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आजम खान पर शिकंजा: विवि के निर्माण खर्च में 416 करोड़ का अंतर बना जांच का आधार; फर्जी डोनेशन का जाल

Thu, 15 Oct 2026 04:02 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 15 Oct 2026 04:02 PM IST
सार

रामपुर के जौहर विवि के निर्माण और संचालन को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठाए गए हैं। ईडी के अनुसार, ट्रस्ट के सदस्यों के बयानों से सामने आया कि कार्यकारिणी की बैठकों में उन्हें न तो बुलाया जाता था और न ही निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जाता था।

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Azam Khan Under ED Scanner: ₹416 Crore Gap in Johar University Construction Costs Triggers Probe
सपा नेता आजम खां - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

वरिष्ठ सपा नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच और एफआईआर का मुख्य आधार आयकर विभाग और जिला मूल्यांकन अधिकारी (डीवीओ) की 10 नवंबर 2023 को आई रिपोर्ट बनी। 
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इसमें पहली बार विश्वविद्यालय के निर्माण की कुल लागत और ट्रस्ट के आयकर रिटर्न (आईटीआर) में दर्शाए गए पूंजीगत खर्च के बीच करीब 416 करोड़ रुपये का अंतर बताया गया था। 
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आयकर विभाग और जिला मूल्यांकन अधिकारी (डीवीओ) की 10 नवंबर 2023 की रिपोर्ट में जौहर विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण की लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जबकि ट्रस्ट के आईटीआर में पूंजीगत खर्च केवल 78.32 करोड़ रुपये दिखाया गया। 
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इस तरह 416 करोड़ रुपये से अधिक के खर्च का हिसाब नहीं मिला। इसी तथ्य को आधार बनाकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार साल तक जांच की। जांच एजेंसी ने इस अंतर की जांच के साथ सरकारी धन के कथित डायवर्जन की भी पड़ताल की। 

 

जांच में सामने आया कि विभिन्न माध्यमों से कुल 85.81 करोड़ रुपये (55.8 करोड़ + 23.41 करोड़ + 6.60 करोड़) सरकारी धन से निजी विश्वविद्यालय के निर्माण में खर्च किए जाने का आरोप है। 

 

यह मामला सरकारी पदों के दुरुपयोग, सरकारी धन के निजी विश्वविद्यालय में कथित डायवर्जन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। इन तथ्यों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय और संबंधित जांच एजेंसियां धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) तथा अन्य कानूनी धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई में जुटी हैं। 

जौहर ट्रस्ट की बैठकों में सदस्यों को नहीं बुलाने का आरोप
जौहर विवि के निर्माण और संचालन को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठाए गए हैं। ईडी के अनुसार, ट्रस्ट के सदस्यों के बयानों से सामने आया कि कार्यकारिणी की बैठकों में उन्हें न तो बुलाया जाता था और न ही निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जाता था।

जांच एजेंसी ने दावा किया है कि ट्रस्ट और उसकी वित्तीय गतिविधियों पर आजम खां का नियंत्रण था। ईडी की ओर से डीजीपी को भेजे गए शिकायती पत्र के मुताबिक, मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का उद्घाटन वर्ष 2012 में हुआ था। मोहम्मद आजम खां इसके संस्थापक और कुलाधिपति रहे हैं।

 जांच के दौरान ट्रस्ट के सदस्य मोहम्मद फसीह जैदी, मुश्ताक अहमद सिद्दीकी और जेड. आर. सिद्दीकी ने अपने बयानों में कहा कि उन्हें कार्यकारिणी की किसी बैठक का नोटिस नहीं मिला और न ही उन्होंने बैठकों में लिए गए फैसलों में हिस्सा लिया।

उनके बयानों के आधार पर ईडी ने निष्कर्ष निकाला कि ट्रस्ट के दूसरे सदस्य केवल नाममात्र के ट्रस्टी थे और ट्रस्ट की गतिविधियों पर आजम खां का नियंत्रण था। ईडी ने इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच की है। एजेंसी की ओर से साझा की गई सूचना में ट्रस्ट के संचालन और वित्तीय फैसलों से जुड़े इन तथ्यों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के संज्ञान में लाया गया है। 

सरकारी फंड के डायवर्जन और फर्जी डोनेशन का जाल
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार साल की लंबी जांच के दौरान मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी फंड का डायवर्जन और फर्जी डोनेशन के एक बड़ा जाल सामने आया है, जिसके तहत सरकारी धन संसाधनों का दुरुपयोग करके एक निजी यूनिवर्सिटी में लगाने के कई हथकंडे अपनाए गए हैं।

इसकी पुष्टि ईडी ने अपनी जांच रिपोर्ट में की है। वह भी आजम खां के करीबी कॉन्ट्रैक्टरों के बयानों के आधार पर। आजम खां के इन करीबी कॉन्ट्रैक्टरों ने सरकारी ठेकों, फंड का डायवर्जन और फर्जी डोनेशन के जरिये काले धन को सफेद करना स्वीकार किया है।

ईडी की एफआईआर में दिए आंकड़ों पर नजर डालें तो जौहर यूनिवर्सिटी के लिए पूरी वित्तीय हेराफेरी में इन्हीं तरीकों से की गई। आंकड़े बताते हैं कि आजम खां के करीबी कॉन्ट्रैक्टरों ने कॉन्ट्रैक्ट की धनराशि का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा यूनिवर्सिटी के निर्माण में व्यय किया गया है।

ठेकेदारों ने कमाई का एक हिस्सा ट्रस्ट को दिया
फर्जी डोनेशन का यह खेल आपसी समझौतों के तहत चलाया गया। आजम खान की मदद से सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों ने अपनी कमाई का एक हिस्सा ट्रस्ट को चंदे (डोनेशन) के रूप में वापस लौटाया। उदाहरण के लिए, एएस एंटरप्राइजेज, जिसे जिसे लगभग 25 करोड़ रुपये के ठेके मिले थे, उन्होंने सितंबर 2015 में ट्रस्ट को 40 लाख रुपये का डोनेशन दिया।
 

जांच का शिकंजा कसने के बीच बदली जौहर ट्रस्ट की तस्वीर
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच ट्रस्ट की कार्यकारिणी में भी बदलाव हो चुका है। कभी ट्रस्ट की कमान आजम खां और उनके परिवार के सदस्यों के हाथ में थी, लेकिन अब पदाधिकारियों की तस्वीर बदल चुकी है। ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों, जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च और दान की रकम को लेकर उठे सवालों के बीच यह बदलाव चर्चा में है।

जौहर विश्वविद्यालय के संचालन के लिए गठित ट्रस्ट में पहले आजम खां अध्यक्ष की भूमिका में थे। उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा और परिवार के अन्य सदस्य भी ट्रस्ट में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। बाद में ट्रस्ट की कार्यकारिणी में बदलाव हुआ और कुछ समय पहले निकहत अफलाक को अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने की जानकारी सामने आई। निकहत अफलाक आजम खां की सगी बहन हैं। इस बदलाव के बाद ट्रस्ट के संचालन की जिम्मेदारी नए पदाधिकारियों के हाथ में है। 

शत्रु संपत्ति और किसानों की जमीन हड़पने के मामलों को ईडी ने भी उठाया
ईडी ने अपनी एफआईआर में किसानों की जमीन हड़पने के साथ ही शत्रु संपत्ति के मामलों का भी जिक्र किया है। अजीमनगर थाने में वर्ष 2019 में 27 किसानों ने जौहर यूनिवर्सिटी के लिए डरा धमकाकर जमीन हड़पने का मामला दर्ज कराया था। इस तरह के 27 मामले दर्ज हुए थे। इसके अलावा शत्रु संपत्ति हड़पने के मामले भी अजीमनगर थाने में दर्ज किए गए थे। शत्रु संपत्ति का एक मामला शहर कोतवाली में दर्ज किया गया था। ईडी ने इन सभी मुकदमों का जिक्र अपनी तहरीर में भी किया है। हालांकि, अजीमनगर थाने में सपा नेता आजम खां पर कुल 33 मामले दर्ज हैं।
 

सीके एसोसिएट को मिले थे 186 करोड़ के ठेके
ईडी के अनुसार, सीके एसोसिएट के एमडी पवन कुमार जैन ने 18 सितंबर को पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयान में बताया कि उनकी कंपनी को वर्ष 2013-14 से 2016-17 के बीच करीब 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके मिले थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन ठेकों के लिए खरीदी गई निर्माण सामग्री का एक हिस्सा जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल किया गया। ईडी ने इस मामले में सरकारी ठेकों से प्राप्त धन और उसके इस्तेमाल की जांच के आधार पर सरकारी धन के कथित डायवर्जन का आरोप लगाया है। 

 

आजम खां पर ईडी का मुकदमा राजनीतिक प्रतिशोध : मुस्तफा हुसैन 
जिला पंचायत सदस्य मुस्तफा हुसैन ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां के खिलाफ ईडी द्वारा दर्ज मुकदमे को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। उन्होंने कहा कि आजम खां समाजवादी पार्टी के बड़े नेता हैं। उन्होंने रामपुर को शिक्षा की रोशनी दी है। उन्होंने मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय जैसा बड़ा संस्थान स्थापित किया है। यह हजारों गरीब बच्चों के भविष्य का सहारा है। मुस्तफा हुसैन ने आरोप लगाया कि इसी संस्थान को निशाना बनाकर रामपुर की प्रगति रोकने की साजिश हो रही है। उन्होंने सपा के साथियों से गुटबाजी छोड़कर एकजुट होने और आज़म खां के साथ मजबूती से खड़े होने का आह्वान किया। 
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