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Almora News: जलदूत से सम्मानित शंकर बने आधुनिक भगीरथ, जल संरक्षण की लिखी नई इबारत
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चौखुटिया (अल्मोड़ा)। जलदूत एवं गौरा देवी पुरस्कार से सम्मानित पर्यावरण प्रेमी शंकर सिंह बिष्ट के नेतृत्व में चलाए जा रहे जल संरक्षण अभियान के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं। मानसून की पहली ही बारिश में विभिन्न क्षेत्रों में बनाई गई खाल-खंतियां (पारंपरिक जल गड्ढे) पानी से लबालब भर गई हैं। इससे भूजल पुनर्भरण (रिचार्ज) की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है जिसे भविष्य में जल संकट से निपटने की दिशा में एक बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
पर्यावरण प्रेमी शंकर सिंह बिष्ट ने बताया कि पिछले कई वर्षों से वे जनसहयोग के माध्यम से जल स्रोतों को बचाने की मुहिम में जुटे हैं। इस अभियान के तहत महत गांव, भटकोट, झूमाखेत, गैरसैंण, हाट, बसभीड़ा, कौसानी और चनौला समेत उत्तराखंड के विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार काम किया जा रहा है।
उनका कहना है कि स्थानीय युवाओं और मातृशक्ति (महिलाओं) के सक्रिय सहयोग से बड़ी संख्या में खाल-खंतियों का निर्माण किया गया है।
अब बारिश का पानी इनमें जमा होने से क्षेत्र का भूजल स्तर बढ़ेगा जिससे सूखते जा रहे पारंपरिक नौलों और प्राकृतिक धारों को नया जीवन मिलने की पूरी उम्मीद है।
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हर गांव में सामुदायिक प्रयास की जरूरत
शंकर सिंह बिष्ट ने समाज से अपील करते हुए कहा कि पानी की बूंद-बूंद को सहेजना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यदि प्रत्येक गांव में ग्रामीण सामुदायिक स्तर पर आगे आकर ऐसे छोटे-छोटे प्रयास करें तो न सिर्फ हमारे पारंपरिक जलस्रोत सुरक्षित रहेंगे, बल्कि सदानीरा नदियों का प्रवाह भी लंबे समय तक बना रहेगा।
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पर्यावरण प्रेमी शंकर सिंह बिष्ट ने बताया कि पिछले कई वर्षों से वे जनसहयोग के माध्यम से जल स्रोतों को बचाने की मुहिम में जुटे हैं। इस अभियान के तहत महत गांव, भटकोट, झूमाखेत, गैरसैंण, हाट, बसभीड़ा, कौसानी और चनौला समेत उत्तराखंड के विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार काम किया जा रहा है।
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उनका कहना है कि स्थानीय युवाओं और मातृशक्ति (महिलाओं) के सक्रिय सहयोग से बड़ी संख्या में खाल-खंतियों का निर्माण किया गया है।
अब बारिश का पानी इनमें जमा होने से क्षेत्र का भूजल स्तर बढ़ेगा जिससे सूखते जा रहे पारंपरिक नौलों और प्राकृतिक धारों को नया जीवन मिलने की पूरी उम्मीद है।
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हर गांव में सामुदायिक प्रयास की जरूरत
शंकर सिंह बिष्ट ने समाज से अपील करते हुए कहा कि पानी की बूंद-बूंद को सहेजना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यदि प्रत्येक गांव में ग्रामीण सामुदायिक स्तर पर आगे आकर ऐसे छोटे-छोटे प्रयास करें तो न सिर्फ हमारे पारंपरिक जलस्रोत सुरक्षित रहेंगे, बल्कि सदानीरा नदियों का प्रवाह भी लंबे समय तक बना रहेगा।