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प्रेमचंद का साहित्य भारतीय ग्रामीण जीवन का जीवंत दस्तावेज़ : प्रो. रेनू सिंह

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 13 Apr 2026 01:30 AM IST
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Premchand's literature is a vivid document of Indian rural life: Prof. Renu Singh
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जलालपुर। बयालसी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार देर शाम हिंदी साहित्य के कालजयी कथाकार मुंशी प्रेमचंद के साहित्य और उनके प्रसिद्ध उपन्यास गोदान की प्रासंगिकता पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की मुख्य वक्ता प्रो. रेनू सिंह अधिष्ठाता मानविकी एवं भाषा संकाय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल कहानी नहीं, बल्कि भारतीय ग्रामीण परिवेश का यथार्थ चित्रण है। उन्होंने विशेष रूप से गोदान की सामाजिक-आर्थिक कड़ियों को जोड़ते हुए बताया कि होरी की त्रासदी आज भी किसी न किसी रूप में समाज में विद्यमान है, जो प्रेमचंद के लेखन को उतना ही सार्थक बनाता है। डॉ. चंद्रभूषण त्रिपाठी ने गोदान के विविध आयामों पर चर्चा की। प्रो. बृजेश मिश्र ने साहित्य के क्षेत्र में हो रहे नए बदलावों के बारे में बताया। प्राचार्य एवं संरक्षिका प्रो. अलकेश्वरी सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छात्र-छात्राओं को प्रेमचंद के आदर्शों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। संचालन हिंदी विभाग के प्रभारी व संयोजक डॉ. अंशुमान सिंह ने किया। मौके पर डॉ. प्रदीप यादव, प्रो. प्रतिभा सिंह, डॉ. अखिलेश चंद सेठ, डॉ. जगत नारायण सिंह, डॉ. आशुतोष पांडेय, सफीउल्लाह अंसारी, श्री कृष्णा सिंह आदि उपस्थित रहे।
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