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जवाहर बाग कांड: 2 जून 2016 की काली शाम, मारे गए थे 27 लोग; मौत का वो मंजर जिसे याद कर सिहर उठते हैं लोग

संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 02 Jun 2026 01:21 PM IST
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सार

मथुरा के जवाहरबाग कांड को 10 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन उस खौफनाक हिंसा की यादें और अनसुलझे सवाल आज भी लोगों को परेशान करते हैं। इस मामले में पुलिस अधिकारियों के बलिदान और लंबे कानूनी संघर्ष के बावजूद न्याय की प्रक्रिया अब भी अदालत में लंबित है।

Mathura Jawahar Bagh Clash: A Decade Later Questions Still Unanswered
जवाहर बाग कांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

दो जून 2016 की वो काली शाम जब हिंसा की आग में मथुरा का जवाहर बाग जल उठा था। आज उस वाकये को दस साल पूरे हो गए हैं पर उस मंजर को याद कर आज भी लोग सहम उठते हैं। हर तरफ भगदड़, घबराहट, जिंदगी बचाने की जद्दोजहद थी। यहां हुई हिंसा में दो पुलिस अधिकारी बलिदान हो गए थे और कई कब्जाधारी भी मारे गए थे। अदालत में इंसाफ के लिए जद्दोजहद चल रही है।
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मार्च 2014 में मध्य प्रदेश के सागर जिले से दिल्ली के लिए एक-डेढ़ हजार लोगों के साथ निकले स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह संगठन के स्वयंभू अध्यक्ष रामवृक्ष यादव ने जवाहर बाग में दो दिन ठहरने की अनुमति प्रशासन से ली थी। वह बाग में रुका पर इसके बाद यहां से नहीं गया। 280 एकड़ के जवाहरबाग पर कब्जा करके अपनी समानांतर सत्ता चलाने लगा तो मामला कोर्ट में पहुंचा। कोर्ट ने जवाहर बाग को खाली करने के आदेश जारी कर दिए।

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दो जून 2016 को तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी कई थानों की पुलिस के साथ रामवृक्ष यादव को समझाने पहुंचे थे। रामवृक्ष यादव और उसके समर्थकों ने पुलिस के ऊपर हमला कर दिया था। एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और फरह थाना प्रभारी संतोष कुमार यादव की कब्जाधारियों ने हत्या कर दी। हिंसा में 27 कब्जाधारी भी मारे गए थे। अहम बात यह थी कि रामवृक्ष और उसके समर्थकों ने बाग में बड़ी संख्या में असलहे, गैस सिलिंडर व हैंड ग्रेनेड इकट्ठा कर रखे थे। सबका प्रयोग हुआ। आगजनी हुई और जमकर रक्तपात हुआ। इसके बाद पुलिस ने 305 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

 
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हीलाहवाली के बाद हुई सीबीआई की जांच
शुरूआत में इस हिंसा की जांच बेहद सुस्त तरीके से हुई थी। पहले तो पुलिस ने ही हीलाहवाली की, लेकिन बाद में मामला ऊपर तक गया तो 22 मार्च 2017 को पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपी गई। इसके लगभग साढे छह साल बाद 7 दिसंबर 2022 को सीबीआई ने गाजियाा की सीबाईआई कोर्ट में इस प्रकरण की चार्जशीट दाखिल की। इसमें रामवृक्ष समेत 800 लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास, बलवा आदि के आरोप दर्ज किए गए। गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई अदालत में घटना के लगभग 10 साल बीतने के बाद भी मामला विचाराधीन है।
 

बार बार सुलगता है एक सवाल.....रामवृक्ष जिंदा तो नहीं
हालांकि सिस्टम रामवृक्ष यादव की मौत की पुष्टि कर चुका है लेकिन यह सवाल बार बार उठता है कि कहीं रामवृक्ष जिंदा तो नहीं है। वह बवाल के दौरान निकल तो नहीं भागा। दरअसल शुरुआती जांच के लिए जवाहर बाग में मिले रामवृक्ष के शव के अवशेषों का मिलान उसके बेटों के ब्लड सैंपल से कराने के लिए हैदराबाद की फॉरेंसिक लैब भेजा गया था। अप्रैल 2017 में आई शुरुआती रिपोर्ट में डीएनए मैच नहीं हुआ था । इस रिपोर्ट के बाद हड़कंप मच गया और लोगों ने दावा करना शुरू कर दिया कि वह जिंदा है और पुलिस की गिरफ्त से भाग चुका है। जब मामला सीबीआई के हाथ में गया, तो एजेंसी ने इस गुत्थी को सुलझाने के लिए गहन वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य जुटाए। लंबी और बारीकी से की गई फॉरेंसिक जांच व दोबारा किए गए डीएनए मिलान के बाद, अप्रैल 2022 में सीबीआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष आधिकारिक पुष्टि की कि जवाहर बाग में मिला वह जला हुआ शव रामवृक्ष यादव का ही था।
 

आज भी जवाहर बाग में गवाही दे रहे हैं जले हुए पेड़ व वाहन
वर्तमान में जवाहर बाग का स्वरूप बदल चुका है। इसका जीर्णोद्धार कर इसे बेहद सुंदर बनाया जा चुका है। नक्षत्र वाटिका, नवग्रह वाटिका और पंचवटी बनाई हैं। कई प्रजातियों के पौधे लगे हैं। झूले, ओपन जिम, नौ किलोमीटर लंबा पाथवे और बाग में महकते रंग-बिरंगे फूलों ने इसका स्वरूप बदल दिया है। बावजूद इसके यहां उस वारदात के दौरान के जले हुए 10 पेड़, कब्जाधरियों के रहने का स्थान, जले हुए दर्जनों वाहन और प्रवेश द्वार के दोनों ओर जले हुए खड़े पेड़ आज भी उस मंजर की गवाही दे रहे हैं। लोग इन्हें देखकर इस घटना को याद कर उठते हैं।

 

ये था घटनाक्रम...कब क्या हुआ

- 1 जून 2016 को जवाहर बाग खाली कराने के लिए प्रशासन ने प्लान बनाया था।
- 2 जून 2016 को जवाहर बाग खाली कराने पहुंचे थे तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी।

- 2 जून 2016 को हुई हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की मौत हो गई।

- 5 जून 2016 को पहुंचे डीजीपी ने कहा था कि रामवृक्ष यादव मारा गया है।

- 6 जून को स्थानीय पुलिस ने भी दावा किया कि रामवृक्ष मारा गया है।

- 10 जून 2016 को शासन ने जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया।

- मार्च 2017 को हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश किए थे।

-वर्तमान में गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई अदालत में मामला विचाराधीन है।
 
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