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Mathura News: अपनों से लिपट आंखें हुईं नम, खौफ बरकरार
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मथुरा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट के बीच राहत की खबर है। करीब 50 मथुरावासी घर लौट आए हैं। वापसी की खुशी उनके चेहरों पर साफ दिख रही है, वहीं उन्होंने पिछले कुछ दिनों में वहां महसूस किया उसका खौफ भी अभी तक उनकी आंखों में बरकरार है।घर आने के बाद अपनों को गले लगाकर प्रवासियों की आंखें नम हो गईं।
दुबई से लौटे प्रवासियों ने बताया कि वहां स्थिति अब पहले जैसी सामान्य नहीं रह गई है। गौरव चतुर्वेदी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, दिन तो जैसे-तैसे कट जाता था लेकिन रातें खौफनाक होती थीं। आसमान में ड्रोन और मिसाइलों की आवाजें और अचानक बजने वाले सुरक्षा सायरन दिल की धड़कनें बढ़ा देते थे। घबराहट के कारण कई-कई रातों तक नींद नहीं आई। वहां के शासन-प्रशासन द्वारा लगातार सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। लोगों को सख्त चेतावनी दी जा रही है कि वे बिना किसी कार्य के घरों या हॉस्टल्स से बाहर न निकलें। भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचने और हमेशा सतर्क रहने की हिदायत दी गई।
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अपनों के बीच सुकून, साथियों की चिंता
मथुरा के गगन, अशीष, अनमोल, सुमित, आनंद चतुर्वेदी, आदविक चतुर्वेदी, स्वाती, अमन सरदार, सीरी चतुर्वेदी और अभिषेक समेत करीब 50 लोग इस सप्ताह दुबई से लौटे हैं। हालांकि उन्हें साथियों और सहकर्मियों की चिंता सता रही है जो अभी भी वहां फंसे हुए हैं। भारत सरकार और संबंधित दूतावास भी स्थिति पर नजर रखे हुए है।
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ये बोले प्रवासी
वह रविवार को मथुरा आए हैं। सुरक्षा कारणों से एक निश्चित समय पर दुबई से यात्री विमान उड़़ान भर रहे हैं। दुबई में रहते हुए उन्हें लगातार सुरक्षा की चिंता सता रही थी। घर लौटने पर राहत की सांस ली है, वह 25 दिन बाद फिर दुबई जाएंगे। -लव चतुर्वेदी, सीए
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दिन तो जैसे-तैसे कट जाता था लेकिन रात में आसमान में ड्रोन और मिसाइलों की आवाज से धड़कनें बढ़ जाती थी। अमेरिका के दूतावास पर हमला होने के बाद सुरक्षा की ज्यादा चिंता होने लगी थी। घर लौटने के बाद राहत की सांस ली है। -शशीकांत चतुर्वेदी, सीए
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मंगलवार रात को दुबई से मथुरा पहुंचुंगा। युद्ध ने वहां के सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। हम लोग कमरों में कैद रहने को मजबूर थे। भारतीय दूतावास और वहां की सरकार लगातार अपडेट्स दे रही थी, धमाकों की आवाज रूह कंपा देने वाली है। -श्रीकांत चतुर्वेदी
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दुबई से लौटे प्रवासियों ने बताया कि वहां स्थिति अब पहले जैसी सामान्य नहीं रह गई है। गौरव चतुर्वेदी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, दिन तो जैसे-तैसे कट जाता था लेकिन रातें खौफनाक होती थीं। आसमान में ड्रोन और मिसाइलों की आवाजें और अचानक बजने वाले सुरक्षा सायरन दिल की धड़कनें बढ़ा देते थे। घबराहट के कारण कई-कई रातों तक नींद नहीं आई। वहां के शासन-प्रशासन द्वारा लगातार सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। लोगों को सख्त चेतावनी दी जा रही है कि वे बिना किसी कार्य के घरों या हॉस्टल्स से बाहर न निकलें। भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचने और हमेशा सतर्क रहने की हिदायत दी गई।
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अपनों के बीच सुकून, साथियों की चिंता
मथुरा के गगन, अशीष, अनमोल, सुमित, आनंद चतुर्वेदी, आदविक चतुर्वेदी, स्वाती, अमन सरदार, सीरी चतुर्वेदी और अभिषेक समेत करीब 50 लोग इस सप्ताह दुबई से लौटे हैं। हालांकि उन्हें साथियों और सहकर्मियों की चिंता सता रही है जो अभी भी वहां फंसे हुए हैं। भारत सरकार और संबंधित दूतावास भी स्थिति पर नजर रखे हुए है।
ये बोले प्रवासी
वह रविवार को मथुरा आए हैं। सुरक्षा कारणों से एक निश्चित समय पर दुबई से यात्री विमान उड़़ान भर रहे हैं। दुबई में रहते हुए उन्हें लगातार सुरक्षा की चिंता सता रही थी। घर लौटने पर राहत की सांस ली है, वह 25 दिन बाद फिर दुबई जाएंगे। -लव चतुर्वेदी, सीए
दिन तो जैसे-तैसे कट जाता था लेकिन रात में आसमान में ड्रोन और मिसाइलों की आवाज से धड़कनें बढ़ जाती थी। अमेरिका के दूतावास पर हमला होने के बाद सुरक्षा की ज्यादा चिंता होने लगी थी। घर लौटने के बाद राहत की सांस ली है। -शशीकांत चतुर्वेदी, सीए
मंगलवार रात को दुबई से मथुरा पहुंचुंगा। युद्ध ने वहां के सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। हम लोग कमरों में कैद रहने को मजबूर थे। भारतीय दूतावास और वहां की सरकार लगातार अपडेट्स दे रही थी, धमाकों की आवाज रूह कंपा देने वाली है। -श्रीकांत चतुर्वेदी