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सहारनपुर: दलित सम्मान से जाट अस्मिता तक, आकाश ने चली सियासी चाल, 2027 के फॉर्मूले को आजमाने पर जोर
Tue, 03 Nov 2026 03:56 PM IST
Mohd Mustakim
विनीत तोमर, मेरठ
विनीत तोमर, मेरठ
Published by: Mohd Mustakim
Updated Tue, 03 Nov 2026 03:56 PM IST
सार
सौराना की जनसभा में बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। चवन्नी वाले बयान का मुद्दा उठाकर जाट समाज को संदेश देने का प्रयास किया। वहीं कांग्रेस और भाजपा को एक जैसा बताया।
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आकाश आनंद।
- फोटो : शुभम बंसल
विस्तार
प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। सहारनपुर के सौराना में बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद की सोमवार को हुई जनसभा को पार्टी की राजनीतिक वापसी की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इस बार बसपा 2007 के सामाजिक भाईचारा फॉर्मूले को नए सियासी माहौल में आजमाने की तैयारी में है। जनसभा में दलित सम्मान से लेकर जाट अस्मिता तक के मुद्दे उठाकर आकाश आनंद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है।
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जनसभा में आकाश आनंद ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए उनकी पीडीए राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने अखिलेश को भ्रमित नेता तक बता दिया। आकाश ने चौधरी चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी को लेकर अखिलेश यादव के चवन्नी वाले बयान पर भी आपत्ति जताई। कहा कि चौधरी चरण सिंह के परिवार का अखिलेश यादव के परिवार पर बड़ा अहसान रहा है।
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आकाश आनंद ने इस मुद्दे को दलित सम्मान से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि जो नेता चौधरी चरण सिंह के परिवार का सम्मान नहीं कर सकते, वे अनुसूचित समाज का सम्मान कैसे करेंगे। यह बयान केवल अखिलेश यादव पर हमला नहीं, बल्कि जाट समाज और दलित मतदाताओं के बीच राजनीतिक संवाद स्थापित करने की कोशिश भी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और दलित मतदाताओं का सामाजिक समीकरण कई सीटों पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
कुल मिलाकर बसपा की रणनीति 2007 के भाईचारा फॉर्मूले को दोबारा मजबूत करने की है। उस समय बसपा सुप्रीमो मायावती ने दलितों के साथ ब्राह्मण और अन्य वर्गों को जोड़कर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। अब पार्टी मुस्लिम, पिछड़े और अन्य समाजों को भी साथ लाने की कोशिश में है। जनसभा में आकाश आनंद ने दलित सम्मान, जाट अस्मिता और सामाजिक भाईचारे को एक साथ जोड़कर 2027 की चुनावी राजनीति का संदेश दिया है। अब देखना होगा कि यह सियासी दांव बसपा के पुराने जनाधार को वापस लाने में कितना सफल होता है।
जिले में 23,75,777 मतदाता
जिले की सातों विधानसभा में 2375777 मतदाता हैं, जो 30 सितंबर तक का आंकड़ा है। इसमें बेहट विधानसभा में 348139, नकुड़ 335882, सहारनपुर नगर 390007, सहारनपुर 340592, देवबंद 316439, रामपुर मनिहारान 299670 और गंगोह में 344958 मतदाता हैं। जातिगत तौर पर देखें तो जिले में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। इसके बाद दलित और अन्य जातियों की भी अहम भूमिका रहती है।
जिले की सातों विधानसभा में 2375777 मतदाता हैं, जो 30 सितंबर तक का आंकड़ा है। इसमें बेहट विधानसभा में 348139, नकुड़ 335882, सहारनपुर नगर 390007, सहारनपुर 340592, देवबंद 316439, रामपुर मनिहारान 299670 और गंगोह में 344958 मतदाता हैं। जातिगत तौर पर देखें तो जिले में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। इसके बाद दलित और अन्य जातियों की भी अहम भूमिका रहती है।