{"_id":"6a2db4c8574f7ace2d0c7d84","slug":"targeting-on-nepal-border-bilateral-meeting-on-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1035-159746-2026-06-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: नेपाल सीमा पर निशानदेही की तेज हुई हलचल, 16 को द्विपक्षीय बैठक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: नेपाल सीमा पर निशानदेही की तेज हुई हलचल, 16 को द्विपक्षीय बैठक
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर। इंडो-नेपाल सरहद को लेकर उठे विमर्श के बीच दोनों देशों ने समन्वय बनाकर टूटे पिलर और पोस्ट की मरम्मत करके सीमारेखा तय करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस संयुक्त सर्वे की रूपरेखा तय करने के लिए सिद्धार्थनगर में 16 जून को दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक होगी।
इसमें सीमा निर्धारण और सीमांकन की रूपरेखा तय करने के साथ ही जिले से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के भूगोल, सीमा स्तंभों की स्थिति और संयुक्त सर्वे की कार्ययोजना पर भी सहमति बनाने का प्रयास होगा।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार संयुक्त सर्वे का उद्देश्य सीमा स्तंभों की स्थिति का सत्यापन, क्षतिग्रस्त या गायब खंभों की पहचान और सीमा क्षेत्र से जुड़े भूगोल की वर्तमान स्थिति का आकलन करना है। सर्वे के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई और सीमांकन संबंधी प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।
विज्ञापन
डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने बैठक के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को नामित किया है। भारत की ओर से राजस्व और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में नेपाल के कपिलवस्तु जिले के अधिकारी और सीमा से जुड़ी एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
बैठक में संयुक्त सर्वे की कार्यप्रणाली, सर्वे टीमों की भूमिका और फील्ड स्तर पर किए जाने वाले कार्यों पर विस्तार से चर्चा होगी। कपिलवस्तु, रूपन्देही, नवलपरासी, बांके और बर्दिया से सटी उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, श्रावस्ती, बलरामपुर और बहराइच की सीमा के लिए भी सर्वे होना है।
नेपाल में हाल के दिनों में सीमा प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक सक्रियता दोनों बढ़ी है। संसद/संविधानसभा में प्रधानमंत्री के बयान से सीमा को लेकर नई बहस शुरू हुई थी, जिसके बाद विदेश मंत्री की ओर से जानकारी दी गई कि नेपाल-भारत बॉर्डर मैनेजमेंट पर संयुक्त कार्य समूह (जेडब्लूजी) की बैठक अगस्त 2026 में प्रस्तावित है। साथ ही सीमा स्तंभों की पहचान, मरम्मत और पुनर्स्थापना के लिए चार संयुक्त फील्ड सर्वे टीमें विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं। संवाद
विज्ञापन
इसमें सीमा निर्धारण और सीमांकन की रूपरेखा तय करने के साथ ही जिले से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा के भूगोल, सीमा स्तंभों की स्थिति और संयुक्त सर्वे की कार्ययोजना पर भी सहमति बनाने का प्रयास होगा।
विज्ञापन
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार संयुक्त सर्वे का उद्देश्य सीमा स्तंभों की स्थिति का सत्यापन, क्षतिग्रस्त या गायब खंभों की पहचान और सीमा क्षेत्र से जुड़े भूगोल की वर्तमान स्थिति का आकलन करना है। सर्वे के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई और सीमांकन संबंधी प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।
विज्ञापन
डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने बैठक के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को नामित किया है। भारत की ओर से राजस्व और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में नेपाल के कपिलवस्तु जिले के अधिकारी और सीमा से जुड़ी एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
बैठक में संयुक्त सर्वे की कार्यप्रणाली, सर्वे टीमों की भूमिका और फील्ड स्तर पर किए जाने वाले कार्यों पर विस्तार से चर्चा होगी। कपिलवस्तु, रूपन्देही, नवलपरासी, बांके और बर्दिया से सटी उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, श्रावस्ती, बलरामपुर और बहराइच की सीमा के लिए भी सर्वे होना है।
नेपाल में हाल के दिनों में सीमा प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक सक्रियता दोनों बढ़ी है। संसद/संविधानसभा में प्रधानमंत्री के बयान से सीमा को लेकर नई बहस शुरू हुई थी, जिसके बाद विदेश मंत्री की ओर से जानकारी दी गई कि नेपाल-भारत बॉर्डर मैनेजमेंट पर संयुक्त कार्य समूह (जेडब्लूजी) की बैठक अगस्त 2026 में प्रस्तावित है। साथ ही सीमा स्तंभों की पहचान, मरम्मत और पुनर्स्थापना के लिए चार संयुक्त फील्ड सर्वे टीमें विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं। संवाद