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पेड़ा: साख गिरी तो एक जिला-एक व्यंजन में नहीं बना सका स्थान
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वृंदावन। कभी धर्म नगरी के प्रसाद के तौर पर पेड़े की खास पहचान हुआ करती थी। मथुरा का पेड़ा अपने नाम से बिकता था। गाय के दूध से बने खोए के पेड़े को मुनाफाखोरी ने खासा नुकसान पहुंचाया। गुणवत्ता में आई गिरावट के कारण मथुरा का पेड़ा एक जिला-एक व्यंजन में भी स्थान नहीं बना सका है, जबकि यहां के व्यवसायी काफी समय से यह मांग कर रहे हैं। एफएसडीए को वृंदावन की दुकानों से लिए पेड़े के नमूनों में चिकनाई ही नहीं मिली। इससे साफ है कि सिंथेटिक दूध से बने खोए से पेड़े तैयार किए जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि बाजार में बिक रहा खोआ अपनी पारंपरिक गुणवत्ता खोता जा रहा है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, खोए में चिकनापन कम होता जा रहा है, जबकि स्टार्च की मात्रा अधिक पाई गई।
एफसीडीए अधिकारियों के अनुसार खोए का वजन बढ़ाने के लिए स्टार्च की मिलावट की जा रही है। इससे खोए की शुद्धता और स्वाद दोनों प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गाय या भैंस के दूध से तैयार होने वाला खोआ मुलायम और चिकना होता है, जबकि अपमिश्रित खोआ रूखा और दानेदार होता है।
मथुरा के मिलावटी पेड़े का मामला राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव भी सदन में उठा चुके हैं तो लोकसभा में भी यह मामला उठाया जा चुका है। वृंदावन में कई संगठन भी मुखर हो चुके हैं, लेकिन मिलावटखोर और खोआ माफिया के तार इतने गहरे जुडे़ हुए हैं कि कुछ दिन की सख्ती के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। हाल के दिनों में शहर के कई प्रतिष्ठानों से नमूने लेकर जांच के लिए भेजे, जिनमें से कई में मिलावट की पुष्टि हुई है। विभाग ने चेतावनी दी है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भी इस मुद्दे को लेकर नाराजगी देखी जा रही है मगर हालात नहीं बदले हैं।
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एफसीडीए अधिकारियों के अनुसार खोए का वजन बढ़ाने के लिए स्टार्च की मिलावट की जा रही है। इससे खोए की शुद्धता और स्वाद दोनों प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गाय या भैंस के दूध से तैयार होने वाला खोआ मुलायम और चिकना होता है, जबकि अपमिश्रित खोआ रूखा और दानेदार होता है।
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मथुरा के मिलावटी पेड़े का मामला राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव भी सदन में उठा चुके हैं तो लोकसभा में भी यह मामला उठाया जा चुका है। वृंदावन में कई संगठन भी मुखर हो चुके हैं, लेकिन मिलावटखोर और खोआ माफिया के तार इतने गहरे जुडे़ हुए हैं कि कुछ दिन की सख्ती के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। हाल के दिनों में शहर के कई प्रतिष्ठानों से नमूने लेकर जांच के लिए भेजे, जिनमें से कई में मिलावट की पुष्टि हुई है। विभाग ने चेतावनी दी है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भी इस मुद्दे को लेकर नाराजगी देखी जा रही है मगर हालात नहीं बदले हैं।