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Siddharthnagar News: ठंड में बढ़ा हार्ट अटैक का खतरा, रोज मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे छह से आठ मरीज
Sun, 25 Oct 2026 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:04 AM IST
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मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीज। संवाद
फोटो- है
- ब्लड प्रेशर के मरीज रहें सतर्क, दिल के साथ ब्रेन स्ट्रोक का भी खतरा, विशेषज्ञों ने दवा नियमित लेने की दी सलाह
- सितंबर के दूसरे पखवारे से शुरू हो जाता है जोखिम, ठंड की शुरुआत में लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मौसम में ठंड बढ़ने के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। रक्तचाप में उतार-चढ़ाव दिल और दिमाग की सेहत पर भारी पड़ सकता है। समय रहते सावधानी नहीं बरती तो हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पिछले कुछ दिनों से हार्ट अटैक के छह से आठ मरीज 24 घंटे में पहुंच रहे हैं।
वहीं, मेडिसिन और चेस्ट फिजिशियन की ओपीडी में भी आठ से 10 मरीज ऐसे लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं, जिनमें हृदय संबंधी बीमारी की आशंका रहती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ठंड की शुरुआत में लोग अक्सर जरूरी सावधानी नहीं बरतते, जिससे खतरा बढ़ सकता है।
बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान और मानसिक तनाव के कारण कम उम्र में भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या सामने आ रही है। पहले इसे अधिक उम्र के लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 20 से 22 साल के युवाओं में भी इसके मामले देखने को मिल रहे हैं। ठंड के मौसम में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने से रक्तचाप बढ़ सकता है। ऐसे में पहले से हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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ठंड की शुरुआत में लापरवाही पड़ सकती है भारी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं। इससे रक्तचाप बढ़ सकता है और हृदय पर दबाव पड़ता है। जिन लोगों का ब्लड प्रेशर पहले से अनियंत्रित है, उनमें हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञ सितंबर के दूसरे पखवारे से लेकर अगले तीन-चार महीनों तक विशेष सतर्कता बरतने की सलाह देते हैं। कम ठंड में लोग अक्सर खुद को सुरक्षित मानकर सावधानी नहीं बरतते, जबकि तापमान में बदलाव के दौरान भी रक्तचाप प्रभावित हो सकता है।मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंचने वाले हार्ट अटैक के मरीजों की ईसीजी जांच की जाती है। गंभीर मरीजों को जरूरत के अनुसार बीआरडी मेडिकल कॉलेज और अन्य उच्च चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर किया जाता है। वहीं, प्राथमिक उपचार के बाद स्थिर मरीजों को आगे की जांच और उपचार के लिए विशेषज्ञ से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।
सीने में दर्द को गैस समझकर न करें नजरअंदाज
मेडिसिन और चेस्ट फिजिशियन की ओपीडी में भी ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें शुरुआत में अपने लक्षणों की गंभीरता का अंदाजा नहीं होता। कई लोग सीने में दर्द, जलन, दबाव या सांस फूलने जैसी परेशानी को गैस अथवा सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जांच और चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही बीमारी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाती है।
ठंड में हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ओपीडी में ऐसे मरीज आते हैं, जिनमें दिल की बीमारी से जुड़े लक्षण मिलते हैं, लेकिन वे शुरुआत में इन्हें गंभीरता से नहीं लेते। मरीजों की स्थिति के अनुसार जांच और उपचार किया जाता है। जरूरत पड़ने पर हृदय रोग विशेषज्ञ या उच्च चिकित्सा केंद्र में भेजने की सलाह दी जाती है।
- डॉ. गौरव दुबे, एमडी मेडिसिन
इन लक्षणों को पहचानें, तुरंत लें मदद
सीने में दर्द, दबाव, जकड़न या भारीपन महसूस होना।
दर्द का बांह, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना।
सांस फूलना, ठंडा पसीना आना, मतली या चक्कर महसूस होना।
अचानक चेहरे, हाथ या पैर में कमजोरी, खासकर शरीर के एक तरफ कमजोरी होना।
बोलने में परेशानी, चेहरे का एक तरफ झुकना या अचानक संतुलन बिगड़ना।
नियमित जांच और दवा से कम हो सकता है जोखिम
विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्लड प्रेशर के मरीज नियमित रूप से रक्तचाप की जांच कराएं और चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवाएं लेते रहें। ठंड से बचाव के लिए पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें, संतुलित भोजन करें और अपनी क्षमता के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखें। पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने का प्रयास करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें और न ही उसकी खुराक में बदलाव करें।
विशेषज्ञ की राय
ठंड के मौसम में ब्लड प्रेशर बढ़ने से हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। अनियंत्रित रक्तचाप के कारण शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर असर पड़ता है। यदि सीने में लगातार या असहनीय दर्द हो, सांस लेने में परेशानी हो या दर्द जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैल रहा हो तो तत्काल अस्पताल पहुंचें। अचानक शरीर के एक तरफ कमजोरी या बोलने में परेशानी भी ब्रेन स्ट्रोक का संकेत हो सकती है। ब्लड प्रेशर के मरीज नियमित जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें।
- डॉ. सीबी चौधरी, चेस्ट फिजिशियन, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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- ब्लड प्रेशर के मरीज रहें सतर्क, दिल के साथ ब्रेन स्ट्रोक का भी खतरा, विशेषज्ञों ने दवा नियमित लेने की दी सलाह
- सितंबर के दूसरे पखवारे से शुरू हो जाता है जोखिम, ठंड की शुरुआत में लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मौसम में ठंड बढ़ने के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। रक्तचाप में उतार-चढ़ाव दिल और दिमाग की सेहत पर भारी पड़ सकता है। समय रहते सावधानी नहीं बरती तो हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पिछले कुछ दिनों से हार्ट अटैक के छह से आठ मरीज 24 घंटे में पहुंच रहे हैं।
वहीं, मेडिसिन और चेस्ट फिजिशियन की ओपीडी में भी आठ से 10 मरीज ऐसे लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं, जिनमें हृदय संबंधी बीमारी की आशंका रहती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ठंड की शुरुआत में लोग अक्सर जरूरी सावधानी नहीं बरतते, जिससे खतरा बढ़ सकता है।
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बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान और मानसिक तनाव के कारण कम उम्र में भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या सामने आ रही है। पहले इसे अधिक उम्र के लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 20 से 22 साल के युवाओं में भी इसके मामले देखने को मिल रहे हैं। ठंड के मौसम में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने से रक्तचाप बढ़ सकता है। ऐसे में पहले से हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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ठंड की शुरुआत में लापरवाही पड़ सकती है भारी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं। इससे रक्तचाप बढ़ सकता है और हृदय पर दबाव पड़ता है। जिन लोगों का ब्लड प्रेशर पहले से अनियंत्रित है, उनमें हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञ सितंबर के दूसरे पखवारे से लेकर अगले तीन-चार महीनों तक विशेष सतर्कता बरतने की सलाह देते हैं। कम ठंड में लोग अक्सर खुद को सुरक्षित मानकर सावधानी नहीं बरतते, जबकि तापमान में बदलाव के दौरान भी रक्तचाप प्रभावित हो सकता है।मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंचने वाले हार्ट अटैक के मरीजों की ईसीजी जांच की जाती है। गंभीर मरीजों को जरूरत के अनुसार बीआरडी मेडिकल कॉलेज और अन्य उच्च चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर किया जाता है। वहीं, प्राथमिक उपचार के बाद स्थिर मरीजों को आगे की जांच और उपचार के लिए विशेषज्ञ से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।
सीने में दर्द को गैस समझकर न करें नजरअंदाज
मेडिसिन और चेस्ट फिजिशियन की ओपीडी में भी ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें शुरुआत में अपने लक्षणों की गंभीरता का अंदाजा नहीं होता। कई लोग सीने में दर्द, जलन, दबाव या सांस फूलने जैसी परेशानी को गैस अथवा सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जांच और चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही बीमारी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाती है।
ठंड में हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ओपीडी में ऐसे मरीज आते हैं, जिनमें दिल की बीमारी से जुड़े लक्षण मिलते हैं, लेकिन वे शुरुआत में इन्हें गंभीरता से नहीं लेते। मरीजों की स्थिति के अनुसार जांच और उपचार किया जाता है। जरूरत पड़ने पर हृदय रोग विशेषज्ञ या उच्च चिकित्सा केंद्र में भेजने की सलाह दी जाती है।
- डॉ. गौरव दुबे, एमडी मेडिसिन
इन लक्षणों को पहचानें, तुरंत लें मदद
सीने में दर्द, दबाव, जकड़न या भारीपन महसूस होना।
दर्द का बांह, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना।
सांस फूलना, ठंडा पसीना आना, मतली या चक्कर महसूस होना।
अचानक चेहरे, हाथ या पैर में कमजोरी, खासकर शरीर के एक तरफ कमजोरी होना।
बोलने में परेशानी, चेहरे का एक तरफ झुकना या अचानक संतुलन बिगड़ना।
नियमित जांच और दवा से कम हो सकता है जोखिम
विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्लड प्रेशर के मरीज नियमित रूप से रक्तचाप की जांच कराएं और चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवाएं लेते रहें। ठंड से बचाव के लिए पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें, संतुलित भोजन करें और अपनी क्षमता के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखें। पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने का प्रयास करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें और न ही उसकी खुराक में बदलाव करें।
विशेषज्ञ की राय
ठंड के मौसम में ब्लड प्रेशर बढ़ने से हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। अनियंत्रित रक्तचाप के कारण शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर असर पड़ता है। यदि सीने में लगातार या असहनीय दर्द हो, सांस लेने में परेशानी हो या दर्द जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैल रहा हो तो तत्काल अस्पताल पहुंचें। अचानक शरीर के एक तरफ कमजोरी या बोलने में परेशानी भी ब्रेन स्ट्रोक का संकेत हो सकती है। ब्लड प्रेशर के मरीज नियमित जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें।
- डॉ. सीबी चौधरी, चेस्ट फिजिशियन, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज