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Almora News: निराश्रित गोवंश और जंगली सुअरों से किसानों की बढ़ी मुश्किलें
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Tue, 09 Jun 2026 11:33 PM IST
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स्याल्दे (अल्मोड़ा)। स्याल्दे घाटी में निराश्रित गौवंश और जंगली सुअरों की बढ़ती संख्या किसानों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में ऐसे पशुओं की संख्या 150 से अधिक पहुंच चुकी है, जिससे खेती-किसानी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
निराश्रित पशुओं के कारण स्याल्दे घाटी की लगभग 25 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि बंजर होने की कगार पर पहुंच गई है। गेहूं, धान, महुआ, चौलाई, गहत और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों को लगातार नुकसान हो रहा है। खेतों में फसल तैयार होने से पहले ही पशु उन्हें नष्ट कर देते हैं, जिससे किसानों का खेती से मोहभंग होता जा रहा है। कभी यह क्षेत्र अपनी लहलहाती फसलों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विनोद नदी के किनारे की उपजाऊ भूमि भी प्रभावित हो रही है।
कैहड़गांव, भाकूड़ा, जसपुर, पैठाना, तिमली और खटलगांव सहित कई गांवों के किसान इस समस्या से परेशान हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले माह 70 से 80 गौवंश को गो सदन भेजा गया था लेकिन इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। वर्तमान में भी बड़ी संख्या में निराश्रित पशु क्षेत्र में घूम रहे हैं।
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निराश्रित पशुओं के कारण स्याल्दे घाटी की लगभग 25 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि बंजर होने की कगार पर पहुंच गई है। गेहूं, धान, महुआ, चौलाई, गहत और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों को लगातार नुकसान हो रहा है। खेतों में फसल तैयार होने से पहले ही पशु उन्हें नष्ट कर देते हैं, जिससे किसानों का खेती से मोहभंग होता जा रहा है। कभी यह क्षेत्र अपनी लहलहाती फसलों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विनोद नदी के किनारे की उपजाऊ भूमि भी प्रभावित हो रही है।
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कैहड़गांव, भाकूड़ा, जसपुर, पैठाना, तिमली और खटलगांव सहित कई गांवों के किसान इस समस्या से परेशान हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले माह 70 से 80 गौवंश को गो सदन भेजा गया था लेकिन इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। वर्तमान में भी बड़ी संख्या में निराश्रित पशु क्षेत्र में घूम रहे हैं।