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यूपी: वृंदावन में गूंजा श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश, ‘योगक्षेमं वहाम्यहम्’ पर भावपूर्ण नाट्य मंचन ने मोहा मन
Thu, 29 Oct 2026 02:49 PM IST
Dhirendra Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 29 Oct 2026 02:49 PM IST
सार
वृंदावन के स्वामी श्री हरिदास प्रेक्षागृह में गुरुकुल के बटुकों ने श्रीमद्भगवद्गीता के नवम अध्याय के 22वें श्लोक ‘योगक्षेमं वहाम्यहम्’ पर आधारित प्रेरक नाट्य मंचन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में मयूर नृत्य, डांडिया और महारास की मनोहारी प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर संगीत प्रशिक्षकों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित भी किया गया।
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नाट्य मंचन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
वृंदावन में स्वामी श्री हरिदास प्रेक्षागृह में गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के सहयोग से भगवत प्रेरणा वैदिक विद्यापीठ गुरुकुलम, गोधूलिपुरम के बटुकों ने श्रीमद्भगवद्गीता के नवम अध्याय के 22वें श्लोक पर आधारित एक प्रेरक नाट्य मंचन प्रस्तुत किया। इस आयोजन में गुरुकुल के विद्यार्थियों ने अपने अभिनय के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिए गए गीता के संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं, गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के प्रशिक्षु बालक-बालिकाओं ने मयूर नृत्य, डांडिया और महारास की मनोहारी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
श्लोक का भाव और मंचन
गुरुकुल के बटुकों ने आचार्य राघव शुक्ला शास्त्री के सानिध्य में नाट्य मंचन किया। इस मंचन का आधार गीता के नवम अध्याय का 22वां श्लोक ‘अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥’ था। इस श्लोक के माध्यम से यह समझाया गया कि भगवान श्रीकृष्ण अनन्य भाव से उनकी उपासना करने वाले भक्तों के योगक्षेम का दायित्व स्वयं लेते हैं।
गीता मर्मज्ञ महेश चंद्र शर्मा ने मंचन के भाव को स्पष्ट करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गीता में दिए गए उपदेशों का महत्व शाश्वत है और गीता का प्रत्येक शब्द जीवन के लिए प्रेरणादायी है। मंचन के माध्यम से इन्हीं शिक्षाओं को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के प्रशिक्षुओं ने ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और महारास की परंपरा का सजीव प्रदर्शन किया। श्रीकृष्ण की भूमिका में कु. पूनम और अजय शर्मा ने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया, जबकि राधा की भूमिका में कु. तमन्ना और कु. तान्या सिंह ने नृत्य एवं भावाभिव्यक्ति से प्रस्तुति को और भी आकर्षक बनाया। मयूर नृत्य और डांडिया की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में ब्रज संस्कृति की छटा बिखेरी।
कार्यक्रम में विभिन्न प्रशिक्षुओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में सहभागिता की। संगीत पक्ष में आकाश शर्मा ने हारमोनियम, मनमोहन कौशिक ने सारंगी तथा सुनील पाठक और केशव पाठक ने तबले पर संगत की। कु. मानसी राजपूत ने नृत्य संयोजन एवं कोरियोग्राफी का दायित्व संभाला, जबकि ऋतु सिंह ने मंच निर्देशन और श्रृंगार व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाई।
अतिथियों की उपस्थिति और सम्मान
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि मथुरा-वृंदावन नगर निगम के उपमहापौर मुकेश सारस्वत सहित धर्माचार्य गौरांग दास, साहित्यकार अजीब अंजुम, श्रीमती अंजना अंजुम, श्रीमती संतोष निशा रावत, बांसुरी संस्था के संस्थापक विनय गोस्वामी, गीता मर्मज्ञ महेश चंद्र शर्मा, भाजपा नेत्री पूजा चौधरी और सोनम चौधरी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर संगीत प्रशिक्षकों को उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से अतिथियों ने स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
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श्लोक का भाव और मंचन
गुरुकुल के बटुकों ने आचार्य राघव शुक्ला शास्त्री के सानिध्य में नाट्य मंचन किया। इस मंचन का आधार गीता के नवम अध्याय का 22वां श्लोक ‘अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥’ था। इस श्लोक के माध्यम से यह समझाया गया कि भगवान श्रीकृष्ण अनन्य भाव से उनकी उपासना करने वाले भक्तों के योगक्षेम का दायित्व स्वयं लेते हैं।
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गीता मर्मज्ञ महेश चंद्र शर्मा ने मंचन के भाव को स्पष्ट करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गीता में दिए गए उपदेशों का महत्व शाश्वत है और गीता का प्रत्येक शब्द जीवन के लिए प्रेरणादायी है। मंचन के माध्यम से इन्हीं शिक्षाओं को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी के प्रशिक्षुओं ने ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और महारास की परंपरा का सजीव प्रदर्शन किया। श्रीकृष्ण की भूमिका में कु. पूनम और अजय शर्मा ने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया, जबकि राधा की भूमिका में कु. तमन्ना और कु. तान्या सिंह ने नृत्य एवं भावाभिव्यक्ति से प्रस्तुति को और भी आकर्षक बनाया। मयूर नृत्य और डांडिया की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में ब्रज संस्कृति की छटा बिखेरी।
कार्यक्रम में विभिन्न प्रशिक्षुओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में सहभागिता की। संगीत पक्ष में आकाश शर्मा ने हारमोनियम, मनमोहन कौशिक ने सारंगी तथा सुनील पाठक और केशव पाठक ने तबले पर संगत की। कु. मानसी राजपूत ने नृत्य संयोजन एवं कोरियोग्राफी का दायित्व संभाला, जबकि ऋतु सिंह ने मंच निर्देशन और श्रृंगार व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाई।
अतिथियों की उपस्थिति और सम्मान
कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि मथुरा-वृंदावन नगर निगम के उपमहापौर मुकेश सारस्वत सहित धर्माचार्य गौरांग दास, साहित्यकार अजीब अंजुम, श्रीमती अंजना अंजुम, श्रीमती संतोष निशा रावत, बांसुरी संस्था के संस्थापक विनय गोस्वामी, गीता मर्मज्ञ महेश चंद्र शर्मा, भाजपा नेत्री पूजा चौधरी और सोनम चौधरी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर संगीत प्रशिक्षकों को उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से अतिथियों ने स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।