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Hapur News: फर्जी खरीद-बिक्री और बोगस आईटीसी से चार करोड़ की कर चोरी
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बुलंदशहर रोड स्थित आवास विकास कॉलोनी में फर्म की जांच करती जीएसटी एसआईबी की टीम। स्रोत: विभाग
हापुड़। शहर के बुलंदशहर रोड स्थित आवास विकास कॉलोनी में संचालित एक फर्म की जांच में करीब चार करोड़ रुपये की कर चोरी का मामला सामने आया है। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) की जांच में फर्म द्वारा फर्जी खरीद-बिक्री के दस्तावेजों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने और करमुक्त बिक्री के नाम पर टैक्स चोरी किए जाने का खुलासा हुआ है। जांच में तमिलनाडु की 11 बोगस और अस्तित्वहीन फर्मों से 1.36 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी लेने का मामला भी सामने आया है।
शहर के बुलंदशहर रोड स्थित आवास विकास कॉलोनी में मोहम्मद खालिद एंड सन्स नाम की फर्म संचालित है। यह फर्म केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के अंतर्गत हापुड़ में पंजीकृत है और एनिमल मीट, टैलो और बोन मील आदि वस्तुओं का कारोबार करती है।
एसआईबी के संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह, उपायुक्त विमल कुमार, राज्य कर अधिकारी सतीश कुमार तिवारी और हरिशंकर शिवहरे की टीम जांच के लिए फर्म के प्रतिष्ठान पर पहुंची। जांच के दौरान व्यापार स्थल एक आवासीय परिसर में मिला। मौके पर माल का कोई स्टॉक नहीं पाया गया। वहां केवल खरीद-बिक्री से संबंधित अभिलेख मौजूद थे।
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फर्म स्वामी मोहम्मद अमजद ने अधिकारियों को बताया कि उनकी फर्म तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों से माल खरीदती है और वहीं से बिल-टू-शिप-टू व्यवस्था के तहत बिक्री करती है। हालांकि, अधिकारियों ने जब अभिलेखों और बिलों का मिलान किया तो उनके दावों की पुष्टि नहीं हुई।
रिकॉर्ड में एनिमल फैट और टैलो की डिलीवरी हापुड़ स्थित व्यापार स्थल पर दिखाई गई थी, जबकि वास्तविक रूप से माल यहां नहीं पहुंच रहा था। आरोप है कि केवल बिल जारी कर कागजों में खरीद-बिक्री का लेनदेन दर्शाया जा रहा था।
ई-वे बिल पोर्टल पर वाहनों की आवाजाही की जांच करने पर भी तमिलनाडु, बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली से हापुड़ तक माल पहुंचाने वाले वाहनों का मूवमेंट नहीं मिला। इससे फर्जी खरीद-बिक्री के दस्तावेजों के आधार पर आईटीसी का लाभ लेने और कारोबार का टर्नओवर दर्शाने का मामला सामने आया।
करमुक्त बिक्री के बिल भी नहीं दिखा सके
जांच में वर्ष 2024-25 के दौरान 15.06 करोड़ रुपये के एनिमल फैट और टैलो की खरीद के सापेक्ष 8.78 करोड़ रुपये की बिक्री घोषित मिली। वहीं, वर्ष 2025-26 में 5.72 करोड़ रुपये की खरीद के मुकाबले महज 1.14 करोड़ रुपये की बिक्री दिखाई गई। शेष माल की बिक्री के संबंध में व्यापारी कोई विवरण प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके अलावा, फर्म ने बड़ी मात्रा में करमुक्त बिक्री भी दर्शाई थी। अधिकारियों ने वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान की गई करमुक्त बिक्री के बिल मांगे, लेकिन व्यापारी मौके पर कोई बिल प्रस्तुत नहीं कर सका। जांच में वर्ष 2024-25 के दौरान तमिलनाडु की 11 बोगस और अस्तित्वहीन फर्मों से 1.36 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी प्राप्त करने का मामला भी सामने आया। इसके अतिरिक्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 39.76 लाख रुपये की अतिरिक्त आईटीसी अपने रिटर्न में क्लेम कर कर देयता समायोजित किए जाने की बात भी सामने आई। संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह ने बताया कि जांच में प्रथम दृष्टया करीब चार करोड़ रुपये के कर अपवंचन का मामला प्रकाश में आया है। फर्म के खाते में शेष आठ लाख रुपये की आईटीसी को विभाग के खाते में रिवर्स कराया गया है। मामले में फर्म के खिलाफ अग्रिम जांच जारी है।
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शहर के बुलंदशहर रोड स्थित आवास विकास कॉलोनी में मोहम्मद खालिद एंड सन्स नाम की फर्म संचालित है। यह फर्म केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के अंतर्गत हापुड़ में पंजीकृत है और एनिमल मीट, टैलो और बोन मील आदि वस्तुओं का कारोबार करती है।
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एसआईबी के संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह, उपायुक्त विमल कुमार, राज्य कर अधिकारी सतीश कुमार तिवारी और हरिशंकर शिवहरे की टीम जांच के लिए फर्म के प्रतिष्ठान पर पहुंची। जांच के दौरान व्यापार स्थल एक आवासीय परिसर में मिला। मौके पर माल का कोई स्टॉक नहीं पाया गया। वहां केवल खरीद-बिक्री से संबंधित अभिलेख मौजूद थे।
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फर्म स्वामी मोहम्मद अमजद ने अधिकारियों को बताया कि उनकी फर्म तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों से माल खरीदती है और वहीं से बिल-टू-शिप-टू व्यवस्था के तहत बिक्री करती है। हालांकि, अधिकारियों ने जब अभिलेखों और बिलों का मिलान किया तो उनके दावों की पुष्टि नहीं हुई।
रिकॉर्ड में एनिमल फैट और टैलो की डिलीवरी हापुड़ स्थित व्यापार स्थल पर दिखाई गई थी, जबकि वास्तविक रूप से माल यहां नहीं पहुंच रहा था। आरोप है कि केवल बिल जारी कर कागजों में खरीद-बिक्री का लेनदेन दर्शाया जा रहा था।
ई-वे बिल पोर्टल पर वाहनों की आवाजाही की जांच करने पर भी तमिलनाडु, बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली से हापुड़ तक माल पहुंचाने वाले वाहनों का मूवमेंट नहीं मिला। इससे फर्जी खरीद-बिक्री के दस्तावेजों के आधार पर आईटीसी का लाभ लेने और कारोबार का टर्नओवर दर्शाने का मामला सामने आया।
करमुक्त बिक्री के बिल भी नहीं दिखा सके
जांच में वर्ष 2024-25 के दौरान 15.06 करोड़ रुपये के एनिमल फैट और टैलो की खरीद के सापेक्ष 8.78 करोड़ रुपये की बिक्री घोषित मिली। वहीं, वर्ष 2025-26 में 5.72 करोड़ रुपये की खरीद के मुकाबले महज 1.14 करोड़ रुपये की बिक्री दिखाई गई। शेष माल की बिक्री के संबंध में व्यापारी कोई विवरण प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके अलावा, फर्म ने बड़ी मात्रा में करमुक्त बिक्री भी दर्शाई थी। अधिकारियों ने वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान की गई करमुक्त बिक्री के बिल मांगे, लेकिन व्यापारी मौके पर कोई बिल प्रस्तुत नहीं कर सका। जांच में वर्ष 2024-25 के दौरान तमिलनाडु की 11 बोगस और अस्तित्वहीन फर्मों से 1.36 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी प्राप्त करने का मामला भी सामने आया। इसके अतिरिक्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 39.76 लाख रुपये की अतिरिक्त आईटीसी अपने रिटर्न में क्लेम कर कर देयता समायोजित किए जाने की बात भी सामने आई। संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह ने बताया कि जांच में प्रथम दृष्टया करीब चार करोड़ रुपये के कर अपवंचन का मामला प्रकाश में आया है। फर्म के खाते में शेष आठ लाख रुपये की आईटीसी को विभाग के खाते में रिवर्स कराया गया है। मामले में फर्म के खिलाफ अग्रिम जांच जारी है।