सरयू-पिंडर घाटी में बारिश बनी आफत: भूस्खलन की चपेट में आकर सड़कें और संचार ठप; जनजीवन प्रभावित
बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र में 14 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। भूस्खलन से सड़कें बंद हो गई हैं, झूनी गांव का पुल खतरे की जद में है पिंडर घाटी में पिछले दो दिनों से दूरसंचार सेवा पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।
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बागेश्वर जिले के तहसील कपकोट क्षेत्र के अंतर्गत सरयू और पिंडर घाटी में बीते 14 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश और अतिवृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। आपदा के कारण पूरे क्षेत्र में जनजीवन पूरी तरह ठप पड़ गया है। कई मुख्य मार्ग और ग्रामीण सड़कें भूस्खलन की चपेट में आकर बंद हो चुकी हैं, जबकि पैदल संपर्क मार्ग ध्वस्त होने से ग्रामीणों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
झूनी गांव में अतिवृष्टि से सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। ग्राम प्रधान हीरा दानू ने बताया कि गांव को जोड़ने वाला मोटर पुल अब सीधे खतरे की जद में आ गया है। पुल के एक तरफ का पिलर गिरने की कगार पर पहुंच चुका है, जिससे हर समय बड़े हादसे का अंदेशा बना हुआ है। इसके अलावा पेयजल स्रोत और आपूर्ति लाइनें क्षतिग्रस्त होने से गांव में गहरा पेयजल संकट खड़ा हो गया है। गांव के सार्वजनिक शौचालय और स्नानागार पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं और जगह-जगह जमीन धंसने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। प्रधान हीरा दानू ने प्रशासन से तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर सुरक्षा व पुनर्निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है।
दो दिन से बीएसएनएल ठप, नेटवर्क न होने से प्रशासन तक नहीं पहुंच पा रही पीड़ा
कर्मी से लेकर पूरी पिंडर घाटी में पिछले दो दिनों से दूरसंचार सेवा पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। वाछम के ग्राम प्रधान दिनेश दानू ने बताया कि पिंडर घाटी में संचार के लिए केवल बीएसएनएल नेटवर्क का ही सहारा है, लेकिन दो दिन से सिग्नल गायब होने से ग्रामीण पूरी तरह कट गए हैं। ग्रामीण न तो आपदा प्रबंधन का कोई अपडेट ले पा रहे हैं और न ही अपनी परेशानियां प्रशासन तक पहुंचा पा रहे हैं। पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने आपदा प्रभावित पिंडर घाटी का दौरा कर स्थानीय ग्रामीणों का हाल जाना और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि मानसून सीजन की शुरुआत से ही क्षेत्र में सड़कें और संचार व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है। आपदा की इस घड़ी में न तो स्थानीय जनप्रतिनिधि और न ही जिला प्रशासन कोई संवेदनशीलता दिखा रहा है। बंद पड़ी सड़कों को खोलने के लिए मौके पर पर्याप्त मशीनें तक तैनात नहीं हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि धरातल पर काम शून्य है और विकास केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है।