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Ghazipur News: नौकरी बचाने के लिए छात्र बने गुरुजी

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2026 12:32 AM IST
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To save his job, a student became a teacher.
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गाजीपुर। जिन शिक्षकों के हाथों में कभी बच्चों की कॉपियां और पाठ्यक्रम हुआ करते थे, आज उन्हीं हाथों में फिर से प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें नजर आ रही हैं। जिले के परिषदीय स्कूलों में कार्यरत बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास शिक्षकों के सामने अब नौकरी बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हजारों शिक्षक दोबारा टीईटी की तैयारी में जुट गए हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 8252 परिषदीय शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें लगभग तीन हजार शिक्षक अब तक टीईटी पास नहीं कर सके हैं, जबकि करीब पांच हजार शिक्षक परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार जिन शिक्षकों ने अभी तक टीईटी पास नहीं किया है, उन्हें दो वर्ष के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। एक जुलाई को प्रस्तावित टीईटी को लेकर शिक्षकों ने तैयारी तेज कर दी है। कई शिक्षकों ने शहर में ऑफलाइन कोचिंग जॉइन कर ली है, जबकि बड़ी संख्या में शिक्षक ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से तैयारी कर रहे हैं। स्कूल से लौटने के बाद देर रात तक पढ़ाई की जा रही है। कई शिक्षक सुबह जल्दी उठकर भी पढ़ाई कर रहे हैं, ताकि पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच तैयारी के लिए समय निकाला जा सके। सबसे अधिक परेशानी 45 से 55 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षकों को हो रही है। इनमें कई शिक्षक मृतक आश्रित कोटे से नियुक्त हुए थे, जबकि कुछ इंटरमीडिएट योग्यता के आधार पर सेवा में आए थे। शिक्षकों का कहना है कि वर्ष 2010 तक नियुक्ति के समय टीईटी अनिवार्य नहीं था, ऐसे में अब नियम बदलने से उनके सामने कठिनाई खड़ी हो गई है।
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पांच वर्ष सेवा शेष वाले शिक्षकों को राहत
कोर्ट ने उन शिक्षकों को राहत दी है, जिनकी सेवा के केवल पांच वर्ष शेष हैं। ऐसे शिक्षकों को टीईटी से छूट प्रदान की गई है। बाकी शिक्षकों के लिए दो वर्षों के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा।

जिले में करीब तीन हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक टीईटी नहीं किया है। कुछ शिक्षक परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, इसकी जानकारी विभाग को मिली है। --उपासना रानी वर्मा, बीएसए।
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