंजन निकालने में टीम सफल हो पाई। कालूपुर निवासी ट्रैक्टर चालक उपेंद्र यादव और मेदनीपुर निवासी कृष्णा उर्फ टिल्लू का पता नहीं चल सका। अंधेरा होने के कारण सर्च अभियान रोक दिया गया था। तीसरे दिन रविवार की सुबह 8:25 बजे उपेंद्र यादव का शव सुजानपुर और कृष्णा उर्फ टिल्लू का शव कालूपुर गंगा घाट पर मिला। दोनों शवों को बाहर निकालकर पंचनामा की कार्रवाई के बाद विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई। ट्रैक्टर चालक उपेंद्र यादव अपने साथी मेदनीपुर निवासी कृष्णा के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लदे आलू को गाजीपुर के कोल्ड स्टोर में खाली कर घर लौट रहे थे। थानाध्यक्ष ने बताया कि दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
शव देख बिलख पड़ीं महिलाएं
सुहवल। गंगा से दोनों शवों को निकालकर कालूपुर शिव मंदिर के सामने कालूपुर-पठकनियां मार्ग के किनारे रखा गया। शव मिलने की सूचना पर कालूपुर और मेदनीपुर गांव के लोग मौके पर पहुंच गए। महिलाओं ने शवों को देख दहाड़ मारकर रोना शुरू कर दिया।
शव देखकर बेटियां अचेत
सुहवल। उपेंद्र यादव और कृष्णा यादव उर्फ टिल्लू के शव पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही घर लाए गए, परिजन बिलख पड़े। उपेंद्र के शव को पत्नी रीता और कृष्णा के शव को पत्नी गोल्डी ने कंधा दिया तो कालूपुर और मेदनीपुर गांव गमगीन हो उठा। यह दृश्य देख हर किसी का कलेजा कांप उठा।
इधर, उपेंद्र की पुत्री सोनी और खुशबू पिता के शव को देखकर बार-बार अचेत हो जा रही थीं और रोते हुए कह रही थीं कि अब स्कूल कैसे जाएंगे। मेदनीपुर श्मशानघाट पर बड़े पुत्र रितेश ने पिता उपेंद्र और पिता रामदेव ने पुत्र कृष्णा को मुखाग्नि दी, जिसे देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। उपेंद्र का शव कालूपुर और कृष्णा का शव मेदनीपुर गांव लाया गया। शव देखते ही चीख-पुकार मच गई। परिजन एक-दूसरे को ढांढस बंधाते रहे।
मेदनीपुर निवासी रीता ने बिलखते हुए पति को अंतिम विदाई दी तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। वहीं कृष्णा की पत्नी गोल्डी रोते-रोते अचेत हो जा रही थी। अर्थी उठने लगी तो वह बिलखते हुए कंधा देने लगी और कहती रही कि अभी दो वर्ष पहले ही शादी हुई थी, अब जीवन कैसे कटेगा। यह हृदय विदारक दृश्य देखकर हर कोई सिहर उठा। गांव के पूर्व प्रधान दीपक सिंह, प्रधान मदन यादव, पूर्व प्रधान पंकज यादव, मनोज यादव, दीपक यादव, डॉ. वीरेंद्र यादव, राघवेंद्र सिंह, आशुतोष सिंह सहित अन्य लोग परिजनों को सांत्वना देने में जुटे रहे।
हार्वेस्टर भी रेलिंग तोड़कर गिर चुका है गंगा में
सुहवल। वर्ष 2019 में बालू लदा एक ट्रैक्टर-ट्रॉली जमानिया की ओर से गाजीपुर जाते समय वीर अब्दुल हमीद सेतु की रेलिंग तोड़कर गंगा में गिर गया था। इसके कुछ वर्ष पहले एक हार्वेस्टर भी रेलिंग तोड़कर नदी में गिरा था, जिसमें चालक की मौत हो गई थी। करीब दस वर्ष पूर्व पश्चिमी छोर पर रेलिंग तोड़कर सवारियों से भरी एक चार पहिया गाड़ी भी गंगा में समा गई थी, जिसमें कई लोगों की जान गई थी। पिछले साल अक्तूबर में भी एक चार पहिया वाहन के नदी में गिरने की सूचना से खलबली मच गई थी, हालांकि उसका पता नहीं चल सका था।
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थानाध्यक्ष कमलेश कुमार ने बताया कि 20 मार्च की रात करीब 8:15 बजे गाजीपुर की ओर से आ रही ट्रैक्टर-ट्रॉली बाइक सवार को बचाने के चक्कर में वीर अब्दुल हमीद सेतु की रेलिंग तोड़ते हुए गंगा में गिर गई थी। पुलिस ने नाविकों एवं स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाश की, लेकिन अंधेरा होने के कारण कुछ पता नहीं चल सका। दूसरे दिन 21 मार्च को एसडीआरएफ की टीम गंगा में उतरी और करीब 19 घंटे बाद क्रेन से ट्रॉली निकाली गई, जबकि 22 घंटे बाद इंजन निकालने में टीम सफल हो पाई। कालूपुर निवासी ट्रैक्टर चालक उपेंद्र यादव और मेदनीपुर निवासी कृष्णा उर्फ टिल्लू का पता नहीं चल सका। अंधेरा होने के कारण सर्च अभियान रोक दिया गया था। तीसरे दिन रविवार की सुबह 8:25 बजे उपेंद्र यादव का शव सुजानपुर और कृष्णा उर्फ टिल्लू का शव कालूपुर गंगा घाट पर मिला। दोनों शवों को बाहर निकालकर पंचनामा की कार्रवाई के बाद विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई। ट्रैक्टर चालक उपेंद्र यादव अपने साथी मेदनीपुर निवासी कृष्णा के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लदे आलू को गाजीपुर के कोल्ड स्टोर में खाली कर घर लौट रहे थे। थानाध्यक्ष ने बताया कि दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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शव देख बिलख पड़ीं महिलाएं
सुहवल। गंगा से दोनों शवों को निकालकर कालूपुर शिव मंदिर के सामने कालूपुर-पठकनियां मार्ग के किनारे रखा गया। शव मिलने की सूचना पर कालूपुर और मेदनीपुर गांव के लोग मौके पर पहुंच गए। महिलाओं ने शवों को देख दहाड़ मारकर रोना शुरू कर दिया।
शव देखकर बेटियां अचेत
सुहवल। उपेंद्र यादव और कृष्णा यादव उर्फ टिल्लू के शव पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही घर लाए गए, परिजन बिलख पड़े। उपेंद्र के शव को पत्नी रीता और कृष्णा के शव को पत्नी गोल्डी ने कंधा दिया तो कालूपुर और मेदनीपुर गांव गमगीन हो उठा। यह दृश्य देख हर किसी का कलेजा कांप उठा।
इधर, उपेंद्र की पुत्री सोनी और खुशबू पिता के शव को देखकर बार-बार अचेत हो जा रही थीं और रोते हुए कह रही थीं कि अब स्कूल कैसे जाएंगे। मेदनीपुर श्मशानघाट पर बड़े पुत्र रितेश ने पिता उपेंद्र और पिता रामदेव ने पुत्र कृष्णा को मुखाग्नि दी, जिसे देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। उपेंद्र का शव कालूपुर और कृष्णा का शव मेदनीपुर गांव लाया गया। शव देखते ही चीख-पुकार मच गई। परिजन एक-दूसरे को ढांढस बंधाते रहे।
मेदनीपुर निवासी रीता ने बिलखते हुए पति को अंतिम विदाई दी तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। वहीं कृष्णा की पत्नी गोल्डी रोते-रोते अचेत हो जा रही थी। अर्थी उठने लगी तो वह बिलखते हुए कंधा देने लगी और कहती रही कि अभी दो वर्ष पहले ही शादी हुई थी, अब जीवन कैसे कटेगा। यह हृदय विदारक दृश्य देखकर हर कोई सिहर उठा। गांव के पूर्व प्रधान दीपक सिंह, प्रधान मदन यादव, पूर्व प्रधान पंकज यादव, मनोज यादव, दीपक यादव, डॉ. वीरेंद्र यादव, राघवेंद्र सिंह, आशुतोष सिंह सहित अन्य लोग परिजनों को सांत्वना देने में जुटे रहे।
हार्वेस्टर भी रेलिंग तोड़कर गिर चुका है गंगा में
सुहवल। वर्ष 2019 में बालू लदा एक ट्रैक्टर-ट्रॉली जमानिया की ओर से गाजीपुर जाते समय वीर अब्दुल हमीद सेतु की रेलिंग तोड़कर गंगा में गिर गया था। इसके कुछ वर्ष पहले एक हार्वेस्टर भी रेलिंग तोड़कर नदी में गिरा था, जिसमें चालक की मौत हो गई थी। करीब दस वर्ष पूर्व पश्चिमी छोर पर रेलिंग तोड़कर सवारियों से भरी एक चार पहिया गाड़ी भी गंगा में समा गई थी, जिसमें कई लोगों की जान गई थी। पिछले साल अक्तूबर में भी एक चार पहिया वाहन के नदी में गिरने की सूचना से खलबली मच गई थी, हालांकि उसका पता नहीं चल सका था।