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Almora News: सड़क की आस में थम गई उटियां सुप्यौला की सांस

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 20 Apr 2026 11:16 PM IST
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The hope of a road has stopped the breath of Utiyan Supyaula
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अल्मोड़ा। उटियां सुप्यौला में अब खामोशी का पहरा है। कभी बच्चों की आवाज और खेती-किसानी की रौनक से भरा रहने वाला यह गांव सूना होता जा रहा है। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव ने यहां के लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। अब ग्रामीण बेहतर भविष्य की तलाश में शहरों की ओर रुख कर रहे हैं।
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भैसियाछाना विकासखंड की उटियां सुप्यौला ग्राम सभा में कुछ वर्ष पहले तक गांव में करीब 400 लोग रहते थे। ग्रामीण बताते हैं कि अब आबादी घटकर करीब 250 रह गई है। कई परिवार रुद्रपुर और हल्द्वानी जैसे शहरों में बस गए हैं। गांव के कई घरों पर ताले लटके हैं जबकि कुछ मकान खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। सूने पड़े आंगन और बंद दरवाजे पलायन की कहानी खुद बयां कर रहे हैं।
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घरों के आसपास पहुंच रहे जंगली जानवर





गांव में कभी खेती-किसानी बड़े स्तर पर होती थी। फलों की अच्छी पैदावार होती थी लेकिन अब अधिकांश खेत बंजर पड़े हैं। खेती से मोह घटने के साथ ही गांव में जंगली जानवरों का आतंक भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब जंगली जानवर घरों के आसपास तक पहुंच रहे हैं जिससे लोगों में डर का माहौल है।

पांच किलोमीटर दूर है स्कूल
उटियां सुप्यौला में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति भी बेहद खराब है। गांव में पहले एक प्राइमरी स्कूल हुआ करता था। लेकिन वह कई साल पहले बंद हो गया। अब गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए करीब 5 किलोमीटर दूर मनियागर जाना पड़ता है। इससे छोटे बच्चों और उनके अभिभावकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

डोली के सहारे मरीज

स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव भी ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। गांव से सड़क करीब 5 किलोमीटर दूर है। ऐसे में किसी के बीमार होने या गर्भवती महिला की तबीयत खराब होने पर उन्हें डोली के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव तक सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच जाएं तो पलायन को काफी हद तक रोका जा सकता है।

क्या बोले ग्रामीण

गांव में मुख्य समस्या सड़क की है। सड़क न होने के कारण लोग पलायन करने के लिए मजबूर हैं।
गोपाल सिंह नेगी, ग्रामीण

हमारे गांव में सड़क नहीं होने से बीमार या फिर गर्भवती महिलाओं को पांच किमी दूर डोली के सहारे सड़क तक ले जाना पड़ता है।
लक्ष्मण सिंह नेगी, ग्रामीण

गांव में मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण लोगों ने लगातार गांव छोड़ना शुरू कर दिया है। खेती बाड़ी भी चौपट हो गई है। खेत बंजर पड़े हुए हैं।
किशन सिंह नेगी, ग्रामीण

गांव में पलायन का मुख्य कारण सड़क का अभव है। इसके लिए लिए कई बार जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी दे चुके हैं। जनता दरबार में अधिकारियों को अपनी समस्या बता चुके हैं लेकिन गांव की सुध लेने को कोई तैयार नहीं है।
अर्जुन सिंह नेगी, ग्राम प्रधान
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