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मौत का एक्सप्रेस-वे : दो साल में 50 की मौत, 1500 से ज्यादा घायल, हर दिन हो रहे 4 हादसे
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पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित पुलिस बूथ के पास जोर आजमाईस करते सांड। संवाद
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जौनपुर। बीते कुछ दिनों से हाईवे पर दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ गई है। इसके अलग-अलग कई कारण हैं। हालांकि, कागजों में ज्यादातर दुर्घटनाओं को तेज रफ्तार, अनियंत्रित वाहन और चालकों के नशे में होने की प्रकुख वजह बताई गई है। रविवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम जौनपुर जिले को विभिन्न जिले से जोड़ने वाले हाईवे पर निकली तो पता चला कि मौत के एक्सप्रेस-वे पर छुट्टा पशुओं का कब्जा है। यही मूल कारण है हाईवे पर दुर्घटनाओं का। यह स्थिति तब है जब बीते दो सालों में 50 से ज्यादा मौतें और 1500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक जिले के 77 गोशालाओं में 11,507 गोवंशों को संरक्षित होने का दावा विभाग की ओर से किया गया है।
इन स्थानों पर हुए हादसे
-
12 मार्च को देवकली गांव में पशुओं के सड़क पर बैठे होने के कारण पूर्वांचल विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय में कार्यरत संतोष कुमार पांडेय (53) की हादसे में मौत हो गई थी।
- 21 मार्च को नेवढ़िया थाना क्षेत्र के दौड़ी गांव निवासी किसान रामदुलार गौतम (70) की खेत देखने के दौरान सांड के हमले में मौत हो गई थी।
इन जगहों पर बैठे रहते हैं छुट्टा पशु
सद्भावना पुल, मछलीशहर, पड़ाव बाबा जी की कुटिया, किला रोड, कोतवाली, सब्जी मंडी, जेसीज चौराहा सहित अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में छुट्टा पशुओं के कारण यातायात व्यवस्था बेपटरी हो गई है। शहर में हर दिन तीन से चार हादसे हो रहे हैं।
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केस 1
गर्दन में लगे आठ टांके, घर छोड़ मुंबई गए
मछलीशहर के गोहका गांव निवासी अलगू तिवारी (80) के घर जाने पर पता चला कि वे अब मुंबई में रहते हैं। फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि 24 मई को घर के बाहर गाय बांधने जा रहे थे। तभी सांड़ ने हमला कर दिया। गर्दन में चोट आई। आठ टांके लगाने पड़े। घटना के बाद वे गांव छोड़कर मुंबई में रहने लगे हैं।
केस : 2
इलाज में दो लाख खर्च हो गए
राष्ट्रीय राजमार्ग 731 के अलावा ग्रामीण सड़कों पर भी छुट्टा पशुओं की संख्या बढ़ी है। भटेहरा गांव निवासी रिटायर्ड शिक्षक रामफेर पांडेय ने बताया कि एक साल पहले प्रयागराज शाहगंज मार्ग के घनश्यामपुर बाजार में छुट्टा पशुओं के हमले से वे घायल हो गए थे। कूल्हा टूट गया था। पांच महीने से बिस्तर पर हैं। दो लाख रुपए उपचार में खर्च हो गए हैं।
केस 3
मॉर्निंग वॉक के दौरान सांड ने किया हमला
मड़ियाहूं में बीते सप्ताह मॉर्निंग वॉक पर निकले एक दीवान पर भी सांड ने हमला कर घायल कर दिया। हालांकि, अब उन्हें आराम है। इसी तरह शहर में मॉर्निंग वॉक निकलने वाले लोग भी भयभीत हैं।
शहर से लेकर हाईवे तक छुट्टा पशुओं के झुंड शाम होते ही सड़क पर बैठ जाते हैं। वाहन चलाते समय डर बना रहता है। कई बार लोग पशुओं को बचाने के प्रयास में दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं। प्रशासन को नियमित अभियान चलाना चाहिए।
- डॉ. मनोज वत्स
सुबह-शाम मॉर्निंग वॉक करने में डर लगने लगा है। पहले कॉलोनी में कभी-कभार दो-चार पशु दिख जाते थे, लेकिन अब तो झुंड में दिखते हैं। सड़क पर तो इनकी संख्या देखकर डर लगता है।
- आद्या शंकर उपाध्याय
सभी बीडीओ, सचिव और प्रधान को जिम्मेदारी दी गई है कि वे छुट्टा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं तक पहुंचाए। इसके लिए उन्हें निर्देशित किया गया है। समस्या बढ़ी है तो इसे फिर से दिखवाया जा रहा है। - डॉ. संजय कुमार, प्रभारी सीवीओ
सौ से ज्यादा लोगों को नोटिस जारी किया जा चुका है। ये पशु पालतू भी हैं, जिन्हें लोग छोड़ दिए हैं। रोजाना दो-चार पशु पकड़े जा रहे हैं। पशुओं को पकड़ने के लिए हमारे पास दो कैट कैचर हैं। - धर्मराज राम, ईओ, नगर पालिका, जौनपुर
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इन स्थानों पर हुए हादसे
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12 मार्च को देवकली गांव में पशुओं के सड़क पर बैठे होने के कारण पूर्वांचल विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय में कार्यरत संतोष कुमार पांडेय (53) की हादसे में मौत हो गई थी।
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- 21 मार्च को नेवढ़िया थाना क्षेत्र के दौड़ी गांव निवासी किसान रामदुलार गौतम (70) की खेत देखने के दौरान सांड के हमले में मौत हो गई थी।
इन जगहों पर बैठे रहते हैं छुट्टा पशु
सद्भावना पुल, मछलीशहर, पड़ाव बाबा जी की कुटिया, किला रोड, कोतवाली, सब्जी मंडी, जेसीज चौराहा सहित अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में छुट्टा पशुओं के कारण यातायात व्यवस्था बेपटरी हो गई है। शहर में हर दिन तीन से चार हादसे हो रहे हैं।
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केस 1
गर्दन में लगे आठ टांके, घर छोड़ मुंबई गए
मछलीशहर के गोहका गांव निवासी अलगू तिवारी (80) के घर जाने पर पता चला कि वे अब मुंबई में रहते हैं। फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि 24 मई को घर के बाहर गाय बांधने जा रहे थे। तभी सांड़ ने हमला कर दिया। गर्दन में चोट आई। आठ टांके लगाने पड़े। घटना के बाद वे गांव छोड़कर मुंबई में रहने लगे हैं।
केस : 2
इलाज में दो लाख खर्च हो गए
राष्ट्रीय राजमार्ग 731 के अलावा ग्रामीण सड़कों पर भी छुट्टा पशुओं की संख्या बढ़ी है। भटेहरा गांव निवासी रिटायर्ड शिक्षक रामफेर पांडेय ने बताया कि एक साल पहले प्रयागराज शाहगंज मार्ग के घनश्यामपुर बाजार में छुट्टा पशुओं के हमले से वे घायल हो गए थे। कूल्हा टूट गया था। पांच महीने से बिस्तर पर हैं। दो लाख रुपए उपचार में खर्च हो गए हैं।
केस 3
मॉर्निंग वॉक के दौरान सांड ने किया हमला
मड़ियाहूं में बीते सप्ताह मॉर्निंग वॉक पर निकले एक दीवान पर भी सांड ने हमला कर घायल कर दिया। हालांकि, अब उन्हें आराम है। इसी तरह शहर में मॉर्निंग वॉक निकलने वाले लोग भी भयभीत हैं।
शहर से लेकर हाईवे तक छुट्टा पशुओं के झुंड शाम होते ही सड़क पर बैठ जाते हैं। वाहन चलाते समय डर बना रहता है। कई बार लोग पशुओं को बचाने के प्रयास में दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं। प्रशासन को नियमित अभियान चलाना चाहिए।
- डॉ. मनोज वत्स
सुबह-शाम मॉर्निंग वॉक करने में डर लगने लगा है। पहले कॉलोनी में कभी-कभार दो-चार पशु दिख जाते थे, लेकिन अब तो झुंड में दिखते हैं। सड़क पर तो इनकी संख्या देखकर डर लगता है।
- आद्या शंकर उपाध्याय
सभी बीडीओ, सचिव और प्रधान को जिम्मेदारी दी गई है कि वे छुट्टा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं तक पहुंचाए। इसके लिए उन्हें निर्देशित किया गया है। समस्या बढ़ी है तो इसे फिर से दिखवाया जा रहा है। - डॉ. संजय कुमार, प्रभारी सीवीओ
सौ से ज्यादा लोगों को नोटिस जारी किया जा चुका है। ये पशु पालतू भी हैं, जिन्हें लोग छोड़ दिए हैं। रोजाना दो-चार पशु पकड़े जा रहे हैं। पशुओं को पकड़ने के लिए हमारे पास दो कैट कैचर हैं। - धर्मराज राम, ईओ, नगर पालिका, जौनपुर