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Almora News: शौर्य चक्र विजेता शहीद चंदन सिंह भंडारी को किया याद
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 19 Mar 2026 11:43 PM IST
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। बग्वालीपोखर क्षेत्रातंर्गत भंडरगांव निवासी शौर्य चक्र विजेता शहीद चंदन सिंह भंडारी को 27 वीं पुण्यतिथि पर याद किया गया। रामलीला ग्राउंड बग्वालीपोखर शहीद स्मारक में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। केआरसी सेंटर रानीखेत के ब्रिगेडियर एसके यादव ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
वक्ताओं ने शहीद चंदन सिंह भंडारी के बलिदान को याद करते हुए युवाओं से उनके शौर्य से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। शहीद की माता शांति देवी, भाई कुंदन सिंह, बहू हेमा देवी, चाचा नंदन सिंह, भाई प्रकाश भंडारी, भूपाल भंडारी, व्यापार मंडल अध्यक्ष अर्जुन बिष्ट, पूर्व सैनिक लीग अध्यक्ष ललित मोहन नेगी, महासचिव मोहन सिंह, सूबेदार मेजर हरि सिंह, जिला सैनिक कल्याण ब्लाक प्रतिनिधि उमेश चंद्र ने पुष्पांजलि अर्पित की।
गोली लगने के बावजूद मोर्चे पर डटे रहे भंडारी
शहीद चंदन सिंह भंडारी का जन्म 10 जनवरी 1976 को भंडरगांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही देश सेवा का जज्बा उन्हें सेना में खींच लाया। 17 अप्रैल 1996 को वह कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती हो गए। वह 19 कुमाऊं रेजिमेंट में थे जो उस वक्त जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात थी। उन्हें सर्च ऑपरेशन का जिम्मा दिया गया था। सर्च पार्टी का एक घर में आतंकवादियों से सामना हो गया। इस दौरान उन्होंने कुछ आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया। उसी मुठभेड़ में उन्हें भी गोली लग गई। बावजूद वह मोर्चे पर डटे रहे। उन्होंने चार आतंकियों को पकड़ने में सहयोग किया। 19 मार्च 1997 को वह शहीद हो गए। उनके अदम्य साहस के लिए उन्हें शौर्य चक्र प्रदान किया गया।
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वक्ताओं ने शहीद चंदन सिंह भंडारी के बलिदान को याद करते हुए युवाओं से उनके शौर्य से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। शहीद की माता शांति देवी, भाई कुंदन सिंह, बहू हेमा देवी, चाचा नंदन सिंह, भाई प्रकाश भंडारी, भूपाल भंडारी, व्यापार मंडल अध्यक्ष अर्जुन बिष्ट, पूर्व सैनिक लीग अध्यक्ष ललित मोहन नेगी, महासचिव मोहन सिंह, सूबेदार मेजर हरि सिंह, जिला सैनिक कल्याण ब्लाक प्रतिनिधि उमेश चंद्र ने पुष्पांजलि अर्पित की।
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गोली लगने के बावजूद मोर्चे पर डटे रहे भंडारी
शहीद चंदन सिंह भंडारी का जन्म 10 जनवरी 1976 को भंडरगांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही देश सेवा का जज्बा उन्हें सेना में खींच लाया। 17 अप्रैल 1996 को वह कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती हो गए। वह 19 कुमाऊं रेजिमेंट में थे जो उस वक्त जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात थी। उन्हें सर्च ऑपरेशन का जिम्मा दिया गया था। सर्च पार्टी का एक घर में आतंकवादियों से सामना हो गया। इस दौरान उन्होंने कुछ आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया। उसी मुठभेड़ में उन्हें भी गोली लग गई। बावजूद वह मोर्चे पर डटे रहे। उन्होंने चार आतंकियों को पकड़ने में सहयोग किया। 19 मार्च 1997 को वह शहीद हो गए। उनके अदम्य साहस के लिए उन्हें शौर्य चक्र प्रदान किया गया।