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Almora News: वन तुलसी सूजन के लिए जिम्मेदार एंजाइम के खिलाफ रामबाण
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Sat, 11 Apr 2026 11:22 PM IST
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अल्मोड़ा। जंगली तुलसी (मार्जोरम) के पौधे में शरीर से सूजन घटाने का औषधीय गुण मौजूद हैं। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने जंगली तुलसी में पाए जाने वाले तीन यौगिकों से शरीर में सूजन पैदा करने वाले प्रमुख एंजाइम साइक्लोऑक्सीजनेज टू (सीओएक्स 2) के प्रभाव को निष्क्रिय करने में सफलता हासिल की है।
एसएसजे विवि के वनस्पति विज्ञान विभाग के शोधार्थियों डॉ. विजय आर्या, शिल्पी रावत, प्रियंका जोशी, पंकजा पांडे ने जंगली तुलसी के पौधे में मौजूद 283 फाइटोकेमिकल यौगिकों का आधुनिक कंप्यूटेशनल तकनीक से अध्ययन किया। शोध में वर्चुअल स्क्रीनिंग और मॉलिक्यूलर सिमुलेशन के जरिए तीन प्रमुख यौगिक डायोस्मेटिन, आर्बुटिन और फिनाइल ग्लूकोसाइड की पहचान की गई। अध्ययन में पाया कि इन तीनों यौगिकों सूजन से जुड़े एंजाइम साइक्लोऑक्सीजनेज टू के प्रभाव को नष्ट करने में कारगर हैं। यह शोध प्राकृतिक और सुरक्षित एंटी इन्फ्लेमेटरी दवाओं के निर्माण का आधार बन सकता है।
साइक्लोऑक्सीजनेज टू
साइक्लोऑक्सीजनेज टू एंजाइम शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन रसायनों का बनाने में अहम भूमिका निभाता है। इन रसायनों से शरीर में दर्द, बुखार और सूजन जैसी समस्याएं होती है। यदि इसके प्रभाव को रोका जाए तो शरीर में अंदरूनी और बाहरी हिस्से में सूजन और दर्द को कम किया जा सकेगा।
एंटीइंफ्लेमेटरी दवा के दुष्प्रभाव से मिलेगी निजात
नॉन स्टेरायडल एंटीइंफ्लेमेटरी दवा का सेवन दर्द, सूजन और तेज बुखार को कम करने में होता है। इस दवा का उपयोग गठिया, सिरदर्द, दांत दर्द और चोट में सूजन में होता है लेकिन लंबे समय तक इस दवा के सेवन से पेट के अल्सर और किडनी संबंधी समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे में यह शोध लोगों के लिए नई उम्मीद बन सकता है।
एंटीबैक्टीरियल गुण भी मौजूद
- जंगली तुलसी संक्रमण को रोकने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है। इसके सेवन से गैस, कब्ज, अपच और पेट की ऐंठन जैसी समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही यह श्वसन संक्रमण के उपचार में भी उपयोगी है। इसमें एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो त्वचा को नमी प्रदान करने में मदद करते हैं।
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कोट
- मार्जोरम के पौध में पाए जाने वाले यौगिकों में सूजन को रोकने की क्षमता है। यदि शोध को आगे लैब और क्लिनिकल परीक्षण में सफल रहता है तो प्राकृतिक यौगिकों से सूजनरोधी दवा तैयार की जाए सकेगी। यह दवा पूरी तहर सुरक्षित होगी
— डॉ. सुभाष चंद्रा, मुख्य अन्वेषक, वनस्पति विज्ञान विभाग, एसएसजे विवि, अल्मोड़ा
एसएसजे विवि के वनस्पति विज्ञान विभाग के शोधार्थियों डॉ. विजय आर्या, शिल्पी रावत, प्रियंका जोशी, पंकजा पांडे ने जंगली तुलसी के पौधे में मौजूद 283 फाइटोकेमिकल यौगिकों का आधुनिक कंप्यूटेशनल तकनीक से अध्ययन किया। शोध में वर्चुअल स्क्रीनिंग और मॉलिक्यूलर सिमुलेशन के जरिए तीन प्रमुख यौगिक डायोस्मेटिन, आर्बुटिन और फिनाइल ग्लूकोसाइड की पहचान की गई। अध्ययन में पाया कि इन तीनों यौगिकों सूजन से जुड़े एंजाइम साइक्लोऑक्सीजनेज टू के प्रभाव को नष्ट करने में कारगर हैं। यह शोध प्राकृतिक और सुरक्षित एंटी इन्फ्लेमेटरी दवाओं के निर्माण का आधार बन सकता है।
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साइक्लोऑक्सीजनेज टू
साइक्लोऑक्सीजनेज टू एंजाइम शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन रसायनों का बनाने में अहम भूमिका निभाता है। इन रसायनों से शरीर में दर्द, बुखार और सूजन जैसी समस्याएं होती है। यदि इसके प्रभाव को रोका जाए तो शरीर में अंदरूनी और बाहरी हिस्से में सूजन और दर्द को कम किया जा सकेगा।
एंटीइंफ्लेमेटरी दवा के दुष्प्रभाव से मिलेगी निजात
नॉन स्टेरायडल एंटीइंफ्लेमेटरी दवा का सेवन दर्द, सूजन और तेज बुखार को कम करने में होता है। इस दवा का उपयोग गठिया, सिरदर्द, दांत दर्द और चोट में सूजन में होता है लेकिन लंबे समय तक इस दवा के सेवन से पेट के अल्सर और किडनी संबंधी समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे में यह शोध लोगों के लिए नई उम्मीद बन सकता है।
एंटीबैक्टीरियल गुण भी मौजूद
- जंगली तुलसी संक्रमण को रोकने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है। इसके सेवन से गैस, कब्ज, अपच और पेट की ऐंठन जैसी समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही यह श्वसन संक्रमण के उपचार में भी उपयोगी है। इसमें एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो त्वचा को नमी प्रदान करने में मदद करते हैं।
कोट
- मार्जोरम के पौध में पाए जाने वाले यौगिकों में सूजन को रोकने की क्षमता है। यदि शोध को आगे लैब और क्लिनिकल परीक्षण में सफल रहता है तो प्राकृतिक यौगिकों से सूजनरोधी दवा तैयार की जाए सकेगी। यह दवा पूरी तहर सुरक्षित होगी
— डॉ. सुभाष चंद्रा, मुख्य अन्वेषक, वनस्पति विज्ञान विभाग, एसएसजे विवि, अल्मोड़ा