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Mathura News: सिलाई व कढ़ाई छोड़ ड्रोन तकनीकि सीख रहीं छात्राएं
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आईटीआई कॉलेज में सर्किट के बारे में छात्राओं को बताते हुए अनुदेशक।
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मथुरा। छात्राएं कौशल विकास से जरिए खुद को तराशने में जुटी हुई हैं। अब वह सिलाई-कढ़ाई-बुनाई के बजाए मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और ड्रोन तकनीकि सीख रही हैं।
जिले के चार राजकीय आईटीआई कॉलेजों में छात्राओं की कुल संख्या 1290 तक पहुंच गई है। मथुरा, गोवर्धन, नंदगांव और बलदेव में स्थित आईटीआई कॉलेजों में छात्राएं स्मार्ट बोर्ड की मदद से इलेक्ट्रिकल ट्रेड की पढ़ाई कर रही हैं। वहीं वीडियो के माध्यम से विषय को बेहतर ढंग से समझ रही हैं।
कभी छात्राओं के लिए कॉस्मेटोलॉजी, फैशन डिजाइनिंग, स्टेनोग्राफर, कंप्यूटर ऑपरेटर, प्रोग्रामिंग असिस्टेंट और ड्रेस डिजाइनिंग आदि ट्रेड को उपयुक्त माना जाता था। सरकार के प्रोत्साहन के बाद अब यह छात्राएं मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, व्हीकल मैकेनिकल, ऑफिस असिस्टेंट और ड्रोन तकनीशियन जैसे ट्रेड में रुचि ले रही हैं। शिक्षकों का कहना है कि टेक्निकल यूनिट में 20 से 25 फीसदी दाखिले छात्राओं के हो रहे हैं।
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तकनीकी कोर्स में छात्राओं के दाखिले बढ़े हैं। सिलाई-कढ़ाई से ज्यादा छात्राओं को फिटर और इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में भविष्य दिख रहा है। जनपद में आईटीआई कॉलेजों के साथ 18 कौशल विकास केंद्र भी हैं। छात्राओं को आईटीआई करने के बाद रेलवे से लेकर निजी कंपनी तक में नौकरी मिल रही है। -किशन स्वरूप, प्रधानाचार्य, नोडल अधिकारी, आईटीआई कॉलेज
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जिले के चार राजकीय आईटीआई कॉलेजों में छात्राओं की कुल संख्या 1290 तक पहुंच गई है। मथुरा, गोवर्धन, नंदगांव और बलदेव में स्थित आईटीआई कॉलेजों में छात्राएं स्मार्ट बोर्ड की मदद से इलेक्ट्रिकल ट्रेड की पढ़ाई कर रही हैं। वहीं वीडियो के माध्यम से विषय को बेहतर ढंग से समझ रही हैं।
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कभी छात्राओं के लिए कॉस्मेटोलॉजी, फैशन डिजाइनिंग, स्टेनोग्राफर, कंप्यूटर ऑपरेटर, प्रोग्रामिंग असिस्टेंट और ड्रेस डिजाइनिंग आदि ट्रेड को उपयुक्त माना जाता था। सरकार के प्रोत्साहन के बाद अब यह छात्राएं मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, व्हीकल मैकेनिकल, ऑफिस असिस्टेंट और ड्रोन तकनीशियन जैसे ट्रेड में रुचि ले रही हैं। शिक्षकों का कहना है कि टेक्निकल यूनिट में 20 से 25 फीसदी दाखिले छात्राओं के हो रहे हैं।
तकनीकी कोर्स में छात्राओं के दाखिले बढ़े हैं। सिलाई-कढ़ाई से ज्यादा छात्राओं को फिटर और इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में भविष्य दिख रहा है। जनपद में आईटीआई कॉलेजों के साथ 18 कौशल विकास केंद्र भी हैं। छात्राओं को आईटीआई करने के बाद रेलवे से लेकर निजी कंपनी तक में नौकरी मिल रही है। -किशन स्वरूप, प्रधानाचार्य, नोडल अधिकारी, आईटीआई कॉलेज